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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

क्यूबा में विरोध-प्रदर्शन

  • 19 Jul 2021
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये 

क्यूबा की भौगोलिक स्थिति

मेन्स के लिये

भारत-क्यूबा संबंध,  क्यूबा के राजनीतिक-आर्थिक संकट का भारत पर प्रभाव

चर्चा में क्यों?

हाल ही में क्यूबा में हज़ारों लोग अधिकारों पर लंबे समय से लगे प्रतिबंधों, भोजन और दवाओं की कमी तथा कोविड-19 महामारी के प्रति सरकार की खराब प्रतिक्रिया का विरोध करने के लिये सड़कों पर उतर आए।

  • यह कई दशकों बाद कम्युनिस्टों (Communist) द्वारा संचालित सबसे बड़ा सरकार विरोधी प्रदर्शन है।

Cuba

प्रमुख बिंदु

आंदोलन की शुरुआत:

  • सोवियत संघ या उसके पूर्व सहयोगियों  के पतन और शीत युद्ध (Cold War) की समाप्ति (वर्ष 1945-1991) के बाद से क्यूबा में आर्थिक संकट के बीच सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हुए।
    • क्यूबा में छः दशकों से भी अधिक समय तक साम्यवादी सरकार रही है।
  • वर्तमान में क्यूबा, अमेरिकी प्रतिबंधों और कोविड-19 से बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
  • क्यूबा के लोग अर्थव्यवस्था के पतन, भोजन और दवा की कमी, वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि तथा महामारी से निपटने में सरकार की असफलता से नाराज़ हैं।
  • प्रदर्शनकारियों ने "आज़ादी" के नारे लगाए और राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़ कैनेल (Miguel Diaz Canel) से पद छोड़ने की मांग की।
  • दूसरी ओर क्यूबा के राष्ट्रपति इस उथल-पुथल के लिये अमेरिका को ज़िम्मेदार मान रहे हैं।
    • उन्होंने क्यूबा पर अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों का आह्वान किया, जिसके परिणामस्वरूप देश में आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हुई।
  • इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका क्यूबा के लोगों की आज़ादी के लिये उनके साथ खड़ा है।

क्यूबा का इतिहास:

  • 15वीं शताब्दी से लेकर वर्ष 1898 में स्पेन-अमेरिका युद्ध (Spanish–American War) तक क्यूबा, स्पेन का एक उपनिवेश था, इस युद्ध के बाद क्यूबा पर संयुक्त राज्य अमेरिका का कब्ज़ा हुआ। 
    • हालाँकि वर्ष 1902 में इसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा संरक्षित राष्ट्र के रूप में नाममात्र स्वतंत्रता प्राप्त हुई।
  • वर्ष 1940 में क्यूबा ने अपनी लोकतांत्रिक प्रणाली को मज़बूत करने का प्रयास किया, किंतु बढ़ती राजनीतिक कट्टरता और सामाजिक संघर्ष के कारण वर्ष 1952 में फुलगेनियो बतिस्ता के नेतृत्त्व में तख्तापलट हुआ और वहाँ तानाशाही शासन स्थापित हो गया।
  • फुलगेनियो बतिस्ता के शासन के दौरान बढ़ते भ्रष्टाचार और उत्पीड़न के कारण जनवरी 1959 में आंदोलन की शुरुआत हुई तथा बतिस्ता को सत्ता से हटा दिया गया, जिसके बाद फिदेल कास्त्रो के नेतृत्त्व में कम्युनिस्ट शासन की स्थापना हुई।
  • वर्ष 1965 से क्यूबा को कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा शासित किया जा रहा है।
  • इसके अलावा शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच विवाद का प्रमुख विषय क्यूबा था तथा वर्ष 1962 के क्यूबा मिसाइल संकट के दौरान दोनों महाशक्तियाँ परमाणु युद्ध की कगार पर मौजूद थीं।
  • वर्ष 2019 में क्यूबा में एक नए संविधान को मंज़ूरी दी गई, जो निजी संपत्ति के अधिकार को आधिकारिक मान्यता देता है, जबकि उत्पादन और भूमि के विनियमन पर केंद्र सरकार का अधिकार सुनिश्चित करता है।

