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बिजली की बचत व पर्यावरण की सुरक्षा हेतु AC के लिये न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस तापमान का सुझाव

  • 25 Jun 2018
  • 4 min read

चर्चा में क्यों?

गर्मी से राहत पाने के लिये एयर कंडीशनर यानी AC का इस्तेमाल निरंतर बढ़ता जा रहा है, हालाँकि इससे गर्मी से राहत तो मिलती है लेकिन बिजली की खपत और पर्यावरण पर इसका बहुत नकारात्मक प्रभाव भी पड़ता है। इस समस्या के समाधान हेतु एयर कंडीशनिंग के क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने के लिये ऊर्जा मंत्रालय ने एक जागरूकता अभियान शुरू किया है। दरअसल ऊर्जा दक्षता ब्‍यूरो ने एक अध्‍ययन के बाद एयर कंडीशनरों के लिये न्यूनतम तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस रखे जाने की सिफारिश की है।

प्रमुख बिंदु

  • हाल ही में इस संबंध में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि एयर कंडीशनर के तापमान में प्रत्‍येक एक डिग्री की वृद्धि से इस्‍तेमाल की गई बिजली की खपत 6 फीसदी कम हो सकती है।
  • अध्ययन में यह भी पता चला है कि अधिकांश वाणिज्यिक प्रतिष्ठान, होटल और कार्यालय AC का तापमान 18-21 डिग्री सेल्सियस रखते हैं।
  • जैसा कि हम सभी जानते हैं कि मानव के शरीर का सामान्य तापमान लगभग 36-37 डिग्री सेल्सियस होता है। ऐसे में 18-21 डिग्री सेल्सियस तापमान पर मनुष्य को गर्म कपड़ों की आवश्यकता पड़ती है। AC का तापमान इतना कम रखना बिजली की बर्बादी के सिवाय और कुछ नहीं है। यही कारण है कि जापान जैसे कुछ देशों में AC का तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रखे जाने का नियम है।

बिजली की खपत में कमी आएगी

  • यदि भारत में सभी लोग AC का तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रखने लगें तो न केवल प्रतिवर्ष 20 अरब यूनिट बिजली की बचत हो सकती है, बल्कि इससे पर्यावरण को भी सुरक्षित रखने में सहायता मिलेगी। 
  • दरअसल परिचालन लागतों यानी operational costs में बचत के लिये ऊर्जा दक्षता का बहुत महत्त्व है।

पर्यावरण सुरक्षा की दृष्टि से

  • पर्यावरण सुरक्षा की दृष्टि से यह कदम उपयोगी सिद्ध हो सकता है। यदि यह योजना अमल में आई तो ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में भी में कमी आएगी।
  • दरअसल, आम इस्तेमाल के एसी, फ्रिज जैसे उपकरणों से कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड, मीथेन, क्लोरो-फ्लोरो कार्बन, ओजोन आदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है, जो जलवायु परिवर्तन की एक प्रमुख वज़ह है। जब अधिक तापमान पर इन उपकरणों को चलाया जाएगा तो स्वाभाविक रूप से ऊर्जा की खपत कम होगी। जब ऊर्जा की खपत कम होगी तो ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन भी कम होगा।

इस संबंध में विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी से बचने के लिये यदि दूसरे विकल्पों पर विचार किया जाए तो पर्यावरण को सुरक्षित बनाए रखने में योगदान दिया जा सकता है। आपको बता दें कि पहले के समय में जब एयर कंडिशनिंग आज जितना लोकप्रिय नहीं थी, इमारतों की छतें काफी ऊँची बनाई जाती थी ताकि गर्म हवा ऊपर उठे और कमरे के निचले हिस्से को ठंडा बनाए रखें। ऐसे में यदि इस दिशा में गंभीरतापूर्वक विचार-विमर्श करते हुए कार्यवाही की जाती है तो निश्चित रूप से इस समस्या का कोई न कोई प्रभावी समाधान निकाला जा सकता है।

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