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उत्तर और दक्षिण कोरिया द्वारा कोरियाई युद्धविराम समझौते का उल्लंघन

  • 01 Jun 2020
  • 9 min read

प्रीलिम्स के लिये:

‘यूनाइटेड नेशंस कमांड, प्योंगयांग संयुक्त घोषणा

मेन्स के लिये:

कोरियाई सैन्य संघर्ष, वैश्विक शांति और संयुक्त राष्ट्र 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच ‘गैर-सैन्य क्षेत्र’ (Demilitarised Zone- DMZ) में दोनों पक्षों में हुई गोलीबारी की एक घटना के बाद ‘यूनाइटेड नेशंस  कमांड’ (United Nations Command- UNC) ने दोनों देशों को वर्ष 1953 के ‘कोरियाई युद्धविराम समझौते’ (Korean Armistice Agreement) के उल्लंघन का दोषी पाया है।

प्रमुख बिंदु:

  • दक्षिण कोरिया के अनुसार, 3 मई 2020 को उत्तर कोरियाई सैनिकों ने DMZ के पास उसकी सुरक्षा चौकियों पर गोलीबारी की, जिसके जवाब में दक्षिण कोरियाई सैनिकों ने चेतावनी के रूप में उत्तर कोरियाई चौकियों की तरफ कुछ गोलियाँ चलाई थीं।  
  • दक्षिण कोरिया ने इस मामले में उत्तर कोरिया को एक प्रसारण संदेश के द्वारा भी चेतावनी दी है कि गोलीबारी की यह घटना वर्ष 2018 के ‘अंतर कोरियाई सैन्य समझौते’ (Inter-Korean Military Agreement) का उल्लंघन है।
    • सितंबर, 2018 में उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता ‘किम जोंग उन’ (Kim Jong Un) और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ‘मून जेई-इन’ (Moon Jae-in) के बीच हुई एक बैठक के बाद ‘प्योंगयांग संयुक्त घोषणा’ (Pyongyang Joint Declaration) नामक एक समझौते पर हस्ताक्षर किये गए थे।
    • इस समझौते की एक शर्त के तहत दोनों पक्षों के बीच सैन्य तनाव कम करने की बात पर सहमति जाहिर की गई थी। 
  • लगभग ढाई वर्षों (2.5 Years) के बाद दोनों देशों के बीच हुई गोलीबारी की यह घटना उस युद्ध विराम समझौते का उल्लंघन है, जो वर्ष 1953 में कोरियाई युद्ध को रोकने में बहुत ही महत्त्वपूर्ण रहा था। 

गोलीबारी के पूर्व मामले और प्रतिक्रिया:

  • दक्षिण कोरिया के अनुसार, गोलीबारी की इस घटना के बाद वह मामले की जाँच कर रहा है और इस पर अधिक जानकारी के लिये उत्तर कोरिया को एक संदेश भी भेजा गया है। 
  • इस मामले में अभी तक उत्तर कोरिया के द्वारा अलग से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
  • इससे पहले दिसंबर, 2017 में इसी सीमा क्षेत्र में गोलीबारी की एक घटना देखी गई थी, जब एक उत्तर कोरियाई सैनिक ने अपने देश से भाग कर दक्षिण कोरिया में प्रवेश करने का प्रयास किया था।   
    • गौरतलब है कि उत्तर कोरिया की प्रशासनिक सख्ती और देश में मूलभूत सुविधाओं के अभाव में अक्सर आम लोग (और कई मामलों में सैनिक भी) देश से भाग कर अन्य देशों में शरण लेने का प्रयास करते है, साथ ही कुछ आरोपों के अनुसार, पकड़े जाने पर उत्तर कोरियाई प्रशासन द्वारा ऐसे लोगों को कठोर सजा दी जाती है। 
    • नवंबर, 2019 में उत्तर कोरिया से भागे एक सैनिक पर उत्तर कोरियाई सैन्य चौकियों से गोलीबारी की गई, जिसके बाद उस सैनिक को दक्षिण कोरिया में चिकित्सीय सहायता प्रदान की गई। 
  • जनवरी, 2016 में इसी सीमा पर दक्षिण कोरिया द्वारा उत्तर कोरिया के एक संदिग्ध ड्रोन पर भी गोलीबारी की गई थी।

यूनाइटेड नेशंस कमांड की जाँच:

  • यूनाइटेड नेशंस कमांड के अनुसार, इस मामले में दोनों ही देशों ने वर्ष 1953 के युद्ध विराम समझौते का उल्लंघन किया है।
  • उत्तर कोरिया को इस मामले में अधिक जानकारी साझा करने के लिये आमंत्रित किया गया था परंतु जाँच दल को उत्तर कोरिया की तरफ से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं प्राप्त हुई।   
  • हालाँकि जाँच दल यह स्पष्ट करने में सफल नहीं हो सका कि उत्तर कोरिया की तरफ से शुरू हुई गोलीबारी की यह घटना पूर्व नियोजित अथवा जानबूझकर की गई थी या नहीं।  
  • इस मामले में यूनाइटेड नेशंस कमांड की रिपोर्ट जारी होने के बाद दक्षिण कोरिया ने कहा कि वह इस रिपोर्ट और गोलीबारी में उत्तर कोरिया की भूमिका की समीक्षा के बगैर जाँच को बंद किये जाने से सहमत नहीं है।
  • साथ ही दक्षिण कोरिया ने अपनी जवाबी कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि वह निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत कार्य कर रहा था।

यूनाइटेड नेशंस कमांड:

  • यूनाइटेड नेशंस कमांड बहुराष्ट्रीय सैन्य बलों की एकीकृत कमान है। 
  • इसकी स्थापना जून, 1950 में संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations) के आग्रह पर दक्षिण कोरिया पर उत्तर कोरिया के हमले को रोकने हेतु की गई थी।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Security Council- UNSC) ने इस कमांड के नेतृत्व के लिये अमेरिका का नाम सुझाया था।
  • 29 अगस्त, 1950 को ब्रिटिश राष्ट्रमंडल की 27वीं ब्रिगेड इस सेना में शामिल हुई।
  • अमेरिका, कोरियाई गणतंत्र (दक्षिण कोरिया) और ब्रिटेन के अतिरिक्त इस कमांड में ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, कनाडा, कोलंबिया, इथियोपिया, फ्राँस, ग्रीस, लक्ज़मबर्ग, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, फिलीपींस, थाईलैंड तथा तुर्की के सैनिकों ने अपना योगदान दिया था।

कोरियाई युद्धविराम समझौता:

  • वर्ष 1953 का ‘कोरियाई युद्धविराम समझौता’ एक संघर्ष विराम समझौता था, हालाँकि यह दोनों देशों के बीच युद्धविराम की आधिकारिक घोषणा नहीं थी।
  • गौरतलब है कि दक्षिण कोरिया ने राष्ट्रपति ‘सिंग्मैन री’ (Syngman Rhee) के नेतृत्त्व में आधिकारिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किये थे। 
  • हालाँकि दिसंबर, 1991 में उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किये जिसके तहत दोनों देशों ने सीमा पर आक्रामकता न बढ़ाने पर सहमति जाहिर की।

युद्ध विराम समझौते का परिणाम:

  • युद्ध विराम समझौता लागू होने के बाद से कई मौकों पर दोनों देशों के द्वारा इस समझौते का उल्लंघन किया गया है, जिसके करण दोनों देशों के बीच सतत् रूप से तनाव की स्थिति बनी हुई है।
  • हालाँकि इन घटनाओं के बाद भी हाल के वर्षों में दोनों देशों के संबंधों में काफी सुधार हुआ है।

आगे की राह: 

  • उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा पर स्थित गैर-सैन्य क्षेत्र वर्तमान में विश्व के सबसे अधिक सक्रिय सैन्य बलों वाली सीमाओं में से एक है और कोरियाई युद्ध से लेकर आज तक इस सीमा पर तनाव की यह स्थिति संपूर्ण विश्व के लिये एक गंभीर चिंता का विषय रही है।
  • उत्तर कोरिया द्वारा हाल में किये गए मिसाइल परीक्षणों से यह तनाव और भी जटिल हो गया है ऐसे में कोरियाई देशों के बीच संघर्ष में वृद्धि वर्तमान वैश्विक स्थिरता के लिये एक बड़ा संकट खड़ा कर सकता है, अतः संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से विश्व के सभी देशों को कोरियाई संकट के शांतिपूर्ण समाधान के प्रयासों को मज़बूत करना चाहिये।    

स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस

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