अमेरिका-क्यूबा संबंध: संयुक्त राज्य अमेरिका और क्यूबा के बीच’ 60 वर्षों से अधिक समय तक तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। अमेरिका-क्यूबा संबंधों की जड़ें शीत युद्ध काल में निहित हैं। यह निम्नलिखित घटनाओं में परिलक्षित हो सकता है।

  • क्यूबा क्रांति: वर्ष 1959 में फिदेल कास्त्रो और क्रांतिकारियों के एक समूह ने हवाना (क्यूबा की राजधानी) की सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया। उन्होंने फुलगेनियो बतिस्ता की अमेरिका समर्थित सरकार को उखाड़ फेंका।
    • क्यूबा की क्रांति के बाद फिदेल कास्त्रो की सरकार ने अमेरिकी स्वामित्व वाली संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण करना शुरू कर दिया, अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार पर आर्थिक दंड लगाया और सोवियत संघ के साथ अपने व्यापार को बढ़ाया।
  • क्यूबा का मिसाइल संकट: क्यूबा की क्रांति के बाद की विभिन्न घटनाओं का अनुसरण करते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका ने क्यूबा के साथ राजनयिक संबंध समाप्त कर दिये और वर्ष 1961 में फिदेल कास्त्रो शासन को उखाड़ फेंकने के लिये एक गुप्त अभियान शुरू किया।
    • इसके बाद अमेरिकी एजेंसियों द्वारा क्यूबा सरकार को गिराने का प्रयास किया गया, जिसे बे ऑफ पिग्स आक्रमण (Bay of Pigs invasion) के रूप में जाना जाता है।
    • इसके प्रत्युत्तर में क्यूबा ने सोवियत संघ को द्वीप पर गुप्त रूप से परमाणु मिसाइल स्थापित करने की अनुमति दी। इसने अमेरिका और सोवियत संघ को परमाणु युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया।
    • अंत में सोवियत संघ ने अमेरिका से क्यूबा पर आक्रमण न करने और तुर्की से अमेरिकी परमाणु मिसाइलों को हटाने की प्रतिबद्धता के बदले में मिसाइलों को वापस लेने पर सहमति व्यक्त की।
  • अमेरिकी प्रतिबंध: क्यूबा मिसाइल संकट के बाद अमेरिका ने क्यूबा के अपने लगभग सभी निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी (John F. Kennedy) ने एक पूर्ण आर्थिक प्रतिबंध में विस्तारित किया जिसमें कड़े यात्रा प्रतिबंध भी शामिल थे।
    • ये आर्थिक प्रतिबंध आज भी जारी हैं।
    • अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने राजनयिक संबंधों को बहाल करने और यात्रा तथा व्यापार का विस्तार करने सहित द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने हेतु कई कदम उठाए।
    • हालाँकि ट्रंप प्रशासन ने पर्यटन और वाणिज्य पर प्रतिबंध लगाकर पिछले समझौतों के पहलुओं को उलट दिया था।

भारत का स्टैंड:

  • भारत ने वर्तमान में चल रहे विरोध पर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन भारत ने अतीत में क्यूबा की आर्थिक नाकेबंदी को हटाने का समर्थन किया है।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने ज़ोर देकर कहा कि क्यूबा के खिलाफ अमेरिका द्वारा इस घेराबंदी का निरंतर अस्तित्व बहुपक्षवाद और संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता को कमज़ोर करता है।

कम्युनिस्ट देश 

  • कम्युनिस्ट देश एक ऐसा राष्ट्र है जो एक ही पार्टी द्वारा शासित होता है और सत्तारूढ़ नेताओं के फैसलों की नींव मार्क्स एवं लेनिन के दर्शन पर आधारित होती है।
  • साम्यवाद एक राजनीतिक, सामाजिक, दार्शनिक और आर्थिक सिद्धांत है जिसका लक्ष्य निजी संपत्ति, लाभ-आधारित अर्थव्यवस्था को उत्पादन के प्रमुख साधनों के सामान्य स्वामित्व से बदलना है।

स्रोत: द हिंदू

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