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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

मेकांग-लंकांग सहयोग

  • 05 Jul 2022
  • 10 min read

प्रिलिम्स के लिये:

मेकांग-लंकांग सहयोग, मेकांग नदी, पड़ोसी देश म्याँमार

मेन्स के लिये:

भारत और उसके पड़ोस, पड़ोसी देशों में चीन की उपस्थिति, अंतर्राष्ट्रीय समूहों का महत्त्व

चर्चा में क्यों?

वर्ष 2021 में म्यांँमार में सेना के सत्ता में आने के बाद हाल ही में वहाँ की सैन्य सरकार ने पहली उच्च स्तरीय क्षेत्रीय बैठक की मेज़बानी की।

 बैठक के बारे में:

  • बैठक में चीन के विदेश मंत्री और मेकांग डेल्टा देशों के समकक्ष शामिल हुए।
  • चीन के विदेश मंत्री ने मेकांग-लंकांग सहयोग समूह की बैठक में म्यांँमार, लाओस, थाईलैंड, कंबोडिया और वियतनाम के अपने समकक्षों के साथ बैठक की।
  • यह यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल, बागान के केंद्रीय शहर में आयोजित किया गया था।
  • बैठक का विषय "शांति और समृद्धि के लिये एकजुटता" था।

मेकांग-लंकांग सहयोग:

  • परिचय:
    • यह एक चीनी नेतृत्व वाली पहल है, इसमें मेकांग डेल्टा के देश शामिल हैं, जो जलविद्युत परियोजनाओं की बढ़ती संख्या के कारण बदलते नदी प्रवाह से क्षेत्रीय तनाव का एक संभावित स्रोत बने हुए हैं तथा पारिस्थितिक क्षति की चिंता को बढ़ा रहे हैं।
  • मुद्दे:
    • चीन ने मेकांग के ऊपरी हिस्से पर 10 बांँध बनाए हैं, इस हिस्से को वह लंकांग कहता है।
    • मेकांग नदी पर बांँधों के लिये चीन की आलोचना की जाती है जो जल स्तर और डाउनस्ट्रीम मत्स्य पालन को प्रभावित करते हैं तथा कई दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिये महत्त्वपूर्ण हैं।

Thailand

म्याँमार में सैन्य तख्तापलट:

  • परिचय:
    • नवंबर 2020 के संसदीय चुनाव में सू की की पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (NLD) ने बहुमत हासिल किया।
    • म्याँमार की संसद में सेना के पास वर्ष 2008 के सैन्य-मसौदे संविधान के अनुसार कुल सीटों का 25% हिस्सा है और कई प्रमुख मंत्री पद भी सैन्य नियुक्तियों के लिये आरक्षित हैं।
    • जब म्याँमार के नवनिर्वाचित सांसदों को वर्ष 2021 में संसद का पहला सत्र आयोजित करना था, तो सेना ने संसदीय चुनावों में मतदान के दौरान भारी धोखाधड़ी का हवाला देते हुए एक वर्ष के लिये आपातकाल लागू कर दिया।
  • तख्तापलट पर भारत की प्रतिक्रिया:
    • इस दौरान भारत ने म्याँमार में लोकतांत्रिक परिवर्तन की प्रक्रिया का समर्थन किया है।
    • यद्यपि भारत ने म्याँमार के हालिया घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की है, किंतु म्याँमार की सेना से अपने संबंध खराब करना एक व्यवहार्य विकल्प नहीं होगा, क्योंकि म्याँमार के साथ भारत के कई महत्त्वपूर्ण आर्थिक और सामरिक हित जुड़े हैं।

म्याँमार के साथ भारत के संबंध कैसे रहे हैं?

  • भारत के लिये म्याँमार का महत्त्व:
    • भारत के लिये म्याँमार भौगोलिक रूप से महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के भौगोलिक केंद्र में अवस्थित है।
    • म्याँमार एकमात्र दक्षिण-पूर्व एशियाई देश है जो पूर्वोत्तर भारत के साथ थल सीमा साझा करता है।
    • म्याँमार एकमात्र ऐसा देश है जो भारत की "नेबरहुड फर्स्ट नीति" और एक्ट ईस्ट नीति दोनों के लिये समान रूप से महत्त्वपूर्ण है।
    • सागर (SAGAR) नीति के तहत भारत ने म्याँमार के रखाईन प्रांत में सित्वे बंदरगाह को विकसित किया है।
    • ‘सित्वे’ (Sittwe) बंदरगाह को म्याँमार में चीन समर्थित ‘क्याउक्प्यू’ (Kyaukpyu) बंदरगाह के लिये भारत की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा सकता है, गौरतलब है कि क्याउक्प्यू बंदरगाह का उद्देश्य रखाईन प्रांत में चीन की भू-रणनीतिक पकड़ को मज़बूत करना है।
  • जिन परियोजनाओं में भारत शामिल है वे हैं:
    • 160 किलोमीटर लंबी तमू-कलेवा-कालेम्यो सड़क का उन्नयन और पुनर्जीवन।
    • म्याँमार के 32 शहरों में हाई-स्पीड डेटा लिंक के लिये एक असममित डिजिटल सब्सक्राइबर लाइन (ADSL) परियोजना पूरी हो गई है।
    • ONGC विदेश लिमिटेड (OVL), गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (GAIL) और एस्सार म्याँमार में ऊर्जा क्षेत्र में भागीदार हैं।
  • भारत और म्याँमार इनके सदस्य हैं:

