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वयस्क कौशल आकलन सर्वेक्षण, 2026

  • 03 Jan 2026
  • 17 min read

स्रोत: इकॉनोमिक टाइम्स

भारत वर्ष 2026 में वयस्क कौशल दक्षताओं का अपना पहला राष्ट्रव्यापी आकलन करने जा रहा है, जिसका उद्देश्य कार्यबल से जुड़ी चुनौतियों से निपटने तथा जनसांख्यिकीय लाभांश का प्रभावी उपयोग करने के लिये महत्त्वपूर्ण डेटा उपलब्ध कराना है।

वयस्क कौशल आकलन सर्वेक्षण

  • सर्वेक्षण का संचालन निकाय: कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) के अनुरोध पर सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) व्यापक मॉड्यूलर सर्वेक्षण (CMS) ढाँचे के अंतर्गत इस सर्वेक्षण का संचालन करेगा।
    • CMS, मंत्रालयों और विभागों की तात्कालिक नीतिगत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये विशिष्ट विषयों पर लक्षित, अल्पावधि घरेलू सर्वेक्षणों के संचालन को सक्षम बनाता है, जिनका दायरा अपेक्षाकृत संकीर्ण तथा अवधि कम होती है।
  • दायरा और उद्देश्य: यह सर्वेक्षण 18 वर्ष और उससे अधिक आयु की जनसंख्या को कवर करेगा और तीन माह की अवधि में उनकी क्षमताओं को मूल, मध्यवर्ती तथा उन्नत कौशल स्तरों में वर्गीकृत करेगा।
  • सर्वेक्षण की आवश्यकता: इसकी आवश्यकता इसलिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि भारत की कार्यशील आयु जनसंख्या (15–59 वर्ष) वर्ष 2030 तक 68.9% तक पहुँचने का अनुमान है। वर्तमान में भारत में समग्र कौशल स्तरों पर कोई समर्पित डेटा उपलब्ध नहीं है।
  • मौजूदा सर्वेक्षणों में डेटा अंतराल: आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) केवल यह दर्ज करता है कि किसी व्यक्ति ने व्यावसायिक या तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त किया है या नहीं, न कि अर्जित कौशल की गुणवत्ता या स्तर को। इससे कार्यबल की तत्परता का सटीक आकलन सीमित हो जाता है।
  • कौशल-रोज़गार योग्यता असंतुलन: नियोजित जनसंख्या के लगभग तीन-चौथाई हिस्से के पास केवल बुनियादी शिक्षा है। स्नातकों में रोज़गार योग्यता मात्र 54.8% है, जो शिक्षा परिणामों और श्रम बाज़ार की आवश्यकताओं के बीच गंभीर असंगति को दर्शाता है।
  • व्यावसायिक प्रशिक्षण के रुझान: 15-59 आयु वर्ग में व्यावसायिक/तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों का अनुपात वर्ष 2023–24 में बढ़कर 34.7% हो गया, जो वर्ष 2022–23 में 27.4% था।
    • हालाँकि, प्रशिक्षण में बढ़ी हुई भागीदारी के अनुरूप रोज़गार योग्यता में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो पाई है, जिससे कौशल की गुणवत्ता के प्रभावी मूल्यांकन की आवश्यकता और भी स्पष्ट हो जाती है।

और पढ़ें: कौशल भारत कार्यक्रम का पुनर्गठन

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