अंतर्राष्ट्रीय संबंध
अमेरिका-बांग्लादेश कॉटन डील: भारत के लिये निहितार्थ
- 13 Feb 2026
- 74 min read
प्रिलिम्स के लिये: भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता, कॉटन, मैन-मेड फाइबर, कस्तूरी कॉटन भारत
मेंस के लिये: व्यापार समझौते का घरेलू उद्योगों पर प्रभाव, कृषि निर्यात और कॉटन इकोनॉमी, टेक्निकल टेक्सटाइल और इंडस्ट्रियल पॉलिसी
चर्चा में क्यों?
बांग्लादेश और अमेरिका ने पारस्परिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं, जिसे सामान्यतः "कॉटन फॉर ज़ीरो‑टैरिफ" डील का नाम दिया गया है।
- इस समझौते ने भारतीय निर्यातकों के मध्य गंभीर चिंताएँ उत्पन्न कर दी हैं, क्योंकि यह भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के तहत अमेरिकी बाज़ार में भारत को प्राप्त प्रतिस्पर्द्धात्मक बढ़त को कमज़ोर करता है तथा भारत के कच्चे कपास के निर्यात में भी व्यवधान उत्पन्न हो सकता है।
सारांश
- अमेरिका–बांग्लादेश “कॉटन फॉर ज़ीरो‑टैरिफ” समझौता बांग्लादेश को अमेरिकी बाज़ार में कोटा‑आधारित शून्य शुल्क को बढ़त प्रदान करता है, जिससे भारत की शुल्क‑संबंधी बढ़त कमज़ोर पड़ती है, कॉटन हब पर दबाव बढ़ता है और यह जोखिम उत्पन्न होता है कि जैसे‑जैसे बांग्लादेशी कंपनियाँ अमेरिकी कपास की ओर शिफ्ट होंगी, भारतीय कपास निर्यात में गिरावट आ सकती है।
- भारत को अपने वस्त्र क्षेत्र एवं किसानों की आय की सुरक्षा हेतु व्यापार वार्त्ताओं (कॉटन पैरिटी, द्विपक्षीय व्यापार समझौता/BTA), MMF सुधारों, ESG‑आधारित ब्रांडिंग, तकनीकी वस्त्रों तथा बाज़ार विविधीकरण के माध्यम से प्रतिक्रिया देनी होगी।
अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार समझौते के प्रमुख बिंदु क्या हैं?
- टैरिफ में कमी: यह डील बांग्लादेश के लिये 19% पारस्परिक शुल्क सुनिश्चित करती है, जो पहले 20% थी।
- ज़ीरो-टैरिफ मैकेनिज़्म: सबसे महत्त्वपूर्ण पहल एक ऐसे मैकेनिज़्म की प्रतिबद्धता है, जो बांग्लादेशी वस्त्र एवं परिधान संबंधी वस्तुओं की एक निर्दिष्ट मात्रा को अमेरिका में ज़ीरो रेसीप्रोकल टैरिफ दर पर प्रवेश करने की अनुमति देता है।
- शर्त अनुरूप (उत्पत्ति नियम): ज़ीरो-टैरिफ लाभ शर्तों के अधीन है। शुल्क-मुक्त निर्यात की मात्रा बांग्लादेश द्वारा "अमेरिका-निर्मित कपास एवं मैन-मेड फाइबर टेक्सटाइल इनपुट" के उपयोग के आधार पर निर्धारित की जाएगी।
- बांग्लादेश द्वारा पारस्परिक प्रतिबद्धता: बांग्लादेश अमेरिकी औद्योगिक एवं कृषि वस्तुओं के लिये अपनी अर्थव्यवस्था को महत्त्वपूर्ण रूप से खोलने पर सहमत हुआ है।
- उसने 15 वर्षों में अमेरिकी कृषि उत्पादों (गेहूँ, सोयाबीन, कपास, मक्का) की 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर की खरीद तथा 15 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के ऊर्जा उत्पादों को खरीदने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।
अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार समझौता भारत पर कैसे प्रभाव डालता है?
