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भारत में छात्रवृत्ति योजनाएँ

  • 31 Aug 2020
  • 5 min read

प्रिलिम्स के लिये: 

भारत में छात्रवृत्ति योजनाएँ

मेन्स के लिये: 

भारत में छात्रवृत्ति योजनाओं से संबंधित मुद्दे

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, पंजाब में अनुसूचित जाति (Scheduled Castes-SC) के लिये पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में करोड़ों रुपए का घोटाला सामने आया है।

प्रमुख बिंदु:

  • केंद्र सरकार सभी मौजूदा छात्रवृत्ति योजनाओं को मिलाकर एक एकल राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना (Single National Scholarship Scheme) लाने की योजना बना रही है।
  • SCs के लिये पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति-
    • यह वर्ष 2006 में शुरू की गई एक केंद्र प्रायोजित योजना है। जिसे राज्य सरकार और केंद्र-शासित राज्यों के प्रशासन के माध्यम से लागू किया गया है।
    • यह योजना अनुसूचित जाति के छात्रों को अपनी शिक्षा पूरी करने के उद्देश्य से पोस्ट मैट्रिक या स्नातकोत्तर स्तर पर अध्ययन करने के लिये वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
    • यह छात्रवृत्ति केवल भारत में अध्ययन के लिये उपलब्ध है और यह उन छात्रों को प्रदान की जाती है, जिनके अभिभावकों की आय प्रति वर्ष 2,50,000 रूपए से कम है। 
  • एकल राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना-
    • केंद्र सरकार ‘पीएम यंग अचीवर्स स्कॉलरशिप अवार्ड योजना फॉर वाइब्रेंट इंडिया’ (PM Young Achievers Scholarship Award Scheme for Vibrant India-PM-YASASVI) नामक एक एकल राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना स्थापित करने पर विचार कर रही है, जिसमें सभी मौजूदा छात्रवृत्ति योजनाओं को शामिल कर दिया जाएगा।
  • लाभार्थी: 
    • अन्य पिछड़ा वर्ग (Other Backward Class (OBC), SCs, डिनोटिफाइड (Denotified), घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजाति (Nomadic and semi-Nomadic Tribe- DNT) तथा आर्थिक रूप से पिछड़ी जाति (Economically Backward Caste- EBC) श्रेणियों के छात्र राष्ट्रीय छात्रवृत्ति का लाभ उठा सकेंगे।
  • क्रियान्वयन एजेंसी: 
    • इस योजना का क्रियान्वयन सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment ) द्वारा एक योग्यता परीक्षा आयोजित कराके किया जाएगा।
  • एकल राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना के लाभ:
    • सरकार की छात्रवृत्ति योजना संबंधित जानकारी की पहुँच को बढ़ाने में मददगार।
    • देश भर में एक बुनियादी पाठ्यक्रम और शिक्षण मानकों को बनाए रखने के महत्त्व को बढ़ावा देना।
    • छात्रवृत्ति की गुणवत्ता और कार्यान्वयन में सुधार करने में सहायता करना।
  • शामिल मुद्दे:
    • यदि कोई छात्र छात्रवृत्ति की समय सीमा से चूक जाता है, तो उसे दूसरी छात्रवृत्ति के लिये आवेदन करने का दूसरा मौका नहीं मिलेगा।
    • राष्ट्रीय स्तर की छात्रवृत्ति परीक्षा छात्रों पर एक अतिरिक्त बोझ बन जाएगी।
    • छात्रवृत्ति हेतु योग्यता की पहचान के लिये अलग से परीक्षा आयोजित कराना निरर्थक है क्योंकि छात्रों पर पहले से ही बोर्ड परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं का बोझ है।
    • यदि मौजूदा प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं को बंद किया जाता है, तो इससे छात्रों की शिक्षा में बाधा आ सकती है।

आगे की राह:

  • PM-YASASVI के तहत एकल राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना तभी लाभकारी हो सकती है जब इसे सही तरीके से लागू किया जाए। 
    • सही कार्यान्वयन के बिना यह योजना भारत में छात्रों के लिये मदद के बजाय एक बाधा बन सकती है।
  • सरकार को इस नई छात्रवृत्ति योजना को विकसित करते हुए छात्रवृत्ति प्रदाता प्लेटफार्मों के अनुभव का लाभ उठाना चाहिये।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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