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श्रीलंका संकट

  • 13 Jul 2022
  • 14 min read

प्रिलिम्स के लिये:

श्रीलंका, आर्थिक संकट, विदेशी मुद्रा, आयात और निर्यात, आईएमएफ, सार्वजनिक ऋण, जैविक खेती।

मेन्स के लिये:

भारतीय अर्थव्यवस्था पर श्रीलंका के संकट का प्रभाव, श्रीलंका संकट में भारत की भूमिका, भारत के हित पर देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव

चर्चा में क्यों?

श्रीलंका जिसकी आबादी 22 मिलियन है, अभूतपूर्व आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, यह सात दशकों में सबसे खराब स्थिति है, जिसके कारण लाखों लोगों को भोजन, दवा, ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुओं को खरीदने के लिये संघर्ष करना पड़ रहा है।

  • राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता के बाद सैकड़ों सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने श्रीलंका के राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग को लेकर राष्ट्रपति के आवास पर धावा बोल दिया।

Sri-Lanka

श्रीलंका संकट का कारण:

  • पृष्ठभूमि:
    • जब वर्ष 2009 में श्रीलंका 26 साल के लंबे गृहयुद्ध से उभरा तो युद्ध के बाद की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि वर्ष 2012 तक प्रतिवर्ष 8-9% पर काफी अधिक थी।
    • हालांँकि वर्ष 2013 के बाद इसकी औसत GDP वृद्धि दर लगभग आधी हो गई क्योंकि वैश्विक कमोडिटी की कीमतें गिर गईं, निर्यात धीमा हो गया और आयात बढ़ गया।
    • युद्ध के दौरान श्रीलंका का बजट घाटा बहुत अधिक था और वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट ने इसके विदेशी मुद्रा भंडार को खत्म कर दिया, जिसके कारण देश ने वर्ष 2009 में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से 2.6 बिलियन अमेरिकी डाॅलर का ऋण लिया।
    • इसने वर्ष 2016 में फिर से 1.5 बिलियन अमेरिकी डाॅलर के ऋण के लिये IMF से संपर्क किया, हालांँकि IMF की शर्तों ने श्रीलंका के आर्थिक स्थिति को और खराब कर दिया।
  • आर्थिक कारक:
    • कोलंबो के चर्चों में अप्रैल 2019 के ईस्टर बम विस्फोटों के कारण 253 लोग हताहत हुए, परिणामस्वरूप पर्यटकों की संख्या में तेज़ी से गिरावट आई, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार में भी गिरावट आई।
    • वर्ष 2019 में गोटबाया राजपक्षे की नई सरकार ने अपने अभियान के दौरान किसानों के लिये कम कर दरों और व्यापक SoP का वादा किया था।
      • इन बेबुनियाद वादों के त्वरित कार्यान्वयन ने समस्या को और बढ़ा दिया।
    • वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी ने स्थिति को और खराब कर दिया:
      • चाय, रबर, मसालों और कपड़ों के निर्यात को नुकसान हुआ।
      • पर्यटन आगमन और राजस्व में और गिरावट आई।
      • सरकारी व्यय में वृद्धि के कारण राजकोषीय घाटा वर्ष 2020-21 में 10% से अधिक हो गया और ऋण-सकल घरेलू उत्पाद अनुपात वर्ष 2019 में 94% से बढ़कर वर्ष 2021 में 119% हो गया।
    • श्रीलंका में संकट विदेशी मुद्रा भंडार की कमी के कारण उत्पन्न हुआ है, जो पिछले दो वर्षों में 70% घटकर फरवरी 2022 के अंत तक केवल 2 बिलियन अमेरिकी डाॅलर रह गया है।
      • इस बीच देश पर वर्ष 2022 के लिये लगभग 7 बिलियन अमेरिकी डाॅलर का विदेशी ऋण दायित्व है।
  • जैविक खेती की ओर कदम:
    • वर्ष 2021 में सभी उर्वरक आयातों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था और यह घोषित किया गया था कि श्रीलंका रातोंरात 100% जैविक खेती वाला देश बन जाएगा।
    • जैविक खादों के प्रयोग ने खाद्य उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित किया।
    • परिणामस्वरूप श्रीलंका के राष्ट्रपति ने बढ़ती खाद्य कीमतों, मूल्यह्रास मुद्रा और तेज़ी से घटते विदेशी मुद्रा भंडार को रोकने के लिये आर्थिक आपातकाल की घोषणा कर दी।
  • चीन का कर्ज जाल:
    • श्रीलंका ने वर्ष 2005 से बुनियादी ढांँचा परियोजनाओं के लिये बीजिंग से काफी धन उधार लिया है, जिनमें से कई परियोजनाएँ सफेद हाथी (अब इणकी आवश्यकता नहीं है/उपयोगी नहीं) बनकर रह गई हैं।
    • श्रीलंका ने वर्ष 2017 में एक चीनी कंपनी को अपना हंबनटोटा बंदरगाह तब पट्टे पर दिया, जब वह बीजिंग से लिया गया 1.4 बिलियन अमेरिकी डाॅलर का कर्ज चुकाने में असमर्थ हो गया था।
    • चीन का श्रीलंका पर कुल कर्ज 8 अरब अमेरिकी डॉलर का है, जो उसके कुल विदेशी कर्ज का लगभग छठा हिस्सा है
  • वर्तमान राजनीतिक शून्यता:
    • प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे और राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने इस्तीफा देने की मंशा जताई है , जिससे सर्वदलीय सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है।

