दृष्टि ज्यूडिशियरी का पहला फाउंडेशन बैच 11 मार्च से शुरू अभी रजिस्टर करें
ध्यान दें:

डेली अपडेट्स


भारतीय अर्थव्यवस्था

‘प्लेटफॉर्म वर्क’

  • 03 Nov 2020
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये:

पब्लिक  इन्फ्रास्ट्रक्चर, गिग इकॉनमी

मेन्स के लिये:

सामाजिक सुरक्षा संहिता विधेयक, 2020 के मुख्य प्रावधान 

चर्चा में क्यों?

भारतीय कानून में पहली बार सामाजिक सुरक्षा संहिता विधेयक, 2020 में प्लेटफॉर्म वर्क (Platform Work) को पारंपरिक रोजगार श्रेणी से पृथक परिभाषित करने का प्रयास किया गया है।

प्रमुख बिंदु: 

  • पृष्ठभूमि:
    • श्रम को संविधान की समवर्ती सूची के अंतर्गत शामिल किया गया है। देश के पुराने श्रम कानूनों को सरलीकृत करने एवं श्रमिकों के हितों के साथ समझौता किये बिना आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन देने के लिये हाल ही में, संसद द्वारा औद्योगिक संबंधों पर व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य करने की स्थिति के संदर्भ में तीन श्रम संहिताओं/कोड को पारित किया गया।
    • ये श्रम कोड भारत में श्रम संबंधों पर एक परिवर्तनकारी प्रभाव डाल सकते हैं। कोड ऑन वेजेस एक्ट- 2019 (Code on Wages Act- 2019) के साथ श्रम पर ये  संहिता केंद्रीय और राज्य कानूनों को एकसाथ कर व्यवसाय के संचालन को आसान बना सकती हैं।
  • प्लेटफॉर्म वर्क: 
    • प्लेटफॉर्म वर्क के माध्यम से एक ऐसी कार्य व्यवस्था को इंगित किया जाता है जसमें  कर्मचारी-नियोक्ता के पारंपरिक संबंध (Traditional Employer-Employee Relationship) से  हटकर संगठन या व्यक्ति विशिष्ट की समस्याओं को हल करने या विशिष्ट सेवाओं या किसी अन्य ऐसी गतिविधियों को संपन्न करने के लिये अन्य संगठनों या व्यक्तियों का उपयोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाता है जिन्हें भुगतान के बदले, केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है।
  • प्लेटफॉर्म वर्क का महत्व:
    • प्लेटफॉर्म वर्क श्रमिकों को सुगमता से कार्य की पहुँच तक स्वामित्व प्रदान करता है।
    • महामारी के दौरान आवश्यक सेवाओं के वितरण में इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका है।
    • यह एक रोज़गार गहन क्षेत्र है।
    • शहरीकरण की तेज़ गति के कारण विकास के लिये यह एक संभावित क्षेत्र है।
  • वैश्विक प्रयास: 
    प्लेटफॉर्म श्रमिकों के अधिकारों के लिये चल रही वैश्विक बातचीत प्लेटफॉर्म श्रमिकों के साथ दुर्व्यवहार के आसपास ही केंद्रित रही है।
    • ओंटारियो और कैलिफोर्निया के श्रम कानूनों में किये गए संशोधन और अन्य नए  संशोधन प्लेटफार्म वर्कर्स को कर्मचारी का दर्जा देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है, जिनमें श्रमिकों को न्यूनतम मज़दूरी और कल्याणकारी लाभों की गारंटी देने का प्रयास किया गया है।

इस क्षेत्र से संबंधित मुद्दे: 

