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मन्नथु पद्मनाभन की जयंती

  • 03 Jan 2026
  • 16 min read

स्रोत: पी.आई.बी

प्रधानमंत्री ने मन्नथु पद्मनाभन (2 जनवरी, 1878 - 25 फरवरी, 1970) की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जीवन समाज सेवा के लिये समर्पित था। जिन्होंने अपना जीवन गरिमा, समानता और राष्ट्र निर्माण के लिये समर्पित कर दिया था।

  • परिचय: मन्नथु पद्मनाभन केरल के एक प्रमुख समाज सुधारक थे, जो जातिगत भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार को चुनौती देने के लिये जाने जाते थे।
    • उन्होंने 1914 में नायर सर्विस सोसाइटी (NSS) की स्थापना की और सामाजिक सुधार, शिक्षा और सामुदायिक उत्थान को संस्थागत रूप दिया, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि उनके आदर्श उनके जीवनकाल के बाद भी कायम रहें।
  • गांधीवादी विचारों का प्रभाव: महात्मा गांधी से प्रेरित होकर उन्होंने सामाजिक न्याय के लिये सत्याग्रह को एक नैतिक और राजनीतिक साधन के रूप में अपनाया।
  • अस्पृश्यता-विरोधी आंदोलनों के अग्रदूत: उन्होंने सवर्णजाथा सत्याग्रह का नेतृत्व किया और उत्पीड़ित समुदायों के लिये मंदिर प्रवेश का समर्थन किया, जिससे ऐतिहासिक मंदिर प्रवेश उद्घोषणा का मार्ग प्रशस्त हुआ।
    • वैकोम (1924) और गुरुवायूर (1931) सत्याग्रहों में उनकी सक्रिय भागीदारी ने उन्हें जातिगत भेदभाव के विरुद्ध भारत के संघर्ष की अग्रिम पंक्ति में स्थापित किया।
    • उन्होंने निरंतर शांति, एकता और अंतर-समुदाय सौहार्द को बढ़ावा दिया, जिससे केरल की बहुलतावादी परंपरा सुदृढ़ हुई।
  • पुरस्कार और सम्मान: सामाजिक सुधार में उनके योगदान के लिये उन्हें वर्ष 1966 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया तथा भारत के राष्ट्रपति द्वारा ‘भारत केसरी’ की उपाधि प्रदान की गई।
  • स्वतंत्रता सेनानी: वे भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में, विशेषकर त्रावणकोर क्षेत्र में सक्रिय रूप से जुड़े रहे। इस दौरान उन्हें कारावास का सामना भी करना पड़ा, जो राजनीतिक स्वतंत्रता और सामाजिक सुधार दोनों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
  • परिवर्तनकारी विरासत: उन्होंने कर्म, एकता और आत्म-परिवर्तन के दर्शन का प्रसार कर पूरे समुदाय को नवजीवन दिया। उनका प्रभाव पीढ़ी-दर-पीढ़ी बना हुआ है और केरल के सामाजिक, राजनीतिक तथा सांस्कृतिक इतिहास में गहराई से रचा-बसा है।

Mannathu_Padmanabhan

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