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यौन उत्पीड़न की शिकार नाबालिगों हेतु सहायता योजना

  • 05 Jul 2023
  • 10 min read

प्रिलिम्स के लिये:

POCSO अधिनियम, प्रथम सूचना रिपोर्ट, निर्भया फंड, बाल देखभाल संस्थान, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो, मिशन वात्सल्य, सतत् विकास लक्ष्य, किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम 2015  

मेन्स के लिये:

यौन उत्पीड़न के पीड़ितों की सहायता के लिये योजनाएँ या पहल

चर्चा में क्यों?

भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने एक नई योजना शुरू की है जिसका उद्देश्य यौन उत्पीड़न के कारण गर्भवती उन नाबालिग पीड़ितों को आवश्यक देखभाल और सहायता प्रदान करना है जिन्हें परिवार का समर्थन नहीं मिलता है।

  • यह योजना 74.10 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ देश भर में इन पीड़ितों को आश्रय, भोजन, कानूनी सहायता और अन्य आवश्यक सहायता प्रदान करेगी। 

योजना के प्रमुख प्रावधान:  

  • परिचय:  
    • इस योजना का उद्देश्य उन नाबालिग लड़कियों की सहायता करना है जिन्हें बलात्कार या सामूहिक बलात्कार के परिणामस्वरूप जबरन गर्भधारण के कारण उनके परिवारों द्वारा छोड़ दिया गया है।
    • यह बलात्कार और गंभीर हिंसा के नाबालिग पीड़ितों द्वारा अनुभव किये जाने वाले शारीरिक एवं भावनात्मक आघात, विशेषकर उन मामलों में जहाँ वे गर्भवती हो जाती हैं, पर बल देता है।
  • पात्रता मानदंड और प्रलेखन:  
    • 18 वर्ष से कम उम्र की पीड़िताएँ, जो यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012 के प्रावधानों के अनुसार बलात्कार या हमले के कारण गर्भवती हो जाती हैं और या तो अनाथ हैं या उनके परिवारों द्वारा छोड़ दी गई हैं, उन्हें इस योजना में शामिल किया जाएगा।
    • योजना का लाभ उठाने के लिये पीड़ितों के पास प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) की प्रति का होना अनिवार्य नहीं है।
  • प्रावधान:  
    • इसका उद्देश्य ऐसे पीड़ितों को निर्भया फंड के माध्यम से वित्तीय, चिकित्सा और बुनियादी सुविधाएँ प्रदान करना है।
    • इस फंड का उपयोग इन पीड़ितों के लिये मौजूदा बाल देखभाल संस्थानों (CCI) में स्टैंडअलोन शेल्टर (Standalone shelters) या समर्पित नामित वार्डों में आश्रय सुनिश्चित करने हेतु किया जाएगा।
      • CCI के तहत वार्डों के मामले में नाबालिग बलात्कार पीड़ितों की विशिष्ट ज़रूरतों को पूरा करने हेतु अलग सुरक्षित स्थान प्रदान किये जाएंगे। 
    • योजना के तहत एकीकृत समर्थन का उद्देश्य शिक्षा, पुलिस सहायता, स्वास्थ्य देखभाल और कानूनी सहायता सहित विभिन्न सेवाओं तक तत्काल तथा  गैर-आपातकालीन पहुँच प्रदान करना है।
    • नाबालिग पीड़िता और उसके नवजात शिशु को न्याय के साथ पुनर्वास तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिये बीमा कवरेज भी प्रदान किया जाएगा।
  • कार्यान्वयन:  
    • नाबालिग पीड़ितों के लिये इस सहायता को वास्तविक रूप देने के लिये यह योजना राज्य सरकारों और CCI के साथ साझेदारी में मिशन वात्सल्य के प्रशासनिक ढाँचे का उपयोग करेगी।
    • इसके अलावा बलात्कार पीड़ित नाबालिगों को शीघ्र न्याय दिलाने के लिये भारत में 415 POCSO फास्ट-ट्रैक न्यायालय पहले से ही स्थापित हैं।
  • आवश्यकता:  
    • राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के वर्ष 2021 के आँकड़ों के अनुसार, POCSO अधिनियम के अंतर्गत 51,863 मामले दर्ज किये गए।
    • इन मामलों में से 64% मामले अधिनियम की धारा 3 और 5 के अंतर्गत दर्ज किये गए थे, जो क्रमशः प्रवेशन यौन उत्पीड़न (Penetrative Sexual Assault) और गंभीर प्रवेशन यौन उत्पीड़न से संबंधित थे।
      • पीड़ितों में अधिकांश लड़कियाँ थीं और उनमें से कई गर्भवती हो गईं, जिससे उनके परिवारों द्वारा अस्वीकार किये जाने या त्याग दिये जाने पर उनकी शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ और बढ़ गईं।