भारत को श्रीलंका संकट की चिंता क्यों?

  • चुनौतियांँ:
    • आर्थिक:
      • भारत के कुल निर्यात में श्रीलंका की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2015 में 2.16% से घटकर वित्त वर्ष 2022 में केवल 1.3 प्रतिशत रह गई है।
      • टाटा मोटर्स और टीवीएस मोटर्स जैसी ऑटोमोटिव फर्मों ने श्रीलंका को वाहन किट का निर्यात बंद कर दिया है और अस्थिर विदेशी मुद्रा भंडार तथा ईंधन की कमी के कारण अपनी श्रीलंकाई असेंबलिंग इकाइयों में उत्पादन रोक दिया है।
    • शरणार्थी:
      • जब भी श्रीलंका में कोई राजनीतिक या सामाजिक संकट उत्पन्न हुआ है, तो भारत ने पाक जलडमरूमध्य और मन्नार की खाड़ी के माध्यम से सिंहली भूमि से भारत में तमिल जातीय समुदाय के शरणार्थियों का बड़ा अंतर्वाह देखा है।
      • हालांँकि भारत के लिये इस तरह के अंतर्वाह को संभालना मुश्किल हो सकता है तथा ऐसे संकट से निपटने के लिये एक मज़बूत नीति की आवश्यकता है।
      • तमिलनाडु राज्य ने पहले ही संकट के प्रभाव को महसूस करना शुरू कर दिया है क्योंकि अवैध तरीकों से श्रीलंका से 16 व्यक्तियों के आगमन की सूचना है।

भारत के लिये अवसर:

  • चाय बाज़ार:
    • वैश्विक चाय बाज़ार में श्रीलंका द्वारा चाय की आपूर्ति अचानक रोक दिये जाने के बीच भारत आपूर्ति अंतराल को पाटने का इच्छुक है।
    • ईरान और साथ ही तुर्की, इराक जैसे नए बाज़ारों में भारत अपनी भूमिका को मज़बूत कर सकता है।
    • ईरान, तुर्की, इराक और रूस जैसे श्रीलंका के बड़े चाय आयातक कथित तौर पर भारत के चाय बागानों ( विशेष रूप से असम और कोलकाता में चाय बागानों में) की ओर रुख कर रहे हैं।
    • नतीज़तन हाल ही में कोलकाता में आयोजित चाय बागानों की नीलामी में पारंपरिक तरीके से उत्पादित पत्तियों की औसत कीमत में पिछले वर्ष की तुलना में 41% तक की वृद्धि देखी गई।
  • परिधान (वस्त्र) बाज़ार:
    • यूनाइटेड किंगडम, यूरोपीय संघ और लैटिन अमेरिकी देशों के कई परिधान ऑर्डर अब भारत को मिल रहे हैं।
    • तमिलनाडु में कपड़ा उद्योग के केंद्र तिरुपुर में कंपनियों को कई ऑर्डर मिले हैं।

श्रीलंका संकट में भारत द्वारा मदद:

