रैपिड फायर
गैलेक्सी फ्रॉग्स
- 03 Jan 2026
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एक अध्ययन के अनुसार सात दुर्लभ गैलेक्सी फ्रॉग्स लुप्त हो गए हैं और उन्हें मृत माना जा रहा है। पश्चिमी घाट में अनैतिक वन्यजीव फोटोग्राफी और बढ़ता फोटो पर्यटन इसके प्रमुख कारण बताए गए हैं।
- परिचय: गैलेक्सी फ्रॉग (Melanobatrachus indicus) एक दुर्लभ, स्थानिक (एंडेमिक) उभयचर प्रजाति है, जो केवल केरल के पश्चिमी घाट में पाई जाती है।
- इसके चमकीले काले रंग की त्वचा पर नीले धब्बे और नारंगी निशान होते हैं, जो तारों से भरी आकाशगंगा (गैलेक्सी) जैसे प्रतीत होते हैं।
- आवास और वितरण: यह प्रजाति केवल ठंडे और आर्द्र वन क्षेत्रों में सड़ी-गली लकड़ियों के नीचे पाई जाती है। यह केरल और तमिलनाडु के दक्षिणी पश्चिमी घाट के आर्द्र सदाबहार वनों की स्थानिक (एंडेमिक) प्रजाति है।
- गैलेक्सी फ्रॉग्स को केरल के इडुक्की ज़िले स्थित मथिकेतन शोला राष्ट्रीय उद्यान की फ्लैगशिप प्रजाति घोषित किया गया है।
- शारीरिक और व्यावहारिक विशेषताएँ: मात्र 2-3.5 सेमी लंबी यह प्रजाति अवाचक (non-vocal) तथा शीत-रक्तीय होती है और यह श्वसन के लिये आंशिक रूप से नम त्वचा पर निर्भर करती है। इसी कारण यह गर्मी, शुष्कता और मानवीय हस्तक्षेप के प्रति अत्यंत संवेदनशील है।
- संरक्षण स्थिति: इसे अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) द्वारा सुभेद्य (Vulnerable) श्रेणी में रखा गया है। कम जनसंख्या घनत्व और सीमित आवास इसके विलुप्त होने के जोखिम को बढ़ाते हैं।
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