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जैव विविधता और पर्यावरण

तेल रिसाव

  • 13 Aug 2021
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये 

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी, तेल रिसाव, बायोरेमेडिएशन तंत्र तकनीक

मेन्स के लिये

तेल रिसाव का जलीय जीवों एवं पर्यावरण पर प्रभाव, तेल रिसाव की घटनाओं को रोकने हेतु प्रयास

चर्चा में क्यों?

एक नए अध्ययन के अनुसार, यह पुष्टि की गई है कि कनाडा के आर्कटिक क्षेत्र के ठंडे समुद्री जल में पोषक तत्त्वों के साथ उत्तेजक बैक्टीरिया (बायोरेमेडिएशन) तेल रिसाव के बाद डीज़ल और अन्य पेट्रोलियम तेल को विघटित करने में मदद कर सकते हैं।

प्रमुख बिंदु

तेल रिसाव :

  • तेल रिसाव पर्यावरण में कच्चे तेल, गैसोलीन, ईंधन या अन्य तेल उत्पादों के अनियंत्रित रिसाव को संदर्भित करता है। 
  • तेल रिसाव की घटना भूमि, वायु या पानी को प्रदूषित कर सकती है, हालाँकि इसका उपयोग सामान्य तौर पर समुद्र में तेल रिसाव के संदर्भ में किया जाता है।

प्रमुख कारण : 

  • मुख्य रूप से महाद्वीपीय चट्टानों पर गहन पेट्रोलियम अन्वेषण एवं उत्पादन तथा जहाज़ों में बड़ी मात्रा में तेल के परिवहन के परिणामस्वरूप तेल रिसाव एक प्रमुख पर्यावरणीय समस्या बन गया है।
  • तेल रिसाव जो नदियों, खाड़ियों और समुद्र में होता है, अक्सर टैंकरों, नावों, पाइपलाइनों, रिफाइनरियों, ड्रिलिंग क्षेत्र तथा भंडारण सुविधाओं से जुड़ी दुर्घटनाओं के कारण होता है, लेकिन सामान्य नौकायान और प्राकृतिक आपदाएँ भी इसे प्रभावित करती हैं। 

पर्यावरणीय प्रभाव

  • स्वदेशी लोगों के लिये खतरा:
    • समुद्री भोजन पर निर्भर रहने वाली स्वदेशी आबादी हेतु तेल प्रदूषण स्वास्थ्य के लिये खतरा बन गया है।
  • जलीय जीवों के लिये हानिकारक:
    • समुद्र की सतह पर तेल जलीय जीवों के कई रूपों के लिये हानिकारक है क्योंकि यह पर्याप्त मात्रा में सूर्य के प्रकाश को सतह में प्रवेश करने से रोकता है और यह घुलित ऑक्सीजन के स्तर को भी कम करता है।
  • अतिताप (Hyperthermia):
    • कच्चा तेल पक्षियों के पंखों और फर के इन्सुलेट और जलरोधक गुणों को नष्ट कर देता है और इस प्रकार तेल से लिपटे पक्षी व समुद्री स्तनधारी की मृत्यु अतिताप (शरीर का  तापमान सामान्य स्तर से अधिक) के कारण हो सकती है।
  • विषाक्त:
    • इसके अलावा अंतर्ग्रहण तेल प्रभावित जानवरों के लिये विषाक्त हो सकता है और उनके आवास व प्रजनन दर को नुकसान पहुँचा सकता है।
  • मैंग्रोव के लिये खतरा:
    • खारे पानी के दलदल और मैंग्रोव अक्सर तेल रिसाव से पीड़ित होते हैं।

आर्थिक प्रभाव:

  • पर्यटन:
    • यदि समुद्र तटों और आबादी वाली तटरेखाओं को दूषित कर दिया जाता है, तो पर्यटन और वाणिज्य बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।
  • बिजली संयंत्र:
    • बिजली संयंत्र और अन्य उपयोगिताएँ जो समुद्र के पानी को खींचने या निकालने पर निर्भर करती हैं, तेल रिसाव से गंभीर रूप से प्रभावित होती हैं।
  • मछली पकड़ना: 
    • वाणिज्यिक उद्देश्य से मछली पकड़ने (Commercial Fishing) में कमी द्वारा तेल रिसाव की घटनाओं को रोका जा सकता है।

उपचार:

  • बायोरेमेडिएशन:
    • बायोरेमेडिएशन के ज़रिये समुद्र में फैले तेल को साफ करने के लिये बैक्टीरिया का इस्तेमाल किया जा सकता है। विशिष्ट जीवाणुओं का उपयोग हाइड्रोकार्बन जैसे विशिष्ट संदूषकों को बायोरेमेडिएट करने के लिये किया जा सकता है, जो तेल और गैसोलीन में मौजूद होते हैं।
    • पैरापरलुसीडिबाका, साइक्लोक्लास्टिकस, ओईस्पिरा, थैलासोलिटस ज़ोंंगशानिया और इसी प्रकार के अन्य बैक्टीरिया का उपयोग करने से कई प्रकार के दूषित पदार्थों को हटाने में मदद मिल सकती है।
  • कंटेनमेंट बूम्स
    • तेल के प्रसार को रोकने और इसकी रिकवरी, हटाने के लिये फ्लोटिंग बैरियर, जिन्हें ‘बूम’ के नाम से जाना जाता है, का उपयोग किया जा सकता है।
  • स्कीमर:
    • ये पानी की सतह पर मौजूद तेल को भौतिक रूप से अलग करने के लिये उपयोग किये जाने वाले उपकरण हैं।
  • सोरबेंट्स
    • विभिन्न प्रकार के सोरबेंट्स (जैसे- पुआल, ज्वालामुखी राख और पॉलिएस्टर-व्युत्पन्न प्लास्टिक की छीलन) जो पानी से तेल को अवशोषित करते हैं, का उपयोग किया जाता है।
  • डिस्पेरिंग एजेंट
    • ये ऐसे रसायन होते हैं, जिनमें तेल जैसे तरल पदार्थों को छोटी बूँदों में तोड़ने का काम करने वाले यौगिक मौजूद होते हैं। वे समुद्र में इसके प्राकृतिक फैलाव को तेज़ करते हैं।

भारत में संबंधित कानून:

  • वर्तमान में भारत में तेल रिसाव और इसके परिणामी पर्यावरणीय क्षति को कवर करने वाला कोई कानून नहीं है लेकिन ऐसी स्थितियों से निपटने हेतु भारत के पास वर्ष 1996 की राष्ट्रीय तेल रिसाव आपदा आकस्मिक योजना ( National Oil Spill Disaster Contingency Plan- NOS-DCP) है।
    • यह दस्तावेज़ रक्षा मंत्रालय द्वारा वर्ष 1996 में जारी किया गया था। इसे अंतिम बार मार्च 2006 में अपडेट किया गया।
    • यह भारतीय तटरक्षक बल को तेल रिसाव के सफाई कार्यों में सहायता के लिये  राज्य के विभागों, मंत्रालयों, बंदरगाह प्राधिकरणों और पर्यावरण एजेंसियों के साथ समन्वय करने का अधिकार देता है।
  • वर्ष 2015 में भारत ने बंकर तेल प्रदूषण क्षति, 2001 (बंकर कन्वेंशन) के लिये नागरिक दायित्व पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की पुष्टि की। कन्वेंशन तेल रिसाव से होने वाले नुकसान के लिये पर्याप्त, त्वरित और प्रभावी मुआवज़ा सुनिश्चित करता है।

स्रोत: डाउन टू अर्थ 

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