  • श्रीलंका भारत के लिये रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण भागीदार रहा है। भारत इस अवसर का उपयोग श्रीलंका के साथ अपने राजनयिक संबंधों को संतुलित करने के लिये कर सकता है, चीन के साथ श्रीलंका की निकटता के कारण इनमें दूरी देखी गई थी।
    • चूंँकि उर्वरक के मुद्दे पर श्रीलंका और चीन के बीच असहमति के बीच भारत द्वारा श्रीलंका के अनुरोध पर भारत द्वारा उर्वरक आपूर्ति को द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक विकास के रूप में देखा जा रहा है।
  • श्रीलंका के साथ राजनयिक संबंधों का विस्तार करने से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल' की नीति से श्रीलंकाई द्वीपसमूह को दूर रखने के प्रयासों में भारत को आसानी होगी।
    • श्रीलंका के लोगों की कठिनाइयों को कम करने के लिये भारत मदद कर सकता है, लेकिन उसे इस बात का ध्यान रखते हुए मदद करनी चाहिये कि उसकी सहायता दृष्टिगोचर होने के साथ ही मायने रखती है।

आगे की राह

  • लोकतंत्र को मज़बूती से लागू करना:
    • बेहतर संकट-प्रबंधन के लिये श्रीलंका में मज़बूत राजनीतिक सहमति की आवश्यकता है। इससे प्रशासन के सैन्यीकरण को कम किया जा सकता है।
      • गरीबों और कमज़ोरों को फिर से सक्षम बनाने और दीर्घकालिक क्षति को रोकने में मदद के लिये विचार करने की आवश्यकता है।
      • उठाए गए कदमों में कृषि उत्पादकता में वृद्धि, गैर-कृषि क्षेत्रों में नौकरी के अवसरों में वृद्धि, सुधारों का बेहतर कार्यान्वयन और पर्यटन क्षेत्र को पुनर्जीवित करना शामिल है।
  • भारत से समर्थन:
    • भारत, जिसने अपने पड़ोसियों के साथ सबंध को मज़बूत करने हेतु "नेबरहुड फर्स्ट नीति" का अनुसरण किया है, श्रीलंका को मौजूदा संकट से बाहर निकालने में अतिरिक्त सहायता देकर उसे संकट से उबरने में मदद कर सकता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से राहत:
    • श्रीलंका ने बेलआउट के लिये IMF से संपर्क किया है। IMF मौजूदा आर्थिक संकट से उबरने के श्रीलंका के प्रयासों का समर्थन कर सकता है।
  • चक्रीयर्थव्यवस्था की संभावनाएँं:
    • श्रीलंका में आर्थिक अस्थिरता के संदर्भ में आयात पर निर्भरता को चक्रीय अर्थव्यवस्था द्वारा कम किया जा सकता है यह रिकवरी में सहायता के लिये एक स्थायी विकल्प प्रदान करेगा।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्षों के प्रश्न (PYQs)

प्रश्न. कभी-कभी समाचारों में देखा जाने वाला हाथी दर्रा का उल्लेख निम्नलिखित में से किसके मामलों के संदर्भ में किया गया है? (2009)

(a) बांग्लादेश
(b) भारत
(c) नेपाल
(d) श्रीलंका

उत्तर: (d)

व्याख्या:

  • हाथी दर्रा (जो इस्थमस का कार्य करता है) श्रीलंका की उत्तरी मुख्य भूमि जो वान्नी के नाम से जाना जाता है, को जाफना प्रायद्वीप के साथ जोड़ता है।
  • श्रीलंका पर डचों के कब्ज़े के दौरान हाथियों का निर्यात करैतिवु से किया जाता था, जो जाफना प्रायद्वीप से दूर स्थित द्वीपों में से एक था और हाथियों की वार्षिक बिक्री भी जाफना में आयोजित की जाती थी। देश के अन्य हिस्सों में पकड़े गए हाथियों को इस लैगून के पार जाफना प्रायद्वीप में ले जाया जाता था, जिसके कारण इसे हाथी दर्रा नाम दिया गया।
  • लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) और श्रीलंका के इतिहास में एलीफेंट पास के पतन ने पहली बार चिह्नित किया कि तमिल ईलम ने श्रीलंकाई मुख्य भूमि और जाफना प्रायद्वीप के बीच रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण लिंक को नियंत्रित किया।
  • अतः विकल्प (d) सही उत्तर है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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