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जीव विज्ञान और पर्यावरण

वर्ष 2020 के बाद वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क

  • 14 Jul 2021
  • 11 min read

प्रिलिम्स के लिये:

जैविक विविधता अभिसमय, कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़, जैविक विविधता, कार्टाजेना प्रोटोकॉल, नागोया प्रोटोकॉल

मेन्स के लिये:

नए वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क का लक्ष्य एवं उद्देश्य

चर्चा में क्यों?

जैविक विविधता पर सयुक्त राष्ट्र अभिसमय’ (United Nations Convention on Biological Diversity) ने वर्ष 2030 तक प्रकृति प्रबंधन हेतु विकासशील देशों को वित्त उपलब्ध कराने के लिये विभिन्न स्रोतों से अतिरिक्त 200 बिलियन अमेरिकी डाॅलर के वित्तपोषण की मांग की है।

  • यह उन मांगों और लक्ष्यों में से एक है जिसे वर्ष 2030 तक एक नए वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क के आधिकारिक मसौदे में निर्धारित किया गया है।

जैविक विविधता अभिसमय (CBD)

  • जैविक विविधता अभिसमय (Convention on Biological Diversity- CBD), जैव विविधता के संरक्षण हेतु कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि है जो वर्ष 1993 से लागू है। इसके 3 मुख्य उद्देश्य हैं:
    • जैव विविधता का संरक्षण।
    • जैविक विविधता के घटकों का सतत् उपयोग।
    • आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से होने वाले लाभों का उचित और न्यायसंगत वितरण।
  • लगभग सभी देशों ने इसकी पुष्टि की है (अमेरिका ने इस संधि पर हस्ताक्षर तो किये हैं लेकिन पुष्टि नहीं की है)।
  • CBD का सचिवालय मॉन्ट्रियल, कनाडा में स्थित है जो संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के तहत संचालित होता है।
  • जैविक विविधता अभिसमय के तहत पार्टियांँ (देश) नियमित अंतराल पर मिलती हैं और इन बैठकों को कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़ (Conference of Parties - COP) कहा जाता है।
  • वर्ष 2000 में जैव सुरक्षा पर एक पूरक समझौते के रुप में कार्टाजेना प्रोटोकॉल (Cartagena Protocol on Biosafety) को अपनाया गया था। यह 11 सितंबर, 2003 को लागू हुआ।
    • यह प्रोटोकॉल आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी के परिणामस्वरूप संशोधित जीवित जीवों द्वारा उत्पन्न संभावित जोखिमों से जैविक विविधता की रक्षा करता है।
  • आनुवंशिक संसाधनों तक पहुंँच सुनिशचित तकरने और उनके उपयोग से उत्पन्न होने वाले लाभों के उचित एवं न्यायसंगत साझाकरण को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2010 में नागोया प्रोटोकॉल को जापान के नागोया शहर में संपन्न
  • COP10 में अपनाया गया था। यह 12 अक्तूबर, 2014 को लागू हुआ।
    • यह प्रोटोकॉल न केवल CBD के तहत शामिल आनुवंशिक संसाधनों और उनके उपयोग से उत्पन्न होने वाले लाभों पर लागू होता है, बल्कि आनुवंशिक संसाधनों से जुड़े उस पारंपरिक ज्ञान (Traditional knowledge (TK) को भी कवर करता है जो CBDऔर इसके उपयोग से होने वाले लाभों से आच्छादित हैं।
  • COP-10 में आनुवंशिक संसाधनों पर नागोया प्रोटोकॉल को अपनाने के साथ, जैव विविधता को बचाने हेतु सभी देशों द्वारा कार्रवाई के लिये दस वर्ष की रूपरेख को भी अपनाया गया।
  • वर्ष 2010 में नागोया में CBD की कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़ (COP)-10 में वर्ष 2011-2020 हेतु ‘जैव विविधता के लिये रणनीतिक योजना’ को अपनाया गया। इसमें पहली बार विषय विशिष्ट 20 जैव विविधता लक्ष्यों- जिन्हें आइचीजैव विविधता लक्ष्य के रूप में भी जाना जाता है, को अपनाया गया।
  • भारत में CBD के प्रावधानों को प्रभावी बनाने हेतु वर्ष 2002 में जैविक विविधता अधिनियम अधिनियमित किया गया।

प्रमुख बिंदु:

  • पृष्ठभूमि:

    • जैव विविधता और इससे प्राप्त होने वाले लाभ, मानव कल्याण के साथ-साथ पृथ्वी की मौलिक ज़रूरतें हैं। चल रहे प्रयासों के बावजूद वैश्विक स्तर पर जैव विविधता की स्थिति बिगड़ रही है तथा व्यापार-उद्देश्यों के तहत इसमें गिरावट जारी रहने या इसके और खराब होने का अनुमान है।
    • वर्ष 2020 के बाद का वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क जैव विविधता 2011-2020 हेतु एक रणनीतिक योजना पर आधारित है।
      • जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र दशक 2011-2020 (United Nations Decade on Biodiversity 2011-2020 ) के समाप्त होने के साथ ही IUCN द्वारा सक्रिय रूप से एक ममहत्त्वाकांक्षी नए वैश्विक जैव विविधता ढांँचे के विकास को अपनाए जाने का आह्वान किया जा रहा है।
  • उद्देश्य:

