प्रयागराज शाखा पर IAS GS फाउंडेशन का नया बैच 10 जून से शुरू :   संपर्क करें
ध्यान दें:

डेली अपडेट्स


भारतीय अर्थव्यवस्था

अर्थव्यवस्था की स्थिति रिपोर्ट: आरबीआई

  • 22 Dec 2022
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये:

मुद्रास्फीति, इक्विटी प्रवाह, यूक्रेन में युद्ध, तेल की कीमतें, आधार प्रभाव, ऋण संकट।

मेन्स के लिये:

अर्थव्यवस्था की स्थिति रिपोर्ट: आरबीआई।

चर्चा में क्यों? 

हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने "अर्थव्यवस्था की स्थिति" नामक एक रिपोर्ट जारी की है, जो एक अंधकारमय वैश्विक दृष्टिकोण (Darkening Global Outlook) की चेतावनी देती है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:

  • अंधकारमय वैश्विक दृष्टिकोण:
    • ज़ोखिम संतुलन वर्ष 2023 के लिये एक अंधकारमय वैश्विक दृष्टिकोण की ओर तेज़ी से झुका हुआ है, जो इस वर्ष की मौद्रिक नीति कार्रवाइयों का खामियाज़ा भुगतेगा। 
  • उभरती बाज़ार अर्थव्यवस्थाएँ:
  • ऊर्जा कीमतें:
    • ऊर्जा की कीमतों को लेकर अभी भी एक असहज स्थिति बनी हुई है, पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन और उनके सहयोगियों (OPEC+) ने उत्पादन में कटौती अभी तक जारी रखी है, लेकिन तेल की कीमतों की सीमा तय करने से विघटनकारी वित्तीय ताकतों के बढ़ने का खतरा है, क्योंकि हेज फंड पहले से ही कच्चे तेल अनुबंधों में शुद्ध कटौती कर रहे हैं।  
    • वैश्विक कमोडिटी बाज़ारों में नरमी के बावजूद जलवायु परिवर्तन और यूक्रेन में युद्ध के कारण खाद्य कीमतें पूर्व-महामारी के स्तर से अधिक बनी रहेंगी।
  • ऋण: 
    • डिफाॅल्ट दरों में वृद्धि और अमेरिकी डॉलर (प्राथमिक मुद्रा जो ऋण आधारित है) की मज़बूती के साथ ऋण संकट बढ़ रहा है, हालाँकि यह हाल ही में 20 वर्ष के उच्च स्तर से नीचे गिर गया है।
  • भारतीय विकास परिदृश्य:
    • मुद्रास्फीति: 
      • मुद्रास्फीति में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन यह निश्चित तौर पर खत्म नहीं हुई है।
      • मुद्रास्फीति की मौजूदा स्तर से वर्ष 2023 में कम होने की संभावना है, लेकिन अधिकांश अर्थव्यवस्थाओं में यह लक्ष्य से काफी ऊपर रहेगी।
        • मुद्रास्फीति में कमी मुख्य रूप से खाद्य मुद्रास्फीति में तेज़ नरमी से प्रेरित है। इंडेक्स में महीने-दर-महीने (M-O-M) 11 bps की गिरावट आई है, जो एक अनुकूल आधार प्रभाव माना जा सकता है।
    • घरेलू कारक: 
      • भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये निकट अवधि के विकास दृष्टिकोण को घरेलू कारकों का समर्थन प्राप्त है।
        • घरेलू आर्थिक गतिविधि नवंबर और दिसंबर 2022 की शुरुआत में लचीली रही।  
      • निजी खपत और निवेश के लिये संभावना बढ़ रही है, हालाँकि ग्रामीण क्षेत्रों में अपेक्षाकृत उच्च मुद्रास्फीति उन क्षेत्रों में खर्च को कम कर रही है।
      • मुख्य मुद्रास्फीति 6% पर स्थिर रहने के बावजूद सब्जियों की कीमतों में गिरावट के कारण नवंबर 2022 में हेडलाइन मुद्रास्फीति 90 आधार अंकों से घटकर 5.9% हो गई।
    • इक्विटी प्रवाह:
      • भारत में मज़बूत पोर्टफोलियो प्रवाह से उत्साहित होकर नवंबर के दौरान इक्विटी बाज़ारों ने नई ऊँचाईयों को छुआ।
      • इनपुट लागत के दबाव में कमी अभी भी उछाल वाली कॉर्पोरेट बिक्री और अचल संपत्तियों में निवेश में वृद्धि भारत में कैपेक्स चक्र में तेज़ी की शुरुआत कर रही है जो भारतीय अर्थव्यवस्था में विकास की गति को तेज़ करने में योगदान करेगी।
    • भविष्य की संभावनाएँ:
      • दिसंबर 2022 में, जैसा कि भारत अपनी जी20 अध्यक्षता के तहत अपनी प्राथमिकताओं और डिलिवरेबल्स को निर्धारित करने में संलग्न है, ऐसा कहा जा सकता है कि भारत  के विश्व के मंच के केंद्र में पहुचने का समय आ गया है।
      • PPP (क्रय शक्ति समानता) के संदर्भ में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और बाज़ार विनिमय दरों के मामले में 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में भारत का G20 के GDP में 3.6% हिस्सा है, जबकि वास्तविक क्रय शक्ति समानता (PPP) के संदर्भ में इसका हिस्सा 8.2% से बहुत अधिक है।
      • 2023 में भारत के G20 के भीतर सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने का अनुमान है।
      • G20 की अध्यक्षता के तहत भारत की प्राथमिकताएँ एकता और परस्पर जुड़ाव की दृष्टि को समाहित करती हैं। वे वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं को भी दर्शाएंगे: एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)  

प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन-से मामलों में भारतीय रिज़र्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को नियंत्रित करता है? (2013)

  1. परिसंपत्तियों की तरलता 
  2. शाखा विस्तार 
  3. बैंकों का विलय 
  4. बैंकों का समापन 

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 4 
(b) केवल 2, 3 और 4  
(c) केवल 1, 2 और 3 
(d) 1, 2, 3 और 4 

उत्तर: (d) 


प्रश्न. भारत में मुद्रास्फीति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा सही है? (2015)

(a) भारत में मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना केवल भारत सरकार की ज़िम्मेदारी है।
(b) मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में भारतीय रिज़र्व बैंक की कोई भूमिका नहीं है।
(c) मुद्रा परिसंचरण में कमी मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद करती है।
(d) बढ़ा हुआ मुद्रा परिसंचरण मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद करता है।

उत्तर: (c)


प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2020) 

  1. खाद्य वस्तुओं का ‘उपभोक्ता मूल्य सूचकांक’ (CPI) भार (Wegitage) उनके ‘थोक मूल्य सूचकांक’ (WPI) में दिये गए भार से अधिक है।
  2. WPI, सेवाओं के मूल्यों में होने वाले परिवर्तनों को नहीं पकड़ता, जैसा कि CPI करता है।
  3. भारतीय रिज़र्व बैंक ने अब मुद्रास्फीति के मुख्य मान तथा प्रमुख नीतिगत दरों के निर्धारण हेतु WPI को अपना लिया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 
(c) केवल 3 
(d) 1, 2 और 3 

उत्तर: (a)

स्रोत: द हिंदू

close
एसएमएस अलर्ट
Share Page
images-2
images-2