बैठक को लेकर भारत की चिंता:

  • म्याँमार में चीन की उपस्थिति और चीन एवं म्याँमार के बीच बढ़ते संबंध भारत के लिये गहरी चिंता का विषय है क्योंकि भारत, म्याँमार के साथ 1600 किमी. की सीमा साझा करता है।
  • तख्तापलट के बाद से चीन-म्याँमार आर्थिक गलियारे के लिये महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं पर विशेष ध्यान देने के साथ म्याँमार पर चीन की आर्थिक पकड़ सख्त हो गई है।
  • इसके अलावा नवंबर 2021 में म्याँमार सीमा के पास असम राइफल्स के काफिले पर घातक हमला पूर्वोत्तर भारत में संकट उत्पन्न करने की चीन की बदनीयती का संकेत देती है।

आगे बढ़ने के लिये भारत का दृष्टिकोण क्या होना चाहिये?

  • सांस्कृतिक कूटनीति:
    • बौद्ध धर्म के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का लाभ म्याँमार के साथ संबंधों को मज़बूत करने के लिये उठाया जा सकता है।
    • भारत की "बौद्ध सर्किट" पहल, जिसका उद्देश्य भारत के विभिन्न राज्यों में प्राचीन बौद्ध विरासत स्थलों को जोड़कर भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या को दोगुना करना है, बौद्ध-बहुल म्याँमार के साथ प्रतिध्वनित होनी चाहिये।
    • यह म्यांँमार जैसे बौद्ध-बहुल देशों के साथ भारत के सद्भावना और विश्वास के राजनयिक संबंध का निर्माण भी कर सकता है।
  • रोहिंग्या मुद्दे का समाधान:
    • रोहिंग्या मुद्दे को जितनी जल्दी सुलझाया जाएगा भारत के लिये म्यांँमार और बांग्लादेश के साथ अपने संबंधों को प्रबंधित करना उतना ही आसान होगा, इसके लिये द्विपक्षीय एवं उपक्षेत्रीय आर्थिक सहयोग पर अधिक ध्यान केंद्रित करना होगा।
  • अन्य उपाय:
    • भारत को म्यांँमार में मौजूदा सरकार के साथ संबंध जारी रखना चाहिये जो दोनों देशों के लोगों के पारस्परिक विकास की दिशा में सहायक होगा।
    • इसे मौजूदा गतिरोध को हल करने में म्यांँमार की सहायता करने के लिये संवैधानिकता और संघवाद का अनुभव साझा करने का समर्थन करना चाहिये।

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्षों के प्रश्न (पीवाईक्यू):

प्रश्न. मेकांग-गंगा सहयोग जो कि छह देशों की एक पहल है, निम्नलिखित में से कौन-सा/से देश प्रतिभागी नहीं है/हैं? (2015)

  1. बांग्लादेश
  2. कंबोडिया
  3. चीन
  4. म्यांँमार
  5. थाईलैंड

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1
(b) केवल 2, 3 और 4
(c) केवल 1 और 3
(d) केवल 1, 2 और 5

उत्तर: (c)

व्याख्या :

  • मेकांग-गंगा सहयोग (MGC) पर्यटन, संस्कृति, शिक्षा, साथ ही परिवहन और संचार में सहयोग के लिये छह देशों- भारत और पाँच आसियान देशों, अर्थात् कंबोडिया, लाओस, म्याँमार, थाईलैंड और वियतनाम द्वारा संचालित एक पहल है। इसे वर्ष 2000 में लाओस के वियनतियाने (Vientiane) में प्रारंभ किया गया था।
  • गंगा और मेकांग दोनों ही नदियों में प्राचीन सभ्यताएँ पनपी हैं, अत: MGC पहल का उद्देश्य इन दो प्रमुख नदी घाटियों में बसे लोगों के बीच संपर्कों को सुविधाजनक बनाना है।
  • MGC वर्षों से सदस्य देशों के बीच विद्यमान सांस्कृतिक और वाणिज्यिक संबंधों का भी संकेत है।

अतः विकल्प C सही है।

स्रोत: द हिंदू

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