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DRDO की मिशन मोड परियोजनाओं पर कैग की रिपोर्ट

  • 26 Dec 2022
  • 10 min read

हाल ही में भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG) ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)  के मिशन मोड (MM) परियोजनाओं की अवधि तथा लागत में वृद्धि को चिह्नित किया गया है।

  • MM परियोजनाओं को DRDO द्वारा विशिष्ट उपयोगकर्त्ता आवश्यकताओं और उनके पूरा होने के लिये निश्चित समयसीमा के आधार पर उच्च प्राथमिकता के साथ शुरू किया जाता है।
    • ये परियोजनाएँ उन तकनीकों पर निर्भर करती हैं जो पहले से उपलब्ध एवं प्रमाणित हैं तथा DRDO या भारत के भीतर या विदेश से अल्प सूचना पर आसानी से उपलब्ध हैं।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:

  • समग्र परियोजना प्रबंधन में अक्षमताएँ रही हैं जिसके परिणामस्वरूप लागत में वृद्धि, परियोजनाओं के प्रत्याशित लाभों का अधिक मूल्यांकन और रिपोर्ट प्रस्तुत करने में देरी के कई उदाहरण सामने आए हैं।
  • सफल परियोजनाओं के उत्पादन में विलंब के मुद्दे रहे हैं जो ऐसी परियोजनाओं को शुरू करने के उद्देश्य को ही विफल कर देते हैं।
  • इस तथ्य के बावजूद कि अंतर्निहित प्रौद्योगिकी की उपलब्धता के कारण MM परियोजनाओं में बहुत उच्च परिणाम निश्चितता है, DRDO द्वारा ऐसी परियोजनाओं की शुरुआत और मंज़ूरी में काफी देरी हुई थी।
  • 178 परियोजनाओं में से 119 में मूल समय-सारणी का पालन नहीं किया जा सका।
    • 49 मामलों में अतिरिक्त समय वास्तव में मूल समयसीमा के 100% से अधिक था।
  • विलंब का परास 16 से 500% तक था और इसमें कई बार विस्तार किया गया था।
  • जनवरी 2010 और दिसंबर 2019 के दौरान सफल घोषित 86 परियोजनाओं में से 20 परियोजनाओं में एक या अधिक प्रमुख उद्देश्य/मापदंड प्राप्त नहीं हुए थे।
    • परियोजना प्रस्ताव के सभी प्रमुख उद्देश्यों/मापदंडों को प्राप्त करने के लिये समय बढ़ाने की मांग के बजाय इन परियोजनाओं को सफल मान कर बंद कर दिया गया।
  • DRDO और सेवाओं के बीच तालमेल की कमी भी थी, जिसके परिणामस्वरूप गुणात्मक आवश्यकताओं, वितरण और उपयोगकर्त्ता परीक्षणों के परिणामों को लेकर अलग-अलग विचार थे। इसने MM परियोजनाओं की समग्र सफलता दर को प्रभावित किया।

CAG:

  • भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG) भारत के संविधान के तहत एक स्वतंत्र प्राधिकरण है।
  • यह भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा विभाग का प्रमुख और सार्वजनिक क्षेत्र का प्रमुख संरक्षक है।
  • इस संस्था के माध्यम से संसद और राज्य विधानसभाओं के लिये सरकार एवं अन्य सार्वजनिक प्राधिकरणों (सार्वजनिक धन खर्च करने वाले) की जवाबदेही सुनिश्चित की जाती है तथा यह जानकारी जनसाधारण को दी जाती है।
  • एक बार CAG के पद से सेवानिवृत्त होने/इस्तीफा देने के बाद वह भारत सरकार या किसी भी राज्य सरकार के अधीन किसी भी कार्यालय का पदभार नहीं ले सकता।
  • अनुच्छेद 148 CAG के एक स्वतंत्र कार्यालय का प्रावधान करता है।
    • CAG से संबंधित अन्य प्रावधानों में शामिल हैं: अनुच्छेद 149-151 (कर्तव्य और शक्तियाँ, संघ एवं राज्यों के खातों का प्रपत्र तथा लेखापरीक्षा रिपोर्ट), अनुच्छेद 279 (शुद्ध आय की गणना आदि), तीसरी अनुसूची (शपथ या प्रतिज्ञान), छठी अनुसूची (असम, मेघालय, त्रिपुरा व मिज़ोरम राज्यों में जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन)।

