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जनजातीय स्कूलों के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के लिये पहल

  • 20 May 2021
  • 7 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में जनजातीय मामलों के मंत्रालय (Ministry of Tribal Affairs) ने एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (Eklavya Model Residential School) और आश्रम (Ashram) जैसे स्कूलों में डिजिटलीकरण बढ़ाने हेतु माइक्रोसॉफ्ट के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये।

  • इसका उद्देश्य समावेशी, कौशल आधारित अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है।

प्रमुख बिंदु

समझौता ज्ञापन के विषय में:

  • माइक्रोसॉफ्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) सहित अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों को सभी ईएमआरएस स्कूलों में अंग्रेज़ी और हिंदी दोनों में आदिवासी छात्रों तथा शिक्षकों को हुनरमंद बनाने के लिये पाठ्यक्रम उपलब्ध कराएगा।
  • इस कार्यक्रम के तहत पहले चरण में 250 ईएमआरएस स्कूलों को माइक्रोसॉफ्ट ने गोद लिया है, जिसमें से 50 ईएमआरएस स्कूलों को गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा और पहले चरण में 500 मास्टर ट्रेनर्स (Master Trainer) को प्रशिक्षित किया जाएगा।
  • भारत में राज्यों के शिक्षकों को शिक्षण में ऑफिस 365 और एआई एप्लीकेशन जैसी उपयोगी तकनीकों का उपयोग करने के लिये चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षित किया जाएगा।
  • यह प्रोग्राम शिक्षकों को माइक्रोसॉफ्ट एजुकेशन सेंटर से पेशेवर ई-बैज और ई-सर्टिफिकेट अर्जित करने का अवसर भी प्रदान करेगा।
  • इन स्कूलों के छात्रों को उन परियोजनाओं पर सलाह दी जाएगी जिनमें सामाजिक कल्याण और संयुक्त राष्ट्र के सतत् विकास लक्ष्य (SDGs) के लिये एआई एप्लीकेशन शामिल हैं।

अपेक्षित लाभ:

  • यह कार्यक्रम सुनिश्चित करेगा कि आदिवासी छात्रों को अपना भविष्य, अपना पर्यावरण, अपना गाँव और समग्र समुदाय बदलने का मौका मिले।
  • यह पहल शिक्षकों के व्यावसायिक विकास को भी सक्षम बनाएगी, जिससे वे कक्षाओं में प्रौद्योगिकी का उपयोग कर सकेंगे।
  • यह डिजिटल इंडिया मिशन की सफलता में मदद करेगा।
  • यह प्रोग्राम आदिवासी छात्रों और अन्य लोगों के बीच की खाई को पाटने में सक्षम होगा।

आदिवासियों के लिये अन्य शैक्षिक योजनाएँ:

  • राजीव गांधी राष्ट्रीय फेलोशिप योजना: इस योजना को वर्ष 2005-2006 में अनुसूचित जनजाति समुदाय के छात्रों को उच्च शिक्षा हेतु प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।
  • जनजातीय क्षेत्रों में व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र: इस योजना का उद्देश्य अनुसूचित जनजाति के छात्रों की योग्यता और वर्तमान बाज़ार के रुझान के आधार पर उनके कौशल का विकास करना है।
  • राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति योजना: यह योजना पीएचडी और पोस्ट डॉक्टोरल अध्ययन के लिये विदेश में उच्च अध्ययन करने हेतु चुने गए 20 छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
  • प्री और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाएँ।

एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय

  • इस विद्यालय की शुरुआत वर्ष 1997-98 में दूरस्थ क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिये की गई थी।
  • ये स्कूल न केवल अकादमिक शिक्षा पर बल्कि छात्रों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
  • इसके अंतर्गत न केवल उन्हें उच्च एवं पेशेवर शैक्षिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से सार्वजनिक व निजी क्षेत्रों में रोज़गार हेतु सक्षम बनाने पर बल दिया जा रहा है, बल्कि गैर-अनुसूचित जनजाति की आबादी के समान शिक्षा के सर्वोत्तम अवसरों तक उनकी पहुँच सुनिश्चित करने के भी प्रयास किये जा रहे हैं।
  • राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में 480 छात्रों की क्षमता वाले EMRS की स्थापना भारतीय संविधान के अनुच्छेद-275 (1) के अंतर्गत अनुदान द्वारा विशेष क्षेत्र कार्यक्रम (Special Area Programme- SAP) के तहत की जा रही है।
  • इनका वित्तपोषण जनजातीय मामलों के मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
  • इसको गति देने के लिये यह निर्णय लिया गया है कि वर्ष 2022 तक 50 प्रतिशत से अधिक जनजातीय आबादी वाले प्रत्येक ब्लॉक तथा कम-से-कम 20,000 जनजातीय जनसंख्या वाले प्रखंडों में एक ईएमआरएस होगा।
  • एकलव्य विद्यालय लगभग नवोदय विद्यालय के समान होते हैं, जहाँ खेल तथा कौशल विकास में प्रशिक्षण प्रदान करने के अलावा स्थानीय कला एवं संस्कृति के संरक्षण के लिये विशेष सुविधाएँ उपलब्ध होती हैं।
    • इस योजना के अंतर्गत नवोदय विद्यालय समिति (Navodaya Vidyalaya Samiti) शिक्षा मंत्रालय के अधीन देश के प्रत्येक ज़िले में एक नवोदय विद्यालय की स्थापना की परिकल्पना करती है। 
    • ये आवासीय विद्यालय अनुसूचित जनजाति के बच्चों सहित सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के ग्रामीण प्रतिभाशाली बच्चों को अच्छी गुणवत्ता वाली आधुनिक शिक्षा प्रदान करते हैं।

आश्रम विद्यालय

  • आश्रम विद्यालय आवासीय विद्यालय होते हैं, जिनमें छात्रों को निःशुल्क रहने-खाने के साथ-साथ अन्य सुविधाएँ एवं प्रोत्साहन प्रदान किये जाते हैं।
  • यहाँ औपचारिक शिक्षा के अलावा ध्यान, दृष्टि-दर्शन, खेल, शारीरिक गतिविधियों आदि पर ज़ोर दिया जाता है।
  • इन विद्यालयों की निर्माण लागत जनजातीय कार्य मंत्रालय प्रदान करता है और इन विद्यालयों में शिक्षा के माध्यम के चयन सहित विद्यालयों के संचालन तथा समग्र रखरखाव के लिये राज्य सरकार ज़िम्मेदार होती है।
  • अब तक इस मंत्रालय ने जनजाति बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिये पूरे देश में 1,205 आश्रम विद्यालयों को वित्तपोषित किया है।

स्रोत: पी.आई.बी.

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