    • मार्गदर्शक बल/शक्ति: यह एक नया फ्रेमवर्क/ढांँचा है जो प्रकृति की रक्षा करने और वर्ष 2020 से वर्ष 2030 तक मनुष्यों के लिये इसकी आवश्यक सेवाओं को बनाए रखने हेतु एक वैश्विक मार्गदर्शक शक्ति के रूप में कार्य करेगा।
    • लक्ष्य निर्धारित करना: यह राष्ट्रीय और क्षेत्रीय लक्ष्यों को निर्धारित एवं विकसित करने, आवश्यकतानुसार राष्ट्रीय रणनीतियों और कार्य योजनाओं को अद्यतन करने, वैश्विक स्तर पर प्रगति की नियमित निगरानी तथा समीक्षा करने हेतु कन्वेंशन के 196 दलों के लिये एक वैश्विक, परिणाम-उन्मुख ढांँचा है।
    • तत्काल और परिवर्तनकारी कार्रवाई: फ्रेमवर्क का उद्देश्य सरकारों और संपूर्ण समाज द्वारा जैविक विविधता, इसके प्रोटोकॉल और अन्य जैव विविधता से संबंधित बहुपक्षीय समझौतों, प्रक्रियाओं तथा उपकरणों पर कन्वेंशन के उद्देश्यों में योगदान करने हेतु तत्काल परिवर्तनकारी कार्रवाई को बढ़ावा देना है।
    • क्षमता निर्माण: इसका उद्देश्य लक्ष्यों को पूरा करने हेतु संरक्षण उपाय करने के लिये समुदायों/सरकारों के उचित क्षमता निर्माण को सुनिश्चित करना है।
      • इनमें उन देशों को विवादास्पद प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण शामिल है जिनके पास वर्तमान में व्यापक वैज्ञानिक सहयोग और प्रौद्योगिकी नहीं है।
  • लक्ष्य और उद्देश्य:

    • वर्ष 2050 तक नए फ्रेमवर्क के निम्नलिखित चार लक्ष्यों को प्राप्त किया जाना है:
      • जैव विविधता के विलुप्त होने तथा उसमें गिरावट को रोकना।
      • संरक्षण द्वारा मनुष्यों के लिये प्रकृति की सेवाओं को बढ़ाने और उन्हें बनाए रखना।
      • आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से सभी के लिये उचित और समान लाभ सुनिश्चित करना।
      • वर्ष 2050 के विज़न को प्राप्त करने हेतु उपलब्ध वित्तीय और कार्यान्वयन के अन्य आवश्यक साधनों के मध्य अंतर को कम करना।
    • 2030 कार्य-उन्मुख लक्ष्य : 2030 के दशक में तत्काल कार्रवाई के लिये इस फ्रेमवर्क में 21 कार्य-उन्मुख लक्ष्य हैं।
      • उनमें से एक है संरक्षित क्षेत्रों के तहत विश्व के कम- से-कम 30% भूमि और समुद्र क्षेत्र को लाना।
      • एक अन्य लक्ष्य जैव विविधता के लिये हानिकारक प्रोत्साहनों को पुनर्निर्देशित करना, उनका पुन: उपयोग करना, सुधार करना और उचित एवं न्यायसंगत तरीके से उन्हें प्रतिवर्ष कम-से-कम 500 बिलियन डॉलर से कम करना" है।
  • SDGs के साथ संबंध:

    • यह फ्रेमवर्क ‘सतत् विकास के लिये 2030 एजेंडा’ के कार्यान्वयन में एक मौलिक योगदान है।
    • साथ ही सतत् विकास लक्ष्यों (SDGs) की दिशा में प्रगति के लिये रूपरेखा को लागू करने हेतु आवश्यक शर्तें तैयार करने में मदद मिलेगी।
  • वित्तीय सहायता की आवश्यकता:

    • विकासशील देशों के लिये और अधिक वित्तीय सहायता हेतु फ्रेमवर्क की मांग, जैव विविधता के नुकसान से संबंधित पीड़ितों की सहायता करने के लिये सबसे कठिन है।
    • इस फ्रेमवर्क को लागू करने के लिये पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध हैं जो वर्ष 2030 तक प्रतिवर्ष कम-से-कम 700 बिलियन डॉलर तक के वित्तपोषण के अंतर को उत्तरोत्तर कम करेंगे।
    • वित्तीय प्रतिबद्धता को प्रतिवर्ष कम-से-कम $200 बिलियन तक बढ़ाना होगा। इसमें विकासशील देशों को प्रतिवर्ष 10 अरब डॉलर का अतिरिक्त अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रवाह शामिल है।

फ्रेमवर्क में परिवर्तन का सिद्धांत:

  • इस फ्रेमवर्क को परिवर्तन के सिद्धांत के आधार पर बनाया गया है जो यह मानता है कि आर्थिक, सामाजिक और वित्तीय मॉडल को बदलने के लिये वैश्विक, क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर तत्काल नीतिगत कार्रवाई करने की आवश्यकता है।
  • जिन प्रवृत्तियों ने जैव विविधता के नुकसान को बढ़ाया है, वे अगले 10 वर्षों (2030 तक) में स्थिर हो जाएंगे और वर्ष 2050 तक "प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने" संबंधी अभिसमय के दृष्टिकोण को प्राप्त करने के लिये अगले 20 वर्षों में प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र में सुधार करने में सहायता करेंगे।

Theory of change

स्रोत-डाउन टू अर्थ

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