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स्टेट ऑफ द ग्लोबल क्लाइमेट 2022: WMO

  • 24 Apr 2023
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये:

WMO, GHG, हिमनद, महासागरीय अम्लीकरण, वर्षा, गर्म हवाएँ

मेन्स के लिये:

स्टेट ऑफ द ग्लोबल क्लाइमेट 2022: WMO

चर्चा में क्यों?

हाल ही में विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने स्टेट ऑफ द ग्लोबल क्लाइमेट रिपोर्ट 2022 जारी की है।

रिपोर्ट के निष्कर्ष:

  • तापमान:
    • वर्ष 2022 में वैश्विक औसत तापमान वर्ष 1850-1900 के औसत से 1.15 डिग्री सेल्सियस अधिक था।
    • वर्ष 1850 के बाद वर्ष 2015 से 2022 के लिखित रिकॉर्ड में ये आठ वर्ष सबसे गर्म दर्ज किये गए थे।
    • यह स्थिति लगातार तीन वर्षों तक कूलिंग La Niña के बावजूद थी- ऐसा "ट्रिपल-डिप" La Niña पिछले 50 वर्षों में केवल तीन बार हुआ है।
  • ग्रीनहाउस गैस:
    • तीन मुख्य ग्रीनहाउस गैस, कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड की सांद्रता वर्ष 2021 में रिकॉर्ड उँचाई पर पहुँच गई थी।
    • वर्ष 2020-2021 तक मीथेन सांद्रता में रिकॉर्ड वार्षिक वृद्धि देखी गई थी।
  • समुद्र स्तर में वृद्धि:
    • ग्लोबल मीन सी लेवल (GMSL) वर्ष 2022 में भी बढ़ना जारी रहा, जो सैटेलाइट अल्टीमीटर रिकॉर्ड के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया।
    • वर्ष 2005-2019 की अवधि में हिमनदों, ग्रीनलैंड और अंटार्कटिक में कुल हिम भूमि के नुकसान ने GMSL वृद्धि में 36 प्रतिशत और समुद्र के गर्म होने में 55 प्रतिशत का योगदान दिया।
  • महासागरीय ताप:
    • वर्ष 2022 में समुद्री गर्मी की मात्रा एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई।
    • ग्रीनहाउस गैसों द्वारा जलवायु प्रणाली में फँसी हुई लगभग 90 प्रतिशत ऊर्जा समुद्र में चली जाती है, यह कुछ हद तक उच्च तापमान में वृद्धि भी करती है और समुद्री पारिस्थितिक तंत्र के लिये जोखिम उत्त्पन्न करती है।
  • महासागरीय अम्लीकरण:
    • CO2 का समुद्री जल के साथ प्रतिक्रिया करने से pH में कमी आती है जिसे 'महासागरीय अम्लीकरण' कहा जाता है, इससे जीवों और पारिस्थितिकी तंत्र प्रणालियों को खतरा होता है।
    • IPCC की छठी आकलन रिपोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि "यह काफी निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि समुद्र का सतही pH वर्तमान में सबसे कम [26 हज़ार वर्षों में] है और pH परिवर्तन की वर्तमान दर कम-से-कम उस समय की तुलना में अभूतपूर्व है।
  • समुद्री बर्फ:
    • अंटार्कटिका में समुद्री बर्फ के घनत्त्व में फरवरी 2022 में रिकॉर्ड सबसे निचले स्तर 1.92 मिलियन कि.मी2 तक की गिरावट आई और दीर्घावधि (1991-2020) औसत से तुलना करें तो यह लगभग 1 मिलियन कि.मी.2 नीचे है।
  • हिमनद:
    • अक्तूबर 2021 और अक्तूबर 2022 के बीच औसतन -1.3 मीटर से अधिक की मोटाई में बदलाव के साथ हिमनदों में बर्फ की कमी हुई है जो पिछले दशक के औसत से काफी अधिक है।
    • सर्दियो में हिमपात में कमी, मार्च 2022 में सहारा मरुस्थल से आने वाली धूल और मई से सितंबर की शुरुआत तक हीट वेव के कारण यूरोपीय आल्प्स में अभूतपूर्व रूप से हिमनद पिघले।

जलवायु संकेतकों के रिकॉर्ड उच्च आँकड़ों का प्रभाव:

