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सामाजिक न्याय

मिर्गी पर डब्ल्यू.एच.ओ. की रिपोर्ट

  • 22 Jun 2019
  • 5 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं गैर-सरकारी संगठनों, इंटरनेशनल लीग अगेंस्ट एपिलेप्सी (International League Against Epilepsy) और इंटरनेशनल ब्यूरों फॉर एपिलेप्सी (International Bureau for Epilepsy) ने संयुक्त रूप से शोध करके एक निष्कर्ष निकाला जिसे एपिलेप्सी, ए पब्लिक हेल्थ इंप्रेटिव (Epilepsy, a public health imperative) में प्रकाशित किया गया।

  • उल्लेखनीय है कि इस अध्ययन में पाया गया कि कम-आय वाले देशों में रहने वाले मिर्गी से ग्रस्त रोगियों को प्राथमिक उपचार भी नहीं मिल पाता। जिस कारण लोगो में समय से पहले मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। लोग इसे जीवन पर एक धब्बा भी मानते हैं।

प्रमुख बिंदु

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों के अनुसार, मिर्गी से ग्रस्त मरीजों के लिये उपचार न मिल पाना अस्वीकार्य रूप से बहुत अधिक है, हम जानते हैं कि यदि रोगी उचित दवाओं का सेवन करे तो 70 प्रतिशत लोग इस रोग से मुक्ति पा सकते है एवं इन दवाओं की कीमत 5 डॉलर प्रति वर्ष कम होती है तथा इन्हें प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों के माध्यम से वितरित किया जा सकता है।
  • मिर्गी से ग्रसित रोगियों में समय से पहले मृत्यु-दर तीन गुना अधिक होती है। निम्न और मध्यम आय वाले देशों में, मिर्गी रोगियों की मृत्यु-दर, उच्च आय वाले देशों की तुलना में काफी अधिक है।
  • मिर्गी से पीड़ित लगभग आधे वयस्कों में कम से कम एक अन्य स्वास्थ्य समस्या होती है। इसमें अवसाद और चिंता शामिल हैं: मिर्गी से पीड़ित 23% वयस्क ​​अवसाद (Depression) का अनुभव करते हैं और 20%व्यग्रता (Anxiety) का।
  • ये दौरे मानसिक स्वास्थ्य खराब करने के साथ ही जीवन की गुणवत्ता को कम कर सकते हैं। मिर्गी से ग्रस्त लगभग 30-40% बच्चों को विकास और सीखने जैसे कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, मिर्गी से ग्रसित लोगों को समाज में हीन भावना से देखा जाता है। इसी सामाजिक भय से लोग इसका उपचार नहीं करवाते हैं। मिर्गी के उपचार को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में एकीकृत किया जा सकता है। लेकिन इस कार्य के लिये राजनीतिक इच्छा शक्ति का होना आवश्यक है।

मिर्गी का प्रभाव

विश्व स्वास्थ्य संगठन

  • WHO संयुक्त राष्ट्र संघ की एक विशेष एजेंसी है, जिसका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) को बढ़ावा देना है।
  • इसकी स्थापना 7 अप्रैल, 1948 को हुई थी। इसका मुख्यालय जिनेवा (स्विट्ज़रलैंड) में अवस्थित है।
  • इसकी पूर्ववर्ती संस्था ‘स्वास्थ्य संगठन’ लीग ऑफ नेशंस की एजेंसी थी।

इंटरनेशनल लीग अगेंस्ट एपिलेप्सी (ILAE)

इंटरनेशनल लीग अगेंस्ट एपिलेप्सी (ILAE) की स्थापना 1909 में हुई थी और यह 100 से अधिक नेशनल चैप्टर्स का संगठन है।

उद्देश्य

  • मिर्गी के बारे में लोगों को जागरूक करना।
  • इसके इलाज़ के लिये अनुसंधान, शिक्षा और प्रशिक्षण को बढ़ावा देना।
  • विशेष रूप से रोकथाम, निदान और उपचार द्वारा रोगियों की सेवाओं और देखभाल में सुधार करना।

इंटरनेशनल ब्यूरो फॉर एपिलेप्सी (IBE)

  • इंटरनेशनल ब्यूरो फॉर एपिलेप्सी (IBE) मिर्गी से पीड़ित लोगों और उनकी देखभाल करने वाले लोगों के जीवन की सामाजिक स्थिति और गुणवत्ता में सुधार करता है।
  • IBE एक निगम है जो एक गैर-लाभकारी, कानूनी अंतर्राष्ट्रीय संगठन है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका के कोलंबिया राज्य में पंजीकृत है।

स्रोत: द हिंदू बिज़नेस लाइन

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