रैपिड फायर
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर
- 15 Apr 2026
- 18 min read
हाल ही में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिये दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का उद्घाटन किया गया।
- परिचय: यह लगभग 210 किमी. लंबा, छह-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे है, जिसकी न्यूनतम डिज़ाइन गति 100 किमी./घंटा है। यह दिल्ली से देहरादून तक विस्तृत है, लगभग ₹11,868 करोड़ की लागत से निर्मित है और इसे चार चरणों में विकसित किया गया है।
- इस परियोजना से यात्रा समय 5-6 घंटे से घटकर लगभग 2-2.5 घंटे होने की संभावना है, साथ ही ईंधन की खपत और लॉजिस्टिक्स लागत में भी कमी आएगी।
- इस एक्सप्रेसवे में नियंत्रित प्रवेश एवं निकास बिंदु, स्थानीय यातायात के लिये समर्पित सर्विस रोड और FASTag-आधारित टोल संग्रह की व्यवस्था शामिल है, जिनका उद्देश्य भीड़भाड़ कम करना और समग्र ड्राइविंग अनुभव को बेहतर बनाना है।
- कनेक्टिविटी: इस परियोजना में अक्षरधाम से खेकरा तक 31.6 किमी. का ब्राउनफील्ड एलिवेटेड खंड, बागपत से सहारनपुर तक 120 किमी. का ग्रीनफील्ड खंड, गणेशपुर तक लगभग 42 किमी. का पूर्ण खंड तथा देहरादून तक लगभग 20 किमी. का अंतिम खंड (आंशिक उन्नयन सहित) शामिल है।
- इसमें हरिद्वार तक एक स्पर (शाखा मार्ग) शामिल है, जो चारधाम राजमार्ग से जुड़ता है। यह दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-कटरा और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख कॉरिडोर से एकीकृत है तथा देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश और मसूरी तक पहुँच को बेहतर बनाता है, जिससे कनेक्टिविटी और पर्यटन को बढ़ावा मिलता है।
- पर्यावरणीय उपाय: इस परियोजना में लगभग 10.97 किमी. लंबा वन्यजीव गलियारा शामिल है, जो कि एशिया के सबसे बड़े एलिवेटेड वन्यजीव कॉरिडोर में से एक को सम्मिलित करता है। यह शिवालिक पहाड़ियों में स्थित राजाजी राष्ट्रीय उद्यान सहित वन क्षेत्रों से होकर गुज़रता है और वन्यजीवों की सुरक्षित एवं निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करता है।
- अतिरिक्त प्रावधानों में अनेक एनिमल क्रॉसिंग, हाथियों के लिये अंडरपास तथा डाट काली मंदिर के पास एक सुरंग शामिल है, जो इस कॉरिडोर में वन्यजीवों की निर्बाध आवाजाही को सुनिश्चित करते हैं।
- इस परियोजना से 20 वर्षों में लगभग 240 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने तथा लगभग 19% ईंधन की बचत होने की संभावना है।
- आर्थिक प्रभाव: यह कॉरिडोर व्यापार, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और उद्योग को बढ़ावा देगा, किसानों और पशुपालकों के लिये बाज़ार तक पहुँच को बेहतर बनाएगा तथा बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर उत्पन्न करेगा।
|
और पढ़ें: भारत में बुनियादी ढाँचे का विकास |
