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भारतीय राजनीति

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग

  • 22 Mar 2022
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये:

एनसीएसटी, एसटी से संबंधित संवैधानिक प्रावधान।

मेन्स के लिये:

एनसीएसटी और उसके कार्य, अनुसूचित जनजाति।

चर्चा में क्यों? 

एक संसदीय समिति की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (National Commission for Scheduled Tribes-NCST) पिछले चार वर्षों से निष्क्रिय है तथा उसके द्वारा इन चार वर्षों में संसद (Parliament) के समक्ष एक भी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है।

प्रमुख बिंदु: 

NCST के बारे में: 

  • स्थापना: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की स्थापना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338 में संशोधन करके और संविधान (89वाँ संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा संविधान में एक नया अनुच्छेद 338A सम्मिलित कर की गई थी, अत: यह एक संवैधानिक निकाय है
  • उद्देश्य: अनुच्छेद 338A अन्य बातों के साथ-साथ NCST को संविधान के तहत या किसी अन्य कानून के तहत या सरकार को किसी अन्य आदेश के तहत STs को प्रदान किये गए विभिन्न सुरक्षा उपायों के कार्यान्वयन की निगरानी करने और ऐसे सुरक्षा उपायों के कामकाज का मूल्यांकन करने की शक्ति प्रदान करता है।
  • संरचना: इस आयोग में एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और तीन पूर्णकालिक सदस्य (एक महिला सदस्य सहित) शामिल हैं।
    • सदस्यों में कम-से-कम एक सदस्य महिला होनी चाहिये।
    • कार्यकारी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और NCST के सदस्यों का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से लेकर तीन वर्ष तक का होता है।
    • सदस्य दो से अधिक कार्यकाल के लिये नियुक्ति के पात्र नहीं होते हैं।
  • इस आयोग के अध्यक्ष को केंद्रीय कैबिनेट मंत्री तथा उपाध्यक्ष को राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त है, जबकि अन्य सदस्यों को भारत सरकार के सचिव पद का दर्जा दिया गया है।

NCST के कर्तव्य और कार्य:

  • NCST को संविधान के तहत या अन्य कानूनों के तहत या अनुसूचित जनजाति के लिये प्रदान किये गए सुरक्षा उपायों से संबंधित मामलों की जाँच एवं निगरानी का अधिकार है।
  • अनुसूचित जनजातियों को उनके अधिकारों और सुरक्षा उपायों से वंचित करने के संबंध में विशिष्ट शिकायतों की जाँच करना।
  • अनुसूचित जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास की योजना प्रक्रिया में भाग लेना और सलाह देना एवं उनके विकास की प्रगति का मूल्यांकन करना।
  • राष्ट्रपति को वार्षिक रूप से और ऐसे अन्य समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत करना जब आयोग उन सुरक्षा उपायों के कार्य पर रिपोर्ट देना उचित समझे।
  • अनुसूचित जनजातियों के संरक्षण, कल्याण और विकास तथा उन्नति के संबंध में ऐसे अन्य कार्यों का निर्वहन करना, जो राष्ट्रपति संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून के प्रावधानों के अधीन नियम द्वारा विनिर्दिष्ट करे।

NCST से संबंधित मुद्दे:

  • लंबित रिपोर्ट:
    • वित्तीय वर्ष 2021-22 में इसकी केवल चार बार बैठक हुई है। शिकायतों के समाधान और इसे प्राप्त होने वाले मामलों की लंबित दर भी 50% के करीब है।
  • जनशक्ति और बजटीय आवंटन में कमी:
    • समिति ने जनशक्ति और बजटीय कमी के साथ आयोग के कामकाज पर निराशा व्यक्त की।
    • आयोग में भर्ती, आवेदकों की कमी के कारण बाधित थी क्योंकि पात्रता को कई बार निर्धारित किया गया और कई उम्मीदवारों को आवेदन करने में सक्षम बनाने के लिये नियमों को बदल दिया गया था। 

पैनल की सिफारिशें:

  • रिक्तियों को तुरंत भरा जाना चाहिये। इसमें अब और देरी का कोई कारण नहीं है, क्योंकि भर्ती नियमों को उपयुक्त रूप से संशोधित किया गया है।
  • आयोग के लिये बजटीय आवंटन की समीक्षा करने की आवश्यकता है ताकि धन की कमी के कारण इसके कामकाज़ को नुकसान न पहुँचे।

भारत में अनुसूचित जनजातियों की स्थिति:

  • परिचय:
    • वर्ष 1931 की जनगणना के अनुसार, अनुसूचित जनजातियों को ‘बहिर्वेशित’ और ‘आंशिक रूप से बहिर्वेशित’ क्षेत्रों में ‘पिछड़ी जनजातियों’ के रूप में जाना जाता है। वर्ष 1935 के भारत सरकार अधिनियम के तहत पहली बार ‘पिछड़ी जनजातियों’ के प्रतिनिधियों को प्रांतीय विधानसभाओं में आमंत्रित किया गया।
    • संविधान अनुसूचित जनजातियों की मान्यता के मानदंडों को परिभाषित नहीं करता है और इसलिये वर्ष 1931 की जनगणना में निहित परिभाषा का उपयोग स्वतंत्रता के बाद के आरंभिक वर्षों में किया गया था।
    • हालाँकि संविधान का अनुच्छेद 366(25) अनुसूचित जनजातियों को परिभाषित करने के लिये प्रक्रिया निर्धारित करता है: “अनुसूचित जनजातियों का अर्थ ऐसी जनजातियों या जनजातीय समुदायों के अंदर कुछ वर्गों या समूहों से है, जिन्हें इस संविधान के उद्देश्यों के लिये अनुच्छेद 342 के तहत अनुसूचित जनजाति माना जाता है।”
      • 342(1): राष्ट्रपति किसी भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के संबंध में तथा जहाँ यह एक राज्य है, वहाँ के राज्यपाल के परामर्श के बाद एक सार्वजनिक अधिसूचना द्वारा उस राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के संबंध में जनजातियों या जनजातीय समुदायों या जनजातियों या जनजातीय समुदायों के समूहों को अनुसूचित जनजाति के रूप में निर्दिष्ट कर सकता है।
    • अब तक लगभग 705 से अधिक जनजातियाँ ऐसी हैं जिन्हें अधिसूचित किया गया है। सबसे अधिक संख्या में आदिवासी समुदाय ओडिशा में पाए जाते हैं।
  • कानूनी प्रावधान:
  • संबंधित पहल:
  • संबंधित समितियाँ:

Scheduled-Tribes

अनुच्छेद 244: खंड (1) पाँचवीं अनुसूची के प्रावधान असम, मेघालय, मिज़ोरम और त्रिपुरा राज्यों के अलावा किसी भी राज्य में अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन एवं नियंत्रण पर लागू होंगे, जो इस अनुच्छेद के खंड (2) के तहत छठी अनुसूची के अंतर्गत आते हैं।

334: आरक्षण के लिये 10 वर्ष की अवधि (अवधि बढ़ाने हेतु कई बार संशोधित)।

विगत वर्षों के प्रश्न

भारत के संविधान की पाँचवीं अनुसूची और छठी अनुसूची में किससे संबंधित प्रावधान हैं? (2015)

(a) अनुसूचित जनजातियों के हितों की रक्षा
(b) राज्यों के बीच सीमाओं का निर्धारण
(c) पंचायतों की शक्तियों, अधिकार और ज़िम्मेदारियों का निर्धारण
(d) सभी सीमावर्ती राज्यों के हितों की रक्षा

उत्तर: (a)

स्रोत: द हिंदू

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