DRDO 

  • परिचय : 
    • DRDO रक्षा मंत्रालय का रक्षा अनुसंधान एवं विकास विंग है, जिसका लक्ष्य भारत को अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों से सशक्त बनाना है।
    • आत्मनिर्भरता व सफल स्वदेशी विकास एवं सामरिक प्रणालियों तथा प्लेटफाॅर्मों जैसे- अग्नि और पृथ्वी शृंखला मिसाइलों के उत्पादन की इसकी खोज जैसे- हल्के लड़ाकू विमान, तेजस: बहु बैरल रॉकेट लाॅन्चर, पिनाका: वायु रक्षा प्रणाली, आकाश: रडार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों की एक विस्तृत शृंखला आदि ने भारत की सैन्य शक्ति को प्रभावशाली निरोध पैदा करने तथा महत्त्वपूर्ण लाभ प्रदान करने में प्रमुख योगदान दिया है।
  • DRDO के विभिन्न कार्यक्रम:
    • एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP):
    • यह मिसाइल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय रक्षा बलों को आत्मनिर्भर बनाने हेतु डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के प्रमुख कार्यों में से एक था। 
    • IGMDP के तहत विकसित मिसाइलें हैं: पृथ्वी, अग्नि, त्रिशूल, आकाश, नाग।
    • मोबाइल ऑटोनोमस रोबोट सिस्टम (MARS): 
      • MARS लैंड माइन्स और इनर्ट एक्सप्लोसिव डिवाइसेज़ (Inert Explosive Devices- IEDs) को संभालने के लिये एक स्मार्ट मज़बूत रोबोट है जो भारतीय सशस्त्र बलों से शत्रुओं को दूर कर निष्क्रिय करने में मदद करता है।
      • कुछ एड-ऑन के साथ इस प्रणाली का उपयोग वस्तु के लिये ज़मीन खोदने और विभिन्न तरीकों से इम्प्रवाइज़्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस को डिफ्यूज़ करने हेतु भी किया जा सकता है।
    • लद्दाख में सबसे ऊंँचा स्थलीय केंद्र:
      • लद्दाख में DRDO का केंद्र पैंगोंग झील के पास चांगला में समुद्र तल से 17,600 फीट ऊपर है, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक और औषधीय पौधों के संरक्षण के लिये एक प्राकृतिक कोल्ड स्टोरेज इकाई के रूप में कार्य करना है।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष का प्रश्न  

प्रिलिम्स

प्रश्न. भारत में यह सुनिश्चित करने के अलावा कि सार्वजनिक निधियों का उपयोग कुशलतापूर्वक एवं उनके इच्छित उद्देश्य के लिये किया जाता है, नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG) के कार्यालय का क्या महत्त्व है?(2012)

  1. जब भारत का राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल/वित्तीय आपातकाल की घोषणा करता है, उस समय CAG संसद की ओर से राजकोष पर नियंत्रण रखती है।
  2. मंत्रियों द्वारा परियोजनाओं या कार्यक्रमों के निष्पादन पर CAG रिपोर्ट पर लोक लेखा समिति द्वारा चर्चा की जाती है।
  3. CAG रिपोर्टों की जानकारी का उपयोग जाँच एजेंसियों द्वारा उन लोगों के खिलाफ आरोपों को दबाने के लिये किया जा सकता है जिन्होंने सार्वजनिक वित्त का प्रबंधन करते समय कानून का उल्लंघन किया है।
  4. सरकारी कंपनियों के ऑडिट और अकाउंटिंग से निपटने के दौरान CAG के पास कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ मुकदमा चलाने की कुछ न्यायिक शक्तियाँ हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा सही है / हैं?

(a) केवल 1, 3 और 4
(b) केवल 2  
(c) केवल 2 और 3  
(d) 1, 2, 3 और  4 

उत्तर : (c) 


मेन्स

प्रश्न.“नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका है।” समझाएँ कि यह उसकी नियुक्ति की पद्धति और शर्तों के साथ-साथ उसके द्वारा प्रयोग की जाने वाली शक्तियों की सीमा में कैसे परिलक्षित होती है?  (2018)

प्रश्न. संघ एवं राज्यों की लेखाओं के संबध में नियंत्रक और महालेखापरीक्षक की शक्तिओं का प्रयोग भारतीय संविधान के अनुच्छेद 149 से व्युत्पन्न है। चर्चा कीजिये कि क्या सरकार की नीति कार्यान्वयन की लेखापरीक्षा करना अपने स्वयं (नियंत्रक और महालेखापरीक्षक) की अधिकारिता का अतिक्रमण करना होगा या नहीं। (2016) 

स्रोत : द हिंदू 

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