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PG में सरकारी डॉक्टरों को दिया जाएगा आरक्षण: SC

  • 07 Sep 2020
  • 5 min read

प्रिलिम्स के लिये

मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया

मेन्स के लिये

PG में सरकारी डॉक्टरों के  आरक्षण से संबंधी मुद्दे

चर्चा में क्यों?

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों को सरकारी नौकरी कर रहे डॉक्टरों को मेडिकल के पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) पाठ्यक्रम में प्रवेश में आरक्षण का लाभ देने की अनुमति प्रदान की है। सर्वोच्च न्यायालय की पाँच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने यह भी कहा कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) के पास PG पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिये सरकारी नौकरी वाले डॉक्टरों (इन-सर्विस डॉक्टरों) को आरक्षण प्रदान करने या न करने की कोई शक्ति नहीं है।

प्रमुख बिंदु

  • खंडपीठ ने कहा है कि इस तरह के आरक्षण पर प्रतिबंध लगाने वाले MCI के नियम असंवैधानिक और मनमाने हैं इन-सर्विस डॉक्टरों के लिये आरक्षण प्रदान करने का अधिकार राज्य विधायिका के पास है। 
    • मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) के पास PG कोर्सेज़ में दाखिले के लिये इन-सर्विस डाक्टरों को आरक्षण देने या नहीं देने की कोई शक्ति नहीं है। पीठ ने MCI के विषय में स्पष्ट किया कि यह एक संवैधानिक संस्था है और इसे आरक्षण संबंधी प्रावधान बनाने का कोई अधिकार नहीं है।
    • पीठ ने कहा कि एक राज्य के पास विधायी क्षमता और अधिकार है, राज्य को सूची-III की प्रविष्टि 25 के तहत स्नातकोत्तर डिग्री/डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के इच्छुक इन-सर्विस उम्मीदवारों के लिये प्रवेश का एक अलग स्रोत प्रदान करने की शक्ति प्राप्त है।
      • सूची-III की प्रविष्टि 25: शिक्षा (तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और विश्वविद्यालयों सहित) संबंधी प्रावधान प्रविष्टि संख्या 63, 64, 65 के विषय हैं।
      • संविधान संघ और राज्यों के बीच विधायी विषयों को सातवीं अनुसूची के तहत तीन स्तरों पर विभाजित करता है, जो सूची-I (संघ सूची), सूची-II (राज्य सूची) और सूची-III (समवर्ती सूची) में वर्णित हैं।
    • पीठ ने राज्यों से PG की डिग्री पूरी करने के बाद इन-सर्विस डॉक्टरों द्वारा ग्रामीण/दूरस्थ सेवा में सेवा देने के लिये एक योजना तैयार करने को कहा है। साथ ही पीठ ने यह भी कहा कि नीट PG कोर्सेज़ में दाखिले हेतु आरक्षण के लिये डॉक्टरों द्वारा दूरदराज़ या ग्रामीण इलाकों में 5 वर्ष तक काम करने का बॉण्ड साइन किया जाना अनिवार्य है।

पृष्ठभूमि:

  • केरल, महाराष्ट्र, और हरियाणा के डॉक्टरों ने एक याचिका दायर की थी जिसमें MCI द्वारा तैयार किये गए पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन, 2000 की वैधता को चुनौती दी गई थी।
    • पीजी डिग्री पाठ्यक्रमों में सभी प्रवेश परीक्षाएँ NEET के माध्यम से आयोजित की जाती हैं और 50% सीटें अखिल भारतीय कोटा के माध्यम से भरी जाती हैं और शेष 50% राज्य कोटा से।
    • वर्तमान में PG डिप्लोमा कोर्सेज़ में होने वाले दाखिले के लिये 50 फीसदी सीटें सरकारी डाक्टरों के लिये आरक्षित की गई हैं लेकिन वहीं MCI नियमों के मुताबिक PG के डिग्री कोर्सेज़ में दाखिले हेतु सरकारी डाक्टरों के लिये आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है।
    • PG के डिग्री कोर्सेज़ के लिये होने वाले दाखिले में 50 फीसद सीटें ऑल इंडिया कोटे से और 50 फीसदी सीटें स्टेट (राज्य) कोटे से भरी जाती हैं।
  • डॉक्टरों का कहना है कि आरक्षण का लाभ मिलने से सरकारी अस्पतालों और ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले डॉक्टरों को प्रोत्साहन मिलेगा।
    • सेवारत उम्मीदवारों को, उनके काम (ड्यूटी) के कारण, अध्ययन करने के लिये मुश्किल से समय मिल पाता है, ऐसे में उनके लिये सामान्य मेरिट वाले उम्मीदवारों के साथ प्रतिस्पर्द्धा करना बहुत कठिन हो जाता है।
  • केंद्र सरकार और MCI ने यह कहते हुए इस दलील का विरोध किया कि इन-सर्विस उम्मीदवारों को कोर्स में प्रवेश का एक अलग स्रोत उपलब्ध कराने या आरक्षण देने से न केवल मेडिकल एजुकेशन के स्तर पर प्रभाव पड़ेगा बल्कि इससे MCI की अथॉरिटी भी प्रभावित होगी। 

स्रोत: द हिंदू

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