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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन की अवधि को 2028 तक बढ़ाया

  • 11 Mar 2026
  • 19 min read

स्रोत: पीआईबी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन (JJM) की अवधि को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंज़ूरी दे दी है, जिसमें कुल परिव्यय (8.69 लाख करोड़ रुपये) में वृद्धि की गई है और JJM 2.0 के तहत ग्रामीण पेयजल आपूर्ति में संरचनात्मक सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

  • JJM 2.0 का उद्देश्य : JJM 2.0 का उद्देश्य दिसंबर 2028 तक सभी 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल-जल कनेक्शन उपलब्ध कराकर सभी ग्राम पंचायतों को 'हर घर जल' के रूप में प्रमाणित करना है।
    • वर्तमान में, लगभग 15.80 करोड़ (81.61%) ग्रामीण परिवारों के पास नल-जल कनेक्शन उपलब्ध है।
  • डिजिटल शासन ढाँचा: एक समान राष्ट्रीय डिजिटल ढाँचा, जिसे ‘सुजलम भारत’ कहा जाएगा, स्थापित किया जाएगा, जिसके तहत प्रत्येक गाँव को एक विशिष्ट सुजल गाँव/सेवा क्षेत्र आईडी आवंटित की जाएगी, जो स्रोत से नल तक संपूर्ण पेयजल आपूर्ति प्रणाली का डिजिटल मानचित्रण करेगी।
  • सामुदायिक स्वामित्व तंत्र: पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिये,  ‘जल अर्पण’ के अंतर्गत योजनाओं के क्रियान्वयन में ग्राम पंचायतों और ग्राम जल स्वच्छता समितियों को शामिल करना अनिवार्य है। पर्याप्त संचालन और रखरखाव तंत्र की पुष्टि होने पर ही कोई ग्राम पंचायत स्वयं को ‘हर घर जल’ प्रमाणित करेगी।
  • रणनीतिक दृष्टि: JJM 2.0, ‘संपूर्ण सरकारी’ दृष्टिकोण का उपयोग करते हुए, अवसंरचना-केंद्रित दृष्टिकोण से नागरिक-केंद्रित उपयोगिता-आधारित सेवा वितरण दृष्टिकोण की ओर बढ़ते हुए, 24×7 सुनिश्चित ग्रामीण पेयजल आपूर्ति के साथ विकसित भारत @2047  के विज़न को भी बढ़ावा देता है।

JJM का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव

  • एसबीआई रिसर्च: JJM ने 9 करोड़ महिलाओं को पानी ढोने के काम से मुक्त किया है, जिससे वे अन्य आर्थिक कार्यकलापों में अधिक भागीदारी कर पा रही हैं।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO): यह अनुमान लगाया गया है कि महिलाओं के श्रमसाध्य कार्य में प्रतिदिन 5.5 करोड़ घंटे की बचत करने से डायरिया से होने वाली 400,000 मौतों को रोका जा सका है और 14 मिलियन दिव्यांगजनों समायोजित जीवन वर्षों (DALY) की बचत हुई है।
  • नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर माइकल क्रेमर ने पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 30 प्रतिशत की संभावित कमी का अनुमान लगाया है, जिससे प्रतिवर्ष 1,36,000 बच्चों की जान बचाई जा सकती है।
  • IIM बंगलूरू और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने JJM के माध्यम से 59.9 लाख प्रत्यक्ष एवं 2.2 करोड़ अप्रत्यक्ष व्यक्ति-वर्ष के संभावित रोज़गार सृजन का अनुमान लगाया है।

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