  • प्लेटफॉर्म वर्क को लेकर रोज़गार की स्थिति के संदर्भ में असंवेदनशीलता इस कारण से देखी जाती है क्योंकि जब प्लेटफॉर्म वर्क, श्रमिकों को कार्य की डिलीवरी के लिये लचीलापन और स्वामित्व प्रदान करता है, तब भी इन कार्यों को नियंत्रित  वायर्ड (Control Wired) तंत्र द्वारा बड़े पैमाने पर नियंत्रित किया जाता है।
    • यह कार्य का प्रति इकाई मूल्य निर्धारण, कार्य आवंटन एवं कार्य के घंटों को प्रभावित करता है।
    •  इसके अलावा, राइड शेयरिंग और फूड डिलीवरी जैसे ऑन-डिमांड प्लेटफॉर्म कार्य वाहनों की मौजूदा पहुँच पर निर्भर करते हैं।
  • प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था में प्रवेश करने के लिये श्रमिक गहन ऋण योजनाओं (Intensive Loan Schemes) पर निर्भर होते हैं, जिन्हें अक्सर प्लेटफॉर्म एग्रीगेटर कंपनियों (Platform Aggregator Companies) द्वारा यह सुविधा प्रदान की जाती है।
    • इसके परिणामस्वरूप वित्तीय दायित्वों से संचालित प्लेटफॉर्म कंपनियों पर निर्भरता कम होती जाती है, जिससे मध्यम-अवधि के निवेश चक्र में लचीलेपन और स्वामित्व में कमी देखने को मिलती है।
  • हालाँकि इसके विपरीत यह भी देखने को मिलता है कि पूंजी तक बुनियादी पहुँच वाले श्रमिकों की विशिष्ट श्रेणियों के लिये, मंच का लचीलापन एक महत्त्वपूर्ण आकर्षण/बिंदु के रूप में कार्य करता है।
  • संहिता में केंद्र सरकार, प्लेटफॉर्म एग्रीगेटर्स और श्रमिकों की संयुक्त ज़िम्मेदारी के रूप में बुनियादी कल्याण उपायों का प्रावधान किया गया है।
    • हालाँकि संहिता में इस बात को स्पष्ट नहीं किया गया कि कल्याण के किस हिस्से/भाग को वितरित करने के लिये कौन-सा हितधारक (Stakeholder) ज़िम्मेदार है।
    • कल्याणकारी सेवाओं को उपलब्ध कराए जाने के दौरान उनके तारतम्यता क्रम को बनाए रखने के लिये राज्य, कंपनियों और श्रमिकों द्वारा एक त्रिपक्षीय प्रयास, यह पहचानने के लिये कि श्रमिक कहाँ लचीलेपन के स्पेक्ट्रम पर आते हैं, प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से कंपनियों पर निर्भर करता है।
  • कार्यबल में संकुचन गिग अर्थव्यवस्था (Gig Economy) को बढ़ावा देता है।
    • गिग अर्थव्यवस्था: गिग इकोनॉमी एक मुक्त बाज़ार प्रणाली का समर्थन करती है जिसमें सामान्यत: कोई भी पद स्थायी नहीं होता है एवं संगठन द्वारा अल्पकालिक प्रतिबद्धताओं पर स्वतंत्र श्रमिकों को नियुक्त किया जाता है।

गिग कार्य और इसकी जटिल शर्तें:

  • महामारी के दौरान प्लेटफॉर्म श्रमिकों की भूमिका ने प्लेटफॉर्म एग्रीगेटर कंपनियों और राज्य को अधिक मज़बूत ज़िम्मेदारी देने के संदर्भ में एक मज़बूत उदाहरण प्रस्तुत किया है।
  • प्लेटफॉर्म श्रमिकों द्वारा महामारी के दौरान आवश्यक सेवाओं के वितरण का कार्य व्यक्तिगत जोखिम पर किया गया।
  • महामारी से प्रेरित वित्तीय संकट के बावजूद प्लेटफॉर्म कंपनियों को बचाए रखने के लिये प्लेटफॉर्म श्रमिक ज़िम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वाह करते रहे।
  • इनके द्वारा पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (Public Infrastructures) के रूप में मांग-संचालित एग्रीगेटर्स (Demand-Driven Aggregators) को बनाए रखने में अपनी भूमिका को पूर्ण रूप से सार्थक किया गया।
  • प्लेटफॉर्म श्रमिकों पर कंपनियों की निर्भरता कल्याणकारी उपायों को वितरित करने के लिये सार्वजनिक और निजी संस्थानों द्वारा संयुक्त रूप से ग्रहण की गई ज़िम्मेदारी को पूरा करती है।

आगे की राह:

गिग इकॉनमी (Gig Economy) में कार्य की विषमता (Heterogeneity) सामाजिक-कानूनी स्वीकार्यता के माध्यम से प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिये आगे का मार्ग प्रशस्त करती है जो सामाजिक सेवाओं के वितरण के लिये राज्य और प्लेटफॉर्म कंपनियों के लिये एक संयुक्त जवाबदेही का निर्धारण करती है। 

स्रोत: द हिंदू

close
एसएमएस अलर्ट
Share Page
images-2
images-2