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स्वैच्छिक आचार संहिता

  • 30 Sep 2019
  • 3 min read

चर्चा में क्यों?

इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (Internet & Mobile Association of India- IAMAI) ने अपने सदस्यों की ओर से आगामी चुनावों के दौरान "स्वैच्छिक आचार संहिता" का पालन करने की सहमति व्यक्त की है। IAMAI ने चुनाव आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने में सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया है।

पृष्ठभूमि:

चुनाव आयोग के प्रोत्साहन के बाद सभी प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों और IAMAI ने एक साथ आम चुनाव 2019 के लिए "स्वैच्छिक आचार संहिता" को प्रस्तुत किया। 20 मार्च, 2019 को आयोग के सामने पेश किये जाने के बाद यह तत्काल प्रभाव में आ गई।

इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया

(Internet & Mobile Association of India- IAMAI):

  • यह सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकृत एसोसिएशन है।
  • यह भारत में ऑनलाइन और मोबाइल वीएएस (Value-added service- VAS) उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाला एकमात्र पेशेवर उद्योग निकाय है।
  • इसे वर्ष 2004 में अग्रणी ऑनलाइन प्रकाशकों द्वारा स्थापित किया गया था। पिछले 10 वर्षों में इसने डिजिटल और ऑनलाइन उद्योग के सामने आने वाली चुनौतियों का प्रभावी ढंग से निपटान किया है, जिसमें मोबाइल सामग्री और सेवाएँ, ऑनलाइन प्रकाशन, मोबाइल विज्ञापन, ऑनलाइन विज्ञापन और ई-कॉमर्स आदि शामिल हैं।

प्रमुख बिंदु:

  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म; चुनावी कानूनों और अन्य संबंधित निर्देशों सहित जागरूकता बढ़ाने के लिए स्वेच्छा से सूचना, शिक्षा तथा संचार संबंधित अभियान चलाएगा।
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने चुनाव आयोग द्वारा दर्ज किये गए मामलों पर कार्रवाई करने के लिये एक उच्च प्राथमिकता वाला शिकायत निवारण चैनल बनाया है।
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तथा चुनाव आयोग ने संयुक्त रूप से एक अधिसूचना तंत्र विकसित किया है, जिसके माध्यम से चुनाव आयोग द्वारा जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (The Representation of the People Act, 1951) की धारा 126 और अन्य चुनावी कानूनों के संभावित उल्लंघनों को सूचित किया जा सकता है।
  • सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके प्लेटफ़ॉर्म पर सभी राजनीतिक विज्ञापन सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार मीडिया प्रमाणन और निगरानी समितियों से पूर्व-प्रमाणित हों।
  • इसमें भाग लेने वाले सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म राजनीतिक विज्ञापनों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिये प्रतिबद्ध होंगे।

स्रोत: द हिंदू

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