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हिंदू-कुश हिमालय क्षेत्र में जल संकट

  • 02 Mar 2020
  • 6 min read

प्रीलिम्स के लिये:

हिंदू-कुश हिमालय, तीसरा ध्रुव

मेन्स के लिये:

हिमालय का संरक्षण

चर्चा में क्यों?

जल नीति (Water Policy) पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, जलवायु परिवर्तन तथा अपर्याप्त शहरी नियोजन के कारण हिंदू-कुश हिमालय (Hindu Kush Himalayan- HKH) क्षेत्र के चार देशों - बांग्लादेश, भारत, नेपाल और पाकिस्तान के 13 नगरों में से 12 नगर जल-असुरक्षा (Water Insecurity) का सामना कर रहे हैं।

मुख्य बिंदु:

  • यह हिंदू-कुश हिमालय पर किया गया प्रथम अध्ययन है जो पानी की उपलब्धता, पानी की आपूर्ति प्रणाली, बढ़ते नगरीकरण और जल की मांग (दैनिक और मौसमी दोनों) में वृद्धि तथा बढ़ती जल असुरक्षा के मध्य संबंध स्थापित करता है।
  • इस अध्ययन में भौतिक वैज्ञानिक, मानवविज्ञानी, भूगोलविद् और योजनाकार आदि से मिलकर बनी बहु-अनुशासित टीम शामिल थी।

हिंदू-कुश हिमालयन (HKH) क्षेत्र:

  • यह भारत, नेपाल और चीन सहित आठ देशों में फैला हुआ है, जो लगभग 240 मिलियन लोगों की आजीविका का साधन है।
  • HKH क्षेत्र को तीसरा ध्रुव भी कहा जाता है क्योंकि यह उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के बाद स्थायी हिम आवरण का तीसरा बड़ा क्षेत्र है।
  • यहाँ से 10 से अधिक नदियों का उद्गम होता है, जिनमें गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेकांग जैसी बड़ी नदियाँ शामिल हैं।

जल-असुरक्षा के कारण:

  • इस अध्ययन में जल असुरक्षा के निम्नलिखित कारणों की पहचान की गई है:
    • खराब जल प्रशासन
    • खराब शहरी नियोजन
    • खराब पर्यटन प्रबंधन
    • जलवायु संबंधी जोखिम और चुनौतियाँ
  • यहाँ के योजनाकारों और स्थानीय सरकारों ने इन नगरों में दीर्घकालिक रणनीतियँ बनाने पर विशेष ध्यान नहीं दिया।
  • ग्रामीण क्षेत्रों से नगरों की ओर प्रवासन से हिंदू-कुश हिमालय क्षेत्र में नगरीकरण लगातार बढ़ रहा है। यद्यपि वर्तमान में यहाँ के बड़े नगरों की आबादी केवल 3% तथा छोटे शहरों की आबादी केवल 8% है, लेकिन अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2050 तक नगरीय आबादी 50% से अधिक हो जाएगी, इससे जल तनाव बहुत बढ़ जाएगा।
  • यहाँ 8 कस्बों में जल की मांग और आपूर्ति का अंतर 20-70% के बीच है तथा मांग-आपूर्ति का यह अंतर वर्ष 2050 तक दोगुना हो सकता है।
  • यहाँ की नियोजन प्रक्रियाओं में नगरों के आसपास के क्षेत्रों को शामिल नहीं किया गया है, इससे प्राकृतिक जल निकायों (स्प्रिंग्स, तालाबों, झीलों, नहरों और नदियों) का अतिक्रमण तथा अवनयन हो गया, साथ ही इन क्षेत्रों की पारंपरिक जल प्रणालियाँ भी नष्ट हो गईं।

जल संकट से प्रभावित नगर:

  • हिंदू-कुश हिमालय क्षेत्र के 12 नगरों में जल प्रबंधन संबंधी समस्या देखी गई है, ये इस प्रकार हैं:
    • मुर्रे(Murree) और हैवेलियन (पाकिस्तान)
    • काठमांडू, भरतपुर, तानसेन और दामौली (नेपाल)
    • मसूरी, देवप्रयाग, सिंगतम, कलिम्पोंग और दार्जिलिंग (भारत)
    • सिलहट (बांग्लादेश)

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जल संकट का समाधान:

  • योजनाकारों और स्थानीय सरकारों को नगरों में सतत् जलापूर्ति के लिये दीर्घकालिक रणनीतियों को अपनाना चाहिये।
  • एक समग्र जल प्रबंधन दृष्टिकोण, जिसमें स्प्रिंग्सशेड प्रबंधन (Springshed Management) और नियोजित अनुकूलन (Planned Adaptation) शामिल हो, को सर्वोपरि रखकर नीतियों का निर्माण करना चाहिये।

स्प्रिंग्स (Springs):

  • स्प्रिंग्स मूल रूप से भूजल निर्वहन के प्राकृतिक स्रोत हैं जिनका उपयोग विश्व में पर्वतीय क्षेत्रों के साथ-साथ भारत में भी बड़े पैमाने पर किया जाता रहा है।
  • स्प्रिंग्स वह स्रोत बिंदु है जहाँ किसी जलभृत (Aquifer) से जल निकलकर पृथ्वी की सतह पर बहता है। यह जलमंडल का एक घटक है।
  • नगरिय जल निकायों तथा आर्द्रभूमि का संरक्षण किया जाना चाहिये क्योंकि ये न केवल बाढ़ आदि रोकने में मदद करते हैं अपितु पारिस्थितिक तंत्र को भी मज़बूती प्रदान करते हैं।

आगे की राह:

हिंदू-कुश हिमालय क्षेत्र के सभी देशों को मिलकर सक्षम वातावरण और संस्थाएँ बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिये जो पर्वतीय लोगों को समावेशी विकास और सतत् विकास के लाभों को साझा करने के लिये सशक्त करें।

स्रोत: द हिंदू

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