भारतीय वस्त्र उद्योग महासंघ (CITI) के अनुसार, इस समझौते से भारत के सामने “दोहरी चुनौती” उत्पन्न होती है:
- शुल्क लाभ का क्षरण: इस समझौते से पहले भारत को अमेरिका में 18% टैरिफ के कारण एक अपेक्षित लाभ था, जबकि बांग्लादेश पर 20% टैरिफ लागू था।
- इस नए समझौते के तहत बांग्लादेश का सामान्य टैरिफ 19% हो गया है, जिससे भारत का लाभ सिर्फ 1% तक सीमित हो गया है।
- इससे भी अधिक गंभीर बात यह है कि 0% शुल्क (duty) पर प्रवेश करने वाली वस्तुओं के विशिष्ट कोटे के मामले में भारत को अब बांग्लादेश की तुलना में 18% का भारी नुकसान हुआ।
- बांग्लादेश पहले से ही विश्व में (चीन के बाद) दूसरा सबसे बड़ा परिधान निर्यातक है। यह समझौता उसे भारत (जो छठा सबसे बड़ा निर्यातक है) की तुलना में अमेरिकी बाज़ार में और भी मज़बूत स्थिति प्रदान करता है।
- उद्योगिक केंद्र, जैसे– तिरुपुर (तमिलनाडु) और सूरत (गुजरात) कम लाभ मार्जिन पर संचालित होते हैं। वैश्विक रिटेल दिग्गज (जैसे– वॉलमार्ट, GAP) बड़े पैमाने के ऑर्डर बांग्लादेश को स्थानांतरित कर सकते हैं ताकि ड्यूटी-फ्री लाभ लिया जा सके।
- भारतीय कपास के एक प्रमुख बाजार का क्षरण: बांग्लादेश पारंपरिक रूप से भारतीय कच्ची कपास का सबसे बड़ा खरीदार रहा है, जो भारत के कपास निर्यात का लगभग 70% बनाता है।
- भारत ने वर्ष 2024 में बांग्लादेश को 1.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के कपास की सूत और लगभग 85 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य की मानव-निर्मित फाइबर (Man-Made Fibres- MMF) सूत का निर्यात किया।
- 0% अमेरिकी टैरिफ का लाभ प्राप्त करने हेतु बांग्लादेशी निर्माता अमेरिका में उत्पादित कपास का उपयोग करना आवश्यक है। इससे उन्हें अपनी आपूर्ति भारत से अमेरिका की ओर स्थानांतरित करने का प्रोत्साहन मिलता है।
- इससे बांग्लादेश को होने वाले भारतीय कपास निर्यात में भारी गिरावट आने की संभावना है, जिसके परिणामस्वरूप भारत के घरेलू बाज़ार में अधिशेष उत्पन्न होगा और भारतीय कपास किसानों को मिलने वाली कीमतों में गिरावट आ सकती है।
भारत कपास और वस्त्र उद्योग की रक्षा हेतु कौन-से उपाय कर सकता है?
- अमेरिका के साथ “कॉटन पैरिटी” सुनिश्चित करने हेतु प्रयास: भारत का कपास आयात वर्ष 2024–25 में 4.13 मिलियन बेल्स तक पहुँच गया, जिसमें अमेरिका सबसे बड़ा आपूर्तिकर्त्ता है।
- भारत को अमेरिका से “कॉटन क्लॉज” की मांग करनी चाहिये, ताकि यूएस कपास से बने वस्त्रों को 0% ड्यूटी पर अमेरिकी बाज़ार में प्रवेश की अनुमति मिल सके और बांग्लादेश के नए लाभ (बढ़त) का मुकाबला किया जा सके।
- भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को त्वरित रूप से लागू करना: इससे गैर-टैरिफ बाधाओं और अनुपालन संबंधी जटिलताओं में कमी आएगी तथा वस्तुओं का अमेरिकी बाज़ार तक तेज़ और सुगम प्रवाह सुनिश्चित होगा।
- ESG रणनीति के माध्यम से मुकाबला: पश्चिमी खरीदार एथिकल सोर्सिंग के प्रति संवेदनशील हैं। बांग्लादेश श्रम अधिकारों और सुरक्षा मानकों के मामले में जाँच के दायरे में है।
- भारत को अपनी “सतत और सामाजिक रूप से अनुपालनशील” निर्माण प्रक्रिया (शून्य बाल श्रम, बांग्लादेश की तुलना में बेहतर अग्नि सुरक्षा रिकॉर्ड) को प्रमुख खरीदारों के सामने ज़ोर-शोर से प्रस्तुत करना चाहिये, जो प्रतिष्ठा जोखिम से बचने के लिये सतर्क रहते हैं।
- मानव-निर्मित फाइबर (MMF) की ओर झुकाव: वैश्विक वस्त्र व्यापार में 70% हिस्सेदारी MMF (पॉलिएस्टर/विस्कोस) की है और केवल 30% कपास की, जबकि भारत का निर्यात अधिकांशतः कपास-आधारित है।
- इतिहास में कच्चे मानव-निर्मित फाइबर माल पर तैयार वस्तुओं की तुलना में उच्च कर होने के कारण देश में MMF उत्पादन को प्रोत्साहन नहीं मिला।
