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कंधमाल में भाँग की अवैध कृषि

  • 16 Dec 2025
  • 18 min read

स्रोत: द हिंदू

ओड़िशा के कंधमाल ज़िले की हरी-भरी पहाड़ियाँ वर्ष 2025 में रिकॉर्ड ज़ब्तियों के कारण राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करते हुए अवैध भॉंग/कैनबिस की कृषि का एक प्रमुख केंद्र बन गई हैं।

  • नीति की विडंबना: कंधमाल अपने भौगोलिक संकेत (GI) वाला कंधमाल हल्दी के लिये जाना जाता है, फिर भी आर्थिक संकट ने गाँववासियों को अवैध कृषि की ओर प्रवृत्त कर दिया है, जो समावेशी ग्रामीण विकास में अंतर को उजागर करता है।
  • अनुकूल भौगोलिक स्थिति: ज़िले का दूरस्थ, वनाच्छादित और पहाड़ी भूभाग, साथ ही भॉंग के लिये उपयुक्त जलवायु, निगरानी तथा पहुँच को अत्यंत कठिन बना देता है, जिससे गुप्त रूप से कृषि को बढ़ावा मिलता है।
  • भॉंग: भॉंग एक सामान्य शब्द है, जिसका उपयोग विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) विभिन्न मनो-सक्रिय तैयारियों के लिये करता है, जो कैनबिस सैटिवा पौधे से प्राप्त होती हैं।
    • भॉंग में प्रमुख मनो-सक्रिय घटक डेल्टा-9 टेट्राहाइड्रोकैनाबिनोल (THC) है। THC के संरचनात्मक समान यौगिकों को कैनाबिनॉइड्स कहा जाता है।
    • भांग 20–30°C के मध्यम तापमान में सबसे अच्छी तरह उगती है और वृद्धि के चरण के अनुसार 40–70% आर्द्रता स्तर की आवश्यकता होती है। 
  • भारत में भॉंग की कृषि: यह इंडो-गैंगेटिक मैदानों और दक्कन क्षेत्र में पाई जाती है।
  • भॉंग का नियमन: इसे मुख्य रूप से स्वापक औषधि एवं मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 द्वारा नियंत्रित किया जाता है, जो भॉंग की कृषि, स्वामित्व, बिक्री, खरीद, परिवहन तथा सेवन को अपराध मानता है, विशेष रूप से इसके रेज़िन (चरस) और फूलों के शीर्ष (गॉंजा) के लिये।
    • यह अधिनियम केंद्रीय सरकार को औद्योगिक उद्देश्यों के लिये भॉंग की कृषि की अनुमति देने का अधिकार देता है, जिसमें रेशा, बीज, तेल और बागवानी उपयोग शामिल हैं।
    • हालाँकि इस अधिनियम में बीज और पत्तियाँ तब शामिल नहीं हैं जब वे सिरों (Tops) के साथ न हों, जिससे राज्यों को भॉंग जैसे उत्पादों को अपने स्थानीय कानूनों के अनुसार नियंत्रित करने की स्वतंत्रता मिलती है।
    • उत्तराखंड वह पहला राज्य है जिसने औद्योगिक भॉंग (हैम्प) की कृषि को कानूनी मान्यता दी है।
    • संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1961 के सिंगल कन्वेंशन ऑन नार्कोटिक ड्रग्स के शेड्यूल IV से भॉंग (Cannabis) को हटा दिया, इसके चिकित्सीय संभावनाओं को मान्यता देते हुए, जबकि नियंत्रित चिकित्सा उपयोग के लिये इसे शेड्यूल I में बनाए रखा।

अधिक पढ़ें: हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा कैनबिस की कृषि को वैध बनाने पर विचार

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