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हबल टेंशन

  • 15 Apr 2026
  • 12 min read

स्रोत: द हिंदू

हाल के अवलोकनों के अनुसार, ब्रह्मांड की स्थानीय विस्तार दर (लोकल एक्सपैंशन रेट) को लगभग 73.5 किमी./सेकंड प्रति मेगापारसेक तक सीमित किया गया है, जिससे लंबे समय से जारी “हबल टेंशन” पर विमर्श और अधिक तीव्र हो गया है।

  • परिभाषा: हबल टेंशन उस असहमति को दर्शाती है, जो भौतिकविदों के बीच ब्रह्मांड के विस्तार की सटीक दर (हबल स्थिरांक) को लेकर विद्यमान है।
    • वर्ष 1929 में एडविन हबल ने आकाशगंगाओं के अपसरण वेग तथा दूरी के मध्य संबंध (हबल का नियम) प्रतिपादित किया, जिसने सर्वप्रथम यह मात्रात्मक साक्ष्य प्रस्तुत किया कि ब्रह्मांड विस्तारशील है।
  • विमर्श के विषय: दो स्वतंत्र रूप से सत्यापित एवं अत्यंत सटीक विधियाँ परस्पर विरोधी परिणाम प्रस्तुत करती हैं, जिससे ब्रह्मांड की अनुमानित विस्तार दर में विसंगति उत्पन्न होती है।
    • स्थानीय मापन विधि: कॉस्मिक डिस्टेंस लैडर (निकटवर्ती तारों एवं सुपरनोवा के अवलोकन) के माध्यम से खगोलविद् लगभग 73–73.5 किमी./सेकंड प्रति मेगापारसेक की अपेक्षाकृत उच्च विस्तार दर का अनुमान लगाते हैं।
    • प्रारंभिक ब्रह्मांड विधि: कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड (बिग बैंग का अवशिष्ट विकिरण) तथा गणितीय मॉडलों के आधार पर वैज्ञानिक लगभग 67 किमी./सेकंड प्रति मेगापारसेक की अपेक्षाकृत निम्न विस्तार दर का अनुमान लगाते हैं।
  • निहितार्थ: यह विसंगति संकेत देती है कि ब्रह्मांड के संबंध में हमारी वर्तमान समझ अपूर्ण हो सकती है, जिससे संभावित मापन त्रुटियों अथवा डार्क एनर्जी के अज्ञात गुणों जैसी नई भौतिकी की संभावनाओं की दिशा में अनुसंधान को प्रोत्साहन मिल रहा है।

और पढ़े: हबल स्थिरांक निर्धारित करने की नई विधि

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