- GST परिषद को पूरे MMF मूल्य शृंखला को तर्कसंगत बनाना चाहिये, ताकि भारतीय सिंथेटिक्स की कीमत बांग्लादेश, चीन और वियतनाम के मुकाबले प्रतिस्पर्द्धात्मक हो सके।
- ‘कस्तूरी’ रणनीति: ‘कस्तूरी कॉटन भारत’ पहल का व्यापक स्तर पर संवर्द्धन किया जाना चाहिये। ब्लॉकचेन तकनीक के माध्यम से यह प्रमाणित किया जा सकता है कि भारतीय कपास नैतिक रूप से उगाई गई है तथा इसमें किसी प्रकार का संदूषण नहीं है। इस प्रामाणिकता के आधार पर भारत उच्च मूल्य प्राप्त कर सकता है, जिससे आयात शुल्क की असमानता के प्रभाव को संतुलित किया जा सके।
- तकनीकी वस्त्र: भारत को उच्च-तकनीकी वस्त्रों पर लक्ष्य केंद्रित करना चाहिये, जहाँ गुणवत्ता शुल्क अंतर अंतर पर वरीयता रखती है और मूल्य संवर्द्धित वस्त्र क्षेत्रों की ओर रुख करना चाहिये, जैसे- मेडिटेक (शल्य प्रत्यारोपण, स्वच्छता उत्पाद), मोबिलटेक (एयरबैग, सीटबेल्ट) तथा जियोटेक (सड़क निर्माण के लिये फैब्रिक)।
- एक सुनिश्चित घरेलू बाज़ार का निर्माण कंपनियों को अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्द्धा करने में सक्षम बनाएगा।
- बाज़ार विविधीकरण: अमेरिका पर अत्यधिक निर्भरता कम करने हेतु नए निर्यात गंतव्यों की खोज की जानी चाहिये, जैसे– ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त अरब अमीरात (जहाँ भारत के पास पहले से FTA हैं), साथ ही लैटिन अमेरिका के उभरते बाज़ारों में अवसरों का लाभ उठाना चाहिये।
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दृष्टि मुख्य परीक्षा प्रश्न: प्रश्न: ‘वाणिज्यिक समझौते अक्सर अवसरों के साथ-साथ संवेदनशीलताएँ भी उत्पन्न करते हैं।’ इस कथन की परीक्षा अमेरिकी-बांग्लादेश वस्त्र समझौते के संदर्भ में कीजिये और इसके भारत पर प्रभावों का विश्लेषण प्रस्तुत कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. यूएस-बांग्लादेश ‘कॉटन फॉर ज़ीरो-टैरिफ’ समझौते की मुख्य विशेषता क्या है?
यह समझौता बांग्लादेशी वस्त्रों पर कोटा आधारित शून्य पारस्परिक शुल्क (Zero Reciprocal Tariffs) प्रदान करता है, बशर्ते कि इनमें अमेरिकी उत्पादित कपास और मैन-मेड फाइबर (MMF) इनपुट का उपयोग किया गया हो।
2. यह समझौता भारत के अमेरिका में शुल्क स्थिति को कैसे प्रभावित करता है?
भारत को 18% शुल्क का सामना करना पड़ता है, जबकि बांग्लादेश को कोटा के भीतर शून्य शुल्क मिलता है, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिये प्रभावी रूप से 18% का नुकसान उत्पन्न होता है।
3. बांग्लादेश भारत के कपास निर्यात के लिये क्यों महत्त्वपूर्ण है?
बांग्लादेश भारत के कपास निर्यात का लगभग 70% हिस्सा प्राप्त करता है और वर्ष 2024 में $1.6 बिलियन मूल्य के कॉटन यार्न का आयात करता है।
4. भारत के वस्त्र निर्यात बास्केट में कौन-सी संरचनात्मक कमियाँ हैं?
वैश्विक व्यापार का लगभग 70% हिस्सा मैन-मेड फाइबर (MMF) आधारित है, जबकि भारत के निर्यात मुख्यतः कपास आधारित हैं। इसका कारण MMF मूल्य शृंखला में अतीत में लागू कर संबंधी असंतुलन (Tax Distortions) है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2020)
1. पिछले दशक में भारत-श्रीलंका व्यापार के मूल्य में सतत वृद्धि हुई है।
2. भारत और बांग्लादेश के बीच होने वाले व्यापार में "कपड़े और कपड़े से बनी चीज़ों" का व्यापार प्रमुख है।
3. पिछले पाँच वर्षों में दक्षिण एशिया में भारत के व्यापार का सबसे बड़ा भागीदार नेपाल रहा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2
(c) केवल 3
(d) 1,2 और 3
उत्तर: (b)
मेन्स
प्रश्न. 'भारत और यूनाइटेड स्टेट्स के बीच संबंधों में खटास के प्रवेश का कारण वाशिंगटन का अपनी वैश्विक रणनीति में अभी तक भी भारत के लिये किसी ऐसे स्थान की खोज करने में विफलता है, जो भारत के आत्म-समादर और महत्त्वाकांक्षा को संतुष्ट कर सके।' उपयुक्त उदाहरणों के साथ स्पष्ट कीजिये। (2019)