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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

अंतःविषयक साइबर-भौतिक प्रणालियों पर राष्ट्रीय मिशन

  • 17 Aug 2022
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये:

साइबर-भौतिक प्रणाली, प्रौद्योगिकी नवाचार हब, स्मार्ट सिटीज, सतत् विकास लक्ष्य (SDG)।

मेन्स के लिये:

अंतःविषयक साइबर-भौतिक प्रणालियों पर राष्ट्रीय मिशन के उद्देश्य और महत्त्व।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने अंतःविषयक साइबर-भौतिक प्रणालियों पर राष्ट्रीय मिशन (National Mission on Interdisciplinary Cyber-Physical Systems- NM-ICPS) के तहत संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं पर चर्चा करने हेतु कार्यशाला का आयोजन किया है।

  • कुल 35 संयुक्त परियोजनाओं की पहचान की गई है जिन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रौद्योगिकी नवाचार हब (TIH) और अनुसंधान संस्थानों द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा।
  • यह प्रयास साइबर-भौतिक प्रणाली (CPS) के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोगात्मक अनुसंधान और विकास हासिल करने में मदद करेगा।

साइबर-भौतिक प्रणाली (Cyber-Physical Systems)

  • परिचय:
    • साइबर-भौतिक प्रणालियाँ भौतिक वस्तुओं और बुनियादी ढाँचे में संवेदन, गणना, नियंत्रण और नेटवर्किंग को एकीकृत करती हैं तथा उन्हें इंटरनेट से एक-दूसरे जोड़ती हैं।
  • अनुप्रयोग: 
    • स्मार्ट सड़कों पर एक दूसरे के साथ सुरक्षित रूप से संचार करने वाली चालक रहित कारें,
  • स्वास्थ्य की बदलती परिस्थितियों का पता लगाने के लिये घर में सेंसर
    • कृषि पद्धतियों में सुधार और वैज्ञानिकों को जलवायु परिवर्तन आदि से उत्पन्न होने वाले मुद्दों के समाधान के लिये सक्षम बनाना।
  • महत्त्व:
    • साइबर-भौतिक प्रणालियों में प्रगति: क्षमता, अनुकूलन क्षमता, मापनीयता, लचीलापन, सुरक्षा और उपयोगिता को सक्षम करेगी जो आज के सरल एम्बेडेड सिस्टम से कहीं अधिक होगी।

राष्ट्रीय मिशन-अंतःविषय साइबर-भौतिक प्रणाली

  • परिचय:
    • इसे 2018 में विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा नए युग की प्रौद्योगिकियों में नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिये पांँच साल की अवधि के लिये 3,660.00 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ लॉन्च किया गया था।
    • इसमें संपूर्ण भारत शामिल है जिसमें केंद्रीय मंत्रालय, राज्य सरकारें, उद्योग और शिक्षाविद शामिल हैं।
  • लक्ष्य:
    • NM-ICPS एक व्यापक मिशन है जो साइबर फिजिकल सिस्टम (CPS) और संबंधित प्रौद्योगिकियों में प्रौद्योगिकी विकास, अनुप्रयोग विकास, मानव संसाधन विकास तथा कौशल वृद्धि, उद्यमिता एवं स्टार्ट-अप विकास को संबोधित करेगा।
    • मिशन का उद्देश्य 15 प्रौद्योगिकी नवाचार हब (TIH), छह अनुप्रयोग नवाचार केंद्र (AIH) और चार प्रौद्योगिकी अनुवाद अनुसंधान पार्क (TTRP) की स्थापना करना है।
    • ये हब और TTRP एक हब और स्पोक मॉडल में देश भर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक, अनुसंधान एवं विकास और अन्य संगठनों में समाधान विकसित करने में शिक्षाविदों, उद्योग, केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकार की सहायता करेंगे।
    • हब और TTRP में चार केंद्रित क्षेत्र हैं जिनके साथ इस मिशन का कार्यान्वयन किया जायेगा, इसमें शामिल हैं:
      • प्रौद्योगिकी विकास,
      • मानव संसाधन विकास और कौशल विकास,
      • नवाचार, उद्यमिता और स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र विकास और
      • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग।
  • महत्त्व:
    • CPS प्रौद्योगिकियाँ एक राष्ट्र की वैज्ञानिक, इंजीनियरिंग और तकनीकी रूप से नवीन क्षमताओं को आधुनिकता प्रदान करती हैं; ये सरकार के अन्य मिशनों का समर्थन कर औद्योगिक और आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता प्रदान करते हैं इसी क्रम में ये एक रणनीतिक संसाधन की भूमिका का निर्वहन करते हैं।
    • यह मिशन, विकास के एक इंजन के रूप में कार्य कर सकता है जो स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, पर्यावरण, कृषि, रणनीतिक सह-सुरक्षा और औद्योगिक क्षेत्रों, उद्योग 4.0, स्मार्ट सिटीज़, सतत् विकास लक्ष्यों (SDG) आदि में राष्ट्रीय पहलों को लाभान्वित करेगा।
    • CPS आगामी प्रौद्योगिकी की एक एकीकृत प्रणाली है, जिसे विकास की दौड़ में शामिल देशों द्वारा प्राथमिकता के आधार पर अपनाया जा रहा है। CPS वास्तव में संपूर्ण कौशल सेट आवश्यकताओं में एक आदर्श बदलाव लाएगा।
    • उद्योग/समाज की आवश्यकता के अनुसार उन्नत कौशल प्रदान करके और कुशल जनशक्ति पैदा करके मिशन के माध्यम से रोजगार के अवसरों को बढ़ाया जाएगा।

स्रोत: पी.आई.बी.

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