  • पूर्वी अफ्रीका में सूखा:
    • लगातार पाँच वर्षा ऋतुओं में वर्षा औसत से कम रही है, यह पिछले 40 वर्षों में इस तरह का सबसे लंबा क्रम है। जनवरी 2023 तक के अनुमान के अनुसार, सूखे और अन्य आपदाओं के के कारण 20 मिलियन से अधिक लोगों को पूरे क्षेत्र में तीव्र खाद्य असुरक्षा का सामना करना पड़ा था।
  • पाकिस्तान में व्यापक वर्षण:
    • कुल नुकसान और आर्थिक नुकसान का आकलन 30 अरब अमेरिकी डॉलर आँका गया था।
      • राष्ट्रीय स्तर पर रिकॉर्ड किये गए सबसे नम महीने जुलाई (सामान्य से 181% अधिक) और अगस्त (औसत से 243% अधिक) थे।
    • पाकिस्तान में बाढ़ ने प्रभावित ज़िलों में लगभग 8,00,000 अफगान शरणार्थियों सहित लगभग 33 मिलियन लोगों को प्रभावित किया।
  • यूरोप में हीट वेव:
    • अत्यधिक गर्मी और असाधारण शुष्क मौसम कई क्षेत्रों में सह-अस्तित्त्व में थे। यूरोप में गर्मी के कारण हुई 15,000 से अधिक अतिरिक्त मौतें स्पेन, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्राँस और पुर्तगाल में दर्ज की गईं।
    • चीन ने आधिकारिक रिकॉर्ड की शुरुआत के बाद से अपनी सबसे व्यापक एवं सबसे लंबे समय तक चलने वाली हीट वेव का अनुभव किया, जो जून के मध्य से अगस्त के अंत तक रही और यह सबसे शुष्क गर्मी रिकॉर्ड 0.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक रही। इसके अतिरिक्त यह अब तक की दूसरी सबसे शुष्क गर्मी थी।
  • खाद्य असुरक्षा:
    • वर्ष 2021 तक 2.3 बिलियन लोगों को खाद्य असुरक्षा का सामना करना पड़ा, जिनमें से 924 मिलियन लोगों को गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना करना पड़ा।
    • अनुमान है कि वर्ष 2021 में 767.9 मिलियन लोग कुपोषण का सामना कर रहे थे, जो वैश्विक जनसंख्या का 9.8% है।
    • इनमें से आधे एशिया में और एक-तिहाई अफ्रीका में हैं।
  • भारत और पाकिस्तान में पूर्व-मानसून हीट वेव:
    • भारत और पाकिस्तान में मौसम पूर्व-मानसून हीटवेव के कारण फसल की उत्पादकता में गिरावट आई है।
    • इसके साथ-साथ यूक्रेन में संघर्ष की शुरुआत के बाद से भारत में गेहूँ और चावल के निर्यात पर प्रतिबंध के कारण अंतर्राष्ट्रीय खाद्य बाज़ारों में मुख्य खाद्य पदार्थों की उपलब्धता, पहुँच और स्थिरता पर प्रश्नचिह्न लगने के साथ पहले से ही कमी से प्रभावित देशों के लिये इस संदर्भ में उच्च जोखिम उत्पन्न हुआ है।
    • विस्थापन:
    • सोमालिया में लगभग 1.2 मिलियन लोग सूखे के भयावह प्रभावों से खेती और आजीविका पर पड़े प्रभावों के कारण आंतरिक रूप से विस्थापित हुए जिनमें से 60,000 से अधिक लोग इसी अवधि के दौरान इथियोपिया एवं केन्या की ओर विस्थापित हुए।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO):

  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) 192 देशों की सदस्यता वाला एक अंतर-सरकारी संगठन है।
  • भारत, विश्व मौसम विज्ञान संगठन का सदस्य देश है।
  • इसकी उत्पत्ति अंतर्राष्ट्रीय मौसम विज्ञान संगठन (IMO) से हुई है, जिसे वर्ष 1873 के वियना अंतर्राष्ट्रीय मौसम विज्ञान कॉन्ग्रेस के बाद स्थापित किया गया था।
  • 23 मार्च, 1950 को WMO कन्वेंशन के अनुसमर्थन द्वारा स्थापित WMO, मौसम विज्ञान (मौसम और जलवायु), परिचालन जल विज्ञान तथा इससे संबंधित भू-भौतिकीय विज्ञान हेतु संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी बन गया है।
  • WMO का मुख्यालय जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में है।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

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