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‘द ह्यूमन कॉस्ट ऑफ डिज़ास्टर्स 2000-2019’ रिपोर्ट

  • 13 Oct 2020
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये:

द ह्यूमन कॉस्ट ऑफ डिज़ास्टर्स 2000-2019, सेंदाई फ्रेमवर्क 2015-30

मेन्स के लिये:

चरम मौसमी घटनाओं से बदलता आपदा परिदृश्य  

चर्चा में क्यों?

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र ने ‘द ह्यूमन कॉस्ट ऑफ डिज़ास्टर्स 2000-2019’ (The Human Cost of Disasters 2000-2019) नामक एक नई रिपोर्ट में कहा है कि पिछले 20 वर्षों में जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक आपदाओं की संख्या में लगभग दोगुनी वृद्धि हुई है।

प्रमुख बिंदु: 

  • आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिये संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि वर्ष 2000 और वर्ष 2019 के बीच 7348 प्रमुख आपदा घटनाएँ हुईं जिसमें 1.23 मिलियन लोगों की मृत्यु हुई है तथा 4.2 बिलियन लोग प्रभावित हुए और लगभग $2.97 ट्रिलियन का वैश्विक आर्थिक नुकसान हुआ है।   
  • यह आँकड़ा वर्ष 1980 और वर्ष 1999 के बीच दर्ज की गई 4212 प्रमुख प्राकृतिक आपदाओं से भिन्न है।
  • जलवायु परिवर्तन में तीव्र वृद्धि काफी हद तक जलवायु से संबंधित आपदाओं में वृद्धि के लिये ज़िम्मेदार थी जिसमें बाढ़, सूखा एवं तूफान जैसी चरम मौसमी घटनाएँ शामिल हैं।
    • पिछले 20 वर्षों में बाढ़ की संख्या दोगुनी से अधिक जबकि तूफानों की संख्या 1457 से बढ़कर 2034 हो गई है।
    • चीन के बाद भारत बाढ़ से दूसरा सबसे प्रभावित देश है।
    • अत्यधिक गर्मी विशेष रूप से घातक साबित हो रही है। भारत में वर्ष 2015 में हीटवेव्स के परिणामस्वरूप 2248 मौतें हुईं।

क्षेत्र आधारित आँकड़े:

  • आँकड़ों से पता चलता है कि एशिया में पिछले 20 वर्षों में 3068 ऐसी घटनाओं के साथ सबसे अधिक आपदाएँ हुई हैं, इसके बाद अमेरिका (1756) और अफ्रीका (1192) का स्थान आता है।
    • आपदा प्रभावित देशों के मामले में चीन 577 घटनाओं के साथ शीर्ष पर है इसके बाद संयुक्त राज्य अमेरिका (467), भारत (321) का स्थान आता है। 

पिछले 20 वर्षों में प्रमुख आपदाएँ:

  • पिछले 20 वर्षों में सबसे गंभीर आपदा वर्ष 2004 में हिंद महासागर में आई सुनामी थी जिसमें 226,400 लोगों की मृत्यु हुईं थी।
  • इसके बाद वर्ष 2010 में हैती (Haiti) में आया भूकंप जिसमें 222,000 लोगों की जान चली गई थी। 

प्राकृतिक आपदाएँ एवं भू-भौतिकी घटनाएँ:

  • हालाँकि एक जलवायु में परिवर्तन के कारण इस तरह की आपदाओं की संख्या एवं तीव्रता में वृद्धि हुई है वहीँ भूकंप एवं सुनामी जैसी भू-भौतिकी घटनाओं में भी वृद्धि हुई है जो जलवायु से संबंधित नहीं हैं।
  • आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिये संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UN Office for Disaster Risk Reduction) ने कहा है कि यह एकमात्र निष्कर्ष है जब पिछले 20 वर्षों में आपदा की घटनाओं की समीक्षा की जा सकती है। 
    • इसके अतिरिक्त उसने विभिन्न राष्ट्रों की सरकारों पर जलवायु खतरों को रोकने के लिये पर्याप्त उपाय न करने का आरोप लगाया और आपदाओं को कम करने के लिये बेहतर तैयारी का आह्वान किया।
  • गौरतलब है कि इस रिपोर्ट में जैविक खतरों (Biological Hazards) और कोरोनोवायरस महामारी जैसी बीमारी से संबंधित आपदाओं को शामिल नहीं किया गया है, जिससे पिछले नौ महीनों में एक मिलियन से अधिक लोगों की मृत्यु हुई है और 37 मिलियन से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं।

‘इंटरनेशनल डे फॉर डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन’

(International Day for Disaster Risk Reduction):

  • प्रत्येक वर्ष 13 अक्तूबर को जोखिम-जागरूकता एवं आपदा में कमी की वैश्विक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिये ‘इंटरनेशनल डे फॉर डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन’ मनाया जाता है।
  • वर्ष 2020 के लिये ‘इंटरनेशनल डे फॉर डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन’ की थीम ‘आपदा जोखिम शासन’ (Disaster Risk Governance) है।
  • इस दिवस को मनाने की शुरुआत वर्ष 1989 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक आह्वान के बाद हुई थी।
  • जापान के सेंदाई में आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर तीसरा संयुक्त राष्ट्र विश्व सम्मेलन वर्ष 2015 में आयोजित किया गया था।
  • 13 अक्तूबर, 2020 को ‘इंटरनेशनल डे फॉर डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन’ (International Day for Disaster Risk Reduction) के अवसर पर ‘आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिये संयुक्त राष्ट्र कार्यालय’ (UN Office for Disaster Risk Reduction- UNDRR) द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि 21वीं शताब्दी का आपदा परिदृश्य किस प्रकार  चरम मौसमी घटनाओं से प्रभावित है?
    • इस रिपोर्ट के आँकड़े इमरजेंसी इवेंट्स डेटाबेस (Emergency Events Database- EMDAT) द्वारा संकलित किये गए हैं जो ‘सेंटर फॉर रिसर्च ऑन द एपिडेमियोलॉजी ऑफ डिज़ास्टर्स’ (Centre for Research on the Epidemiology of Disasters- CRED) द्वारा दर्ज की गई आपदाओं पर आधारित है।
  • ‘सेंटर फॉर रिसर्च ऑन द एपिडेमियोलॉजी ऑफ डिज़ास्टर्स’ (CRED) निम्नलिखित घटकों के आधार पर किसी भी घटना को आपदा के रूप में दर्ज करता है:
    • दस या अधिक लोगों की मृत्यु हुई हो।
    • 100 या अधिक लोग प्रभावित हुए हों।
    • आपातकाल की घोषित स्थिति या अंतर्राष्ट्रीय सहायता के लिये आह्वान।     

स्रोत: द हिंदू

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