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‘राष्ट्रीय वयोश्री योजना’

  • 24 Mar 2017
  • 6 min read

संदर्भ

विदित हो कि गरीबी रेखा से संबद्ध वरिष्ठ नागरिकों को शारीरिक सहायता एवं जीवन यापन के लिये आवश्यक उपकरण प्रदान करने वाली ‘राष्ट्रीय वयोश्री योजना’ का शुभारंभ आंध्र प्रदेश के नेल्लोर ज़िले में 01 अप्रैल 2017 को किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों के जीवन यापन के लिये आवश्यक उपकरणों को शिविरों के माध्यम से वितरित किया जाएगा। ये सहायक उपकरण उच्च गुणवत्ता से युक्त होंगे और इन उपकरणों को भारत मानक ब्यूरो द्वारा तय मापदंडों के अनुसार तैयार किया जाएगा। यह सार्वजनिक क्षेत्र की केन्द्रीय योजना है, जिसके लिये पूर्ण रूप से केन्द्र सरकार द्वारा अनुदान दिया जाएगा।

योजना की मुख्य विशेषताएँ

  • योग्य वरिष्ठ नागरिकों को उनकी विकलांगता/दुर्बलता के अनुरूप निःशुल्क उपकरणों का वितरण किया जाएगा। एक ही व्यक्ति में अनेक विकलांगता/दुर्बलता पाए जाने की स्थिति में, प्रत्येक विकलांगता/दुर्बलता के लिये अलग-अलग उपकरण प्रदान किये जाएंगे।
  • ये उपकरण वरिष्ठ नागरिकों को आयु संबंधी शारीरिक दिक्कतों से निपटने में मदद करेंगे और परिवार के अन्य सदस्यों के ऊपर उनकी निर्भरता को कम करते हुए उन्हें बेहतर जीवन जीने का अवसर देंगे।
  • योजना को भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (सामाजिक अधिकारिता एवं न्याय मंत्रालय के अंतर्गत एक सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम) नामक एकमात्र कार्यान्वयन एजेंसी द्वारा लागू किया जाएगा।
  • भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम बुज़ुर्गों को दी जाने वाली इस सहायता एवं सामान्य जीवन जीने के लिये आवश्यक उपकरणों की एक वर्ष तक निःशुल्क देखरेख करेगा।
  • प्रत्येक ज़िले में लाभार्थियों की पहचान राज्य/केन्द्रशासित प्रदेशों के प्रशासनों द्वारा उपायुक्त/ज़िलाधीश की अध्यक्षता वाली कमेटी के ज़रिये की जाएगी। उल्लेखनीय है कि जहाँ तक संभव होगा, प्रत्येक ज़िले में 30 फीसद बुज़ुर्ग महिलाओं को लाभार्थी बनाने का प्रयास किया जाएगा। 
  • बीपीएल श्रेणी के बुज़र्गों की पहचान करने के लिये राज्य सरकार, केन्द्रशासित प्रदेश या ज़िलास्तरीय कमेटी, एनएएसपी अथवा किसी अन्य योजना के अंतर्गत वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त कर रहे बीपीएल लाभार्थियों के आँकड़े एवं जानकारियों का उपयोग कर सकते हैं।
  • इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिये आगामी तीन वर्षों (वित्तीय वर्ष 2019-20 तक) के लिये अनुमानित वित्तीय खर्च 483.6 करोड़ रुपए है।

‘राष्ट्रीय वयोश्री योजना’ का महत्त्व

  • गौरतलब है कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में वरिष्ठ नागरिकों की आबादी 10.38 करोड़ है। वरिष्ठ नागरिकों की 70 फीसदी से भी अधिक आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। वरिष्ठ नागरिकों का एक बड़ा प्रतिशत वृद्धावस्था में होने वाली अक्षमताओं से पीड़ित है। एक अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2026 तक उम्रदराज़ लोगों की आबादी बढ़कर करीब 173 मिलियन हो जाएगी।
  • संपन्न घरों के बुजुर्गों को बढ़ती उम्र की परेशानियों से निपटने के लिये संसाधन और सुविधाएँ कमोबेश मिल जाती हैं लेकिन गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे बुजुर्गों की सुध कोई नहीं लेता। इन सभी बातों का संज्ञान लेते हुए केन्द्र सरकार ने वृद्धावस्था में होने वाली बीमारियों से पीड़ित, गरीबी रेखा से संबंध रखने वाले वरिष्ठ नागरिकों को शारीरिक सहायता एवं जीवन यापन के लिये आवश्यक उपकरण प्रदान करने के लिये सार्वजनिक क्षेत्र की इस केन्द्रीय योजना का प्रस्ताव किया है।

निष्कर्ष

  • ध्यातव्य है कि गरीबी रेखा से संबंध रखने वाले वरिष्ठ नागरिकों को शारीरिक सहायता एवं जीवन यापन के लिये आवश्यक उपकरण प्रदान करने की योजना तैयार करने के प्रस्ताव की घोषणा 2015-16 के बजट में ही कर दी गई थी। इसके लिये  ‘राष्ट्रीय वयोश्री योजना’ को तैयार किया जा चुका है, जो अब 1 अप्रैल से लागू होने वाली है। सरकार का यह प्रयास अत्यंत ही सराहनीय है। लोगों के सामाजिक जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने को प्रेरित, कल्याणकारी उद्देश्यों वाली यह योजना आयु संबंधी बीमारियों का सामना कर रहे बीपीएल श्रेणी से संबद्ध बुज़ुर्गों को जीवन यापन के लिये आवश्यक उपकरण प्रदान कर, उनके जीवन को सामान्य बनाने में महत्त्वपूर्ण साबित होगी। विदित हो कि इस योजना के कार्यान्वयन के लिये अनुदान ‘वरिष्ठ नागरिक’ कल्याण कोष से मिलेगा। देश में यह अपनी तरह की पहली महत्त्वाकांक्षी योजना है जिससे आगामी तीन वर्षों में करीब 5,20,000 वरिष्ठ नागरिकों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
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