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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

यूरिया सेक्टर में निवेश आकर्षित करने के लिये सरकार द्वारा उठाए गए कदम

  • 07 Feb 2018
  • 7 min read

चर्चा में क्यों?

  • बजट 2018  में, यूरिया और पोषक तत्त्व आधारित दोनों सब्सिडी में लगभग 8% की वृद्धि करते हुए  उर्वरक सब्सिडी के लिये कुल 70,000 करोड़ रुपए आवंटित किये गए हैं।
  • इससे यूरिया और गैर-यूरिया उर्वरक कंपनियों को राहत मिलेगी तथा यह उर्वरक क्षेत्र में अखिल भारतीय स्तर पर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के कार्यान्वयन को सुगम बनाने में भी मदद करेगा।

प्रमुख बिंदु 

  • भारत सरकार द्वारा यूरिया सेक्टर में नए निवेश को आकर्षित करने और देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिये 2 जनवरी, 2013 को नई निवेश नीति, 2012 (New Investment Policy-2012) और 7 अक्तूबर, 2014 को इसमें नवीन संशोधनों की घोषणा की गई थी। 
  • NIP-2012 के प्रावधानों और इसमें किये गए संशोधनों के तहत मैटिक्स फर्टिलाइज़र्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (मैटिक्स) ने पानागढ़, पश्चिम बंगाल में कोल बेड मीथेन (Coal Bed Methane-CBM) आधारित ग्रीनफील्ड अमोनिया-यूरिया कॉम्प्लेक्स स्थापित किया है जिसकी स्थापित क्षमता 1.3 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष (Million Metric Tons Per Annum-MMTPA) है। 1 अक्तूबर, 2017 से मैटिक्स द्वारा वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर दिया गया है।
  • चंबल फर्टिलाइज़र्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (CFCL) ने भी राजस्थान के गड़ेपान (कोटा ज़िला) में 1.34 MMT क्षमता वाले ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट को स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। जनवरी 2019 से इसके द्वारा वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करने की संभावना है।
  • केंद्रीय PSUs द्वारा उर्वरकों के उत्पादन में वृद्धि करने के लिये सरकार ने Fertilizer Corporation of India Ltd. (FCIL) की गोरखपुर (उत्तर प्रदेश), सिंदरी (झारखंड), तालचर (ओडिशा) और रामागुंडम (तेलंगाना) इकाइयों तथा हिंदुस्तान फर्टिलाइजर कार्पोरेशन लिमिटेड की बरौनी यूनिट को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया है।
  • इनसे प्रतिवर्ष 1.27 MMT की स्थापित क्षमता प्राप्त किये जाने की संभावना है। इन सभी इकाइयों को 2020-21 तक परिचालन में लाने का लक्ष्य रखा गया है।  
  • इसके अतिरिक्त सरकार ने ब्रह्मपुत्र घाटी उर्वरक निगम लिमिटेड (BVFCL) के मौजूदा परिसर में नामरूप-II (क्षमता 2.40 LMT) और नामरूप-III (क्षमता 2.70 LMT) के स्थान पर 8.646 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष (LMTPA) क्षमता का एक नया यूरिया संयंत्र स्थापित करने का निर्णय लिया है। 
  • गोरखपुर, सिंदरी, तालचर, रामागुंडम और बरौनी में पाँच इकाइयों के पुनर्गठन के बाद देश की कुल यूरिया उत्पादन क्षमता 304.5 LMTPA तक होने की संभावना है।
  • इसके अलावा 26.4 LMTPA की संयुक्त क्षमता के दो संयंत्र भी निजी क्षेत्र में स्थापित किये जा रहे हैं।

नई निवेश नीति-2012

  • यूरिया क्षेत्र में नए निवेश को प्रोत्साहित करने तथा यूरिया क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिये 02 जनवरी, 2013 को नई निवेश नीति-2012 अधिसूचित की गई थी।
  • 2014 के संशोधन द्वारा इसमें यह प्रावधान शामिल किया गया कि केवल वे इकाइयाँ जिनका उत्पादन इस संशोधन के अधिसूचित होने के दिनांक से 5 वर्षों के भीतर शुरू हो जाता है, वे इस नीति के अंतर्गत आएंगी। इसके बाद इकाइयाँ उस समय प्रचलित यूरिया नीति द्वारा नियंत्रित होंगी।

नई यूरिया नीति-2015 

  • उर्वरक विभाग ने 25 मई, 2015 को नई यूरिया नीति-2015 (New Urea Policy) अधिसूचित की जिसका उद्देश्य देश में यूरिया के उत्पादन अधिकतम करना, यूरिया के उत्पादन में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देना और सरकार पर उर्वरक सब्सिडी के भार को न्यायसंगत बनाना है।
  • ऐसी आशा की जा रही है कि तीन वर्ष की अवधि के दौरान घरेलू यूरिया क्षेत्र ऊर्जा दक्षता के मामले में वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्द्धात्मक हो जाएगा।
  • वास्तविक ऊर्जा खपत और वर्तमान मानदंडों के आधार पर यूनिटों को तीन समूहों में विभाजित किया गया है और अगले तीन वित्तीय वर्षों के लिये संशोधित ऊर्जा खपत मानदंड निर्धारित किये गए हैं।
  • इसके अलावा, वर्ष 2018-19 के लिये ऊर्जा मानदंडों का भी लक्ष्य रखा गया है। इससे यूरिया इकाइयों को बेहतर प्रौद्योगिकी का चयन करने और ऊर्जा की खपत घटाने के विभिन्न प्रयासों में मदद मिलेगी। उपरोक्त प्रयासों के कारण उच्च ऊर्जा दक्षता से सब्सिडी बिल कम करने में मदद मिलेगी।
  • सरकार के सब्सिडी भार को दो तरीकों से कम किया जा सकता है-निर्दिष्ट ऊर्जा खपत मानदंडों में कटौती और अधिक घरेलू उत्पादन के कारण आयात में कमी आना।

नीम कोटेड यूरिया (Neem Coated Urea- NCU)

  • 25 मई, 2015 की अधिसूचना के द्वारा यूरिया के सभी देशी उत्पादकों के लिये यह आवश्यक बना दिया गया है कि वे अपने रियायती यूरिया का शत-प्रतिशत उत्पादन नीम कोटेड यूरिया के रूप में करें, क्योंकि NCU को औद्योगिक उद्देश्यों के लिये प्रयुक्त नहीं किया जा सकता।
  • इसलिये रियायती यूरिया का गैर-कानूनी उपयोग संभव नहीं होगा। सरकार का गैर-कृषि उद्देश्यों के लिये यूरिया के गैर-कानूनी दिक्परिवर्तन (Diversion) पर रोक लगाने का उद्देश्य सब्सिडी में हेराफेरी को रोकना है।
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