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बलिराजगढ़ का किला

  • 16 Mar 2026
  • 13 min read

स्रोत: द हिंदू 

भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) ने बिहार के मधुबनी ज़िले में स्थित बलिराजगढ़ किले (आधिकारिक तौर पर "प्राचीन किले के अवशेष") में वैज्ञानिक खुदाई के लिये नए सिरे से स्वीकृति प्रदान की है।

बलिराजगढ़ का किला

  • परिचय: यह लगभग 200 ईसा पूर्व का एक संरक्षित राष्ट्रीय स्मारक है, जो मिथिला क्षेत्र की प्रारंभिक सभ्यता और राजा बलि (हिंदू पौराणिक कथाओं के परोपकारी शासक) से इसके पौराणिक संबंधों को अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।
    • ASI के पटना सर्किल का यह भाग बिहार के 71 राष्ट्रीय महत्त्व के संरक्षित स्थलों में से एक है।
  • सांस्कृतिक अनुक्रम: यह किलेबंदी मुख्य रूप से शुंग काल के दौरान लगभग 200 ईसा पूर्व की है, जिसमें पूर्ववर्ती लौह युग के साक्ष्य मिलते हैं।
    • उत्खनन से उत्तरी काले पॉलिशयुक्त मृद्भांड (NBPW) चरण (लगभग 700–200 ईसा पूर्व) से विस्तृत एक 5-गुना सांस्कृतिक अनुक्रम सामने आया है, जिसके बाद शुंग, कुषाण, पाल और गुप्त काल (12वीं शताब्दी ईस्वी तक) आते हैं, जो प्रारंभिक ऐतिहासिक से प्रारंभिक मध्यकाल तक निरंतर निवास का संकेत देता है।
  • पुरातात्त्विक निष्कर्ष: पिछले उत्खनन से संरचनात्मक अवशेष, NBPW मृद्भांड और कलाकृतियाँ मिलीं, जो इस स्थल को विशाल दीवारों, ऊँचे टीलों और रक्षात्मक विशेषताओं वाले एक प्रमुख शहरी केंद्र के रूप में पुष्टि करती हैं।
  • उत्खनन इतिहास: इस स्थल की पहचान सर्वप्रथम वर्ष 1884 में जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन, जो उस समय मधुबनी के उप-मंडल मजिस्ट्रेट थे, ने की थी।
    • व्यवस्थित उत्खनन 1962–63, 1972–73 और 2013–14 में किये गए, हालाँकि अंतिम उत्खनन को पर्यावरणीय बाधाओं और भूजल स्तर अधिक होने के कारण बीच में ही छोड़ दिया गया।

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