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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

न्यू लूनर क्रेटर

  • 11 Mar 2022
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये:

प्रोजेक्ट प्लूटो, लूनर क्रेटर, अर्थ क्रेटर, चंद्रमा पर मित्र क्रेटर।

मेन्स के लिये:

स्पेस जंक, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी।

चर्चा में क्यों? 

हाल ही में एक अंतरिक्षयान (चांग'ई 5-टी 1 - चीन का एक चंद्र मिशन) का बचा हुआ टुकड़ा कथित तौर पर चंद्रमा की सतह से टकराया जिससे एक नए क्रेटर/गड्ढा निर्मित हो गया है इसके लगभग 65 फीट चौड़ा होने की संभावना है।

  • अंतरिक्ष मलबे (Space Junk) के अनजाने में चंद्रमा से टकराने का यह पहला दर्ज किया गया मामला है।
  • प्रोजेक्ट प्लूटो नामक पृथ्वी-आधारित टेलीस्कोप अवलोकनों का उपयोग करके इसकी गति, प्रक्षेपवक्र और प्रभाव के समय की गणना की गई।
  • प्रोजेक्ट प्लूटो  (Project Pluto) एक ऐसा ब्लॉग या वेबसाइट है जो पृथ्वी के पास से गुज़रने वाली वस्तुओं को ट्रैक करता है, जिसे अमेरिकी खगोलशास्त्री बिल ग्रे द्वारा निर्मित किया गया था। वह गाइड (Guide) नामक एक लोकप्रिय खगोल विज्ञान सॉफ्टवेयर के निर्माता भी हैं।

प्रमुख बिंदु 

अंतरिक्ष मलबा:

  • अंतरिक्ष मलबे के बारे में: अंतरिक्ष मलबा, जिसे अंतरिक्ष कबाड़ भी कहा जाता है, वह कृत्रिम सामग्री है जो पृथ्वी की परिक्रमा कर रही है लेकिन अब कार्यात्मक स्थिति में नहीं है।
    • यह सामग्री छोड़े गए रॉकेट चरणों जितनी बड़ी या एक चिप जितनी छोटी भी हो सकती है।
  • अवस्थिति: अधिकांश मलबा पृथ्वी की सतह के 2,000 किमी. के भीतर पृथ्वी की निचली कक्षा में पाया जाता है। हालांँकि कुछ मलबे की मात्रा भूमध्य रेखा से 35,786 किमी. ऊपर भूस्थैतिक कक्षा में भी पाई जा सकती है।
  • मुद्दा (केसलर सिंड्रोम): मुक्त तैरता हुआ अंतरिक्ष मलबा परिचालन उपग्रहों के लिये एक संभावित खतरा है और इससे टकराने से उपग्रह निष्क्रिय हो सकते हैं।
    • इसे केसलर सिंड्रोम के रूप में जाना जाता है, जिसका नाम वर्ष 1978 में नासा के वैज्ञानिक ‘डोनाल्ड केसलर’ के नाम पर रखा गया था।
    • यह कहता है कि यदि कक्षा में बहुत अधिक स्थान पर मलबा है तो इसके परिणामस्वरूप एक शृंखला प्रतिक्रिया हो सकती है, जहाँ अधिक-से-अधिक वस्तुएँ टकराएंगी और इस प्रक्रिया में नए अंतरिक्ष मलबा का निर्माण करेंगी।
  • समाधान: क्लियरस्पेस-1 (यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का) जो वर्ष 2025 में लॉन्च होने वाला है, कक्षा से मलबे को खत्म करने वाला पहला अंतरिक्ष मिशन होगा।

लूनर क्रेटर:

  • खगोलीय पिंडों की सतह पर अंतरिक्ष से किसी उल्कापिंड के गिरने, ज्वालामुखी फटने, भूगर्भ में विस्फोट या फिर अन्य किसी विस्फोटक ढंग से बनने वाले लगभग गोल आकार के विशाल गड्ढे को क्रेटर कहते हैं। लूनर क्रेटर्स लगभग 4.5 बिलियन वर्ष पहले पृथ्वी के बनने के कुछ समय बाद निर्मित होना शुरू हुए।
  • एक मील से भी कम दूरी से लेकर विशाल घाटियों तक हज़ारों लूनर क्रेटर हैं।
  • चंद्रमा पर सबसे बड़ा क्रेटर दक्षिणी ध्रुव ऐटकेन बेसिन कहलाता है।
  • चंद्रमा पर धूमकेतुओं और क्षुद्रग्रहों के टुकड़ों द्वारा क्रेटर का निर्माण हुआ है।
  • चंद्रमा पर पानी, वायुमंडल और टेक्टोनिक प्लेटों की कमी से थोड़ा क्षरण होता है और क्रेटर पाए जाते हैं जो दो अरब वर्ष से अधिक पुराने हैं।
  • चंद्रमा पर मित्र क्रेटर का नाम भारतीय रेडियो भौतिक विज्ञानी शिशिर कुमार मित्रा के नाम पर रखा गया है।

Crater

चंद्रमा और पृथ्वी पर क्रेटर में क्या अंतर है?

  • पृथ्वी और चंद्रमा दोनों अपने पूरे अस्तित्व के दौरान क्षुद्रग्रहों जैसी कई वस्तुओं से टकराए हैं, लेकिन चंद्रमा पर क्रेटर पृथ्वी की तुलना में अधिक स्थायी प्रकृति के हैं।
  • यह क्षरण, विवर्तनिकी और ज्वालामुखी जैसी प्रक्रियाओं के कारण होता है।
  • नासा के अनुसार, ये तीन प्रक्रियाएँ पृथ्वी की सतह को गड्ढा/क्रेटर मुक्त रखती हैं और अतीत में हुई टक्करों के निशान को हटाती हैं।
  • वर्तमान में पृथ्वी में 200 से कम ज्ञात क्रेटर हैं, जबकि चंद्रमा में हज़ारों क्रेटर हैं।
  • वायुमंडल की अनुपस्थिति का मतलब है कि चंद्रमा पर कोई हवा प्रणाली नहीं है और न ही कोई मौसमी घटनाएँ होती है, अतः मौजूदा क्रेटर के क्षरण का कोई कारण नहीं है।
  • टेक्टोनिक्स की अनुपस्थिति चंद्रमा की सतह को नई चट्टानों के निर्माण से रोकती है या मौजूदा सतह पैटर्न में बदलाव का कारण बनती है, जो कि पृथ्वी पर नहीं है।
  • अंततः ज्वालामुखी की अनुपस्थिति (हाल के इतिहास में) क्रेटर को कवर करना असंभव बना देती है।

विगत वर्षों के प्रश्न

सेलीन-1, लूनर ऑर्बिट मिशन निम्नलिखित में से किस एक से संबंधित है? (2008)

(a) चीन
(b) यूरोपियन यूनियन 
(c) जापान 
(d) यू.एस.ए.

उत्तर: (c)

स्रोत: द हिंदू

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