नोट:  

  • निर्भया फंड:  
    • वर्ष 2013 में स्थापित निर्भया फंड महिलाओं की सुरक्षा के लिये एक गैर-व्यपगत योग्य कॉर्पस फंड प्रदान करता है।
    • इसे वित्त मंत्रालय (MOF) के आर्थिक मामलों के विभाग (DEA) द्वारा प्रशासित किया जाता है।
      • इसके अतिरिक्त महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MoWCD) निर्भया फंड के अंर्तगत वित्तपोषित किये जाने वाले प्रस्तावों और योजनाओं का मूल्यांकन करने तथा सिफारिश प्रदान करने वाला नोडल मंत्रालय है। 
  • मिशन वात्सल्य:  
    • यह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा सतत् विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप विकास और बाल संरक्षण प्राथमिकताओं के लिये एक रोडमैप के अंतर्गत प्रारंभ की गई केंद्र प्रायोजित योजना है।
  • बाल देखभाल संस्थाएँ:  
    • इन्हें किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के अंतर्गत बाल गृह, खुला आश्रय, अवलोकन गृह, विशेष गृह, सुरक्षित स्थान, विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी के साथ उन बच्चों की देखभाल एवं सुरक्षा प्रदान करने के लिये एक उपयुक्त सुविधा के रूप में परिभाषित किया गया है जिन बच्चों को ऐसी सुविधाओं की आवश्यकता है।
  • राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो: 
    • NCRB की स्थापना वर्ष 1986 में की गई, इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है, इसकी स्थापना गृह मंत्रालय के अंर्तगत अपराध और अपराधियों की जानकारी एकत्रित करने के लिये की गई थी ताकि जाँचकर्ताओं को अपराध और अपराधियों के संबंध सूचना पाने में सहायता प्राप्त हो सके।
    • इसकी स्थापना राष्ट्रीय पुलिस आयोग (वर्ष 1977-1981) तथा गृह मंत्रालय की टास्क फोर्स (वर्ष 1985) की सिफारिशों के आधार पर की गई थी।
    • ब्यूरो को यौन अपराधियों का राष्ट्रीय डेटाबेस (NDSO) बनाए रखने के साथ ही इसे नियमित आधार पर राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के साथ साझा करने का काम सौंपा गया है।

यौन उत्पीड़न के पीड़ितों की सहायता के लिये कुछ अन्य योजनाएँ या पहल:

  • केंद्रीय पीड़ित मुआवज़ा कोष  (CVCF): यह  CrPC की धारा 357A के अंर्तगत बलात्कार/सामूहिक बलात्कार सहित विभिन्न अपराधों के पीड़ितों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
  • वन स्टॉप सेंटर (OSCs): यह किसी भी परिस्थिति में हिंसा से प्रभावित महिलाओं को चिकित्सा सहायता, पुलिस सहायता, कानूनी सहायता या परामर्श, मनोवैज्ञानिक-सामाजिक परामर्श के साथ अस्थायी आश्रय जैसी एकीकृत सेवाएँ प्रदान करता है।
    • उषा मेहरा आयोग ने वन-स्टॉप सेंटर स्थापित करने की सिफारिश की थी।
  • महिला पुलिस स्वयंसेवक (MPV): यह महिला स्वयंसेवकों के माध्यम से ज़मीनी स्तर पर सार्वजनिक-पुलिस इंटरफेस की सुविधा प्रदान करती है जो पुलिस और समुदायों के बीच एक कड़ी के रूप में कार्य करती है, साथ ही संकट की स्थिति में महिलाओं को सहायता प्रदान करती है

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

मेन्स: 

प्रश्न. हमें देश में महिलाओं के प्रति यौन उत्पीड़न के बढ़ते हुए दृष्टांत दिखाई रहे हैं। इस कुकृत्य के विरुद्ध विद्यमान विविध उपबंधों के होते हुए भी ऐसी घटनाओं की संख्या बढ़ रही है। इस संकट से निपटने के लिये कुछ नवाचारी उपाय सुझाइये। (2014) 

स्रोत: द हिंदू

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