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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

भारत-संयुक्त अरब अमीरात संबंध

  • 16 Feb 2024
  • 21 min read

प्रिलिम्स के लिये:

भारत-संयुक्त अरब अमीरात संबंध, द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT), विदेशी प्रत्यक्ष निवेश(FDI), भारत-मध्य पूर्व आर्थिक गलियारा (IMEC)

मेन्स के लिये:

भारत-संयुक्त अरब अमीरात संबंध, भारत-संयुक्त अरब अमीरात संबंध का आर्थिक और रणनीतिक महत्त्व, द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने के उपाय

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने निवेश, विद्युत व्यापार और डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिये आठ समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं।

हस्ताक्षरित समझौते की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?

  • डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्मों को आपस में जोड़ना:
    • UPI और AANI की इंटरलिंकिंग:
    • घरेलू डेबिट/क्रेडिट कार्ड (RuPay और JAYWAN) को इंटरलिंक करना:
      • दोनों देशों ने घरेलू डेबिट/क्रेडिट कार्ड- RuPay (भारत) को JAYWAN (UAE) को आपस में जोड़ने हेतु समझौता किया।
      • यह वित्तीय क्षेत्र में सहयोग के निर्माण में एक महत्त्वपूर्ण कदम है और इससे संपूर्ण संयुक्त अरब अमीरात में RuPay की सार्वभौमिक स्वीकृति बढ़ेगी।
        • UAE का घरेलू कार्ड JAYWAN डिजिटल RuPay क्रेडिट और डेबिट कार्ड स्टैक पर आधारित है।
  • द्विपक्षीय निवेश संधि:
    • दोनों देशों ने द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) पर हस्ताक्षर किये। यह समझौता दोनों देशों में निवेश को और बढ़ावा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
    • भारत के बुनियादी ढाँचा क्षेत्र में UAE का निवेश महत्त्वपूर्ण रहा है।
      • वर्ष 2022-2023 में संयुक्त अरब अमीरात ने भारत में चौथे सबसे बड़े विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) निवेशक के रूप में योगदान किया। इसने भारत के बुनियादी ढाँचा क्षेत्र में 75 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई।
  • भारत-मध्य पूर्व आर्थिक गलियारे (IMEC) पर अंतर सरकारी ढाँचा समझौता:
    • इसका उद्देश्य भारत-संयुक्त अरब अमीरात सहयोग को बढ़ावा देना तथा क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को आगे बढ़ाने के लिये भारत और संयुक्त अरब अमीरात सहयोग को बढ़ाना है। IMEC की घोषणा सितंबर वर्ष 2023 में नई दिल्ली में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन के दौरान की गई थी।
  • ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग:
    • दोनों पक्षों ने इलेक्ट्रिकल इंटरकनेक्शन और व्यापार के क्षेत्र में सहयोग पर समझौता किया जो ऊर्जा सुरक्षा तथा ऊर्जा व्यापार सहित ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग के नए क्षेत्रों को उजागर करता है।
    • संयुक्त अरब अमीरात कच्चे तेल और LPG के सबसे बड़े स्रोतों में से एक है तथा भारत ने LNG के लिये दीर्घकालिक अनुबंध की योजना बनाई है।
  • सांस्कृतिक सहयोग:
    • दोनों देशों ने “दोनों देशों के राष्ट्रीय अभिलेखागार के बीच सहयोग प्रोटोकॉल” पर हस्ताक्षर किये यह प्रोटोकॉल अभिलेखीय सामग्री की बहाली और संरक्षण सहित इस क्षेत्र में व्यापक द्विपक्षीय सहयोग को आकार देगा।
    • विरासत और संग्रहालयों के क्षेत्र में सहयोग के लिये समझौता किया गया जिसका उद्देश्य लोथल, गुजरात में राष्‍ट्रीय समुद्री विरासत परिसर में सहयोग करना है।
  • BAPS मंदिर निर्माण के लिये आभार:
    • भारत ने अबू धाबी में BAPS मंदिर के निर्माण के लिये भूमि प्रदान करने में समर्थन के लिये संयुक्त अरब अमीरात को धन्यवाद दिया और मंदिर के निर्माण को संयुक्त अरब अमीरात-भारत मित्रता तथा सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक बताया।
  • पत्तन अवसंरचना विकास:
    • भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच पत्तन के बुनियादी ढाँचे तथा कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिये राइट्स (RITES) लिमिटेड एवं गुजरात मैरीटाइम बोर्ड ने अबू धाबी पोर्ट्स कंपनी के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किये।
  • भारत मार्ट:
    • भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा भारत मार्ट की आधारशिला रखी गई जो दुबई में जेबेल अली मुक्त व्यापार क्षेत्र में खुदरा, भंडारण और रसद सुविधाएँ प्रदान करेगा।
    • भारत मार्ट संभावित रूप से भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम क्षेत्रों को पश्चिम एशिया, खाड़ी, अफ्रीका तथा यूरेशिया में अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों तक पहुँचाने में एक मंच प्रदान करेगा जो उनके निर्यात को बढ़ावा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

BAPS मंदिर क्या है?

  • परिचय:
    • BAPS (बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था) मंदिर हिंदू धर्म के वैष्णव संप्रदाय स्वामीनारायण संप्रदाय से संबद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र हैं। 
      • स्वामीनारायण संप्रदाय का सिद्धांत भगवान स्वामीनारायण द्वारा दिया गया था जो पारंपरिक हिंदू ग्रंथों में निहित है।BAPS के पास दुनिया भर में लगभग 1,550 मंदिरों का नेटवर्क है, जिसमें नई दिल्ली और गांधीनगर में अक्षरधाम मंदिर तथा लंदन, ह्यूस्टन, शिकागो, अटलांटा, टोरंटो, लॉस एंजिल्स एवं नैरोबी में स्वामीनारायण मंदिर शामिल हैं।
  • विशेषताएँ:
    • पारंपरिक वास्तुकला: अबू धाबी मंदिर सात शिखरों वाला एक पारंपरिक पत्थर वाला हिंदू मंदिर है। पारंपरिक नागर शैली में निर्मित, मंदिर के सामने के पैनल में सार्वभौमिक मूल्यों, विभिन्न संस्कृतियों के सद्भाव की कहानियों, हिंदू आध्यात्मिक नेताओं और अवतारों को दर्शाया गया है। 
      • मंदिर की ऊँचाई 108 फीट, लंबाई 262 फीट और चौड़ाई 180 फीट है, जबकि बाहरी हिस्से में राजस्थान के गुलाबी बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया है, जबकि आंतरिक हिस्से में इतालवी संगमरमर का उपयोग किया गया है।
  • वास्तुशिल्प विशेषताएँ:
    • मंदिर में अलौह सामग्री (जो जंग का प्रतिरोध करती है) का उपयोग किया गया है।
    • जबकि मंदिर में कई अलग-अलग प्रकार के खंभे देखे जा सकते हैं जैसे गोलाकार और षट्कोणीय, वहीं एक विशेष स्तंभ है, जिसे 'स्तंभों का स्तंभ' कहा जाता है, जिसमें लगभग 1,400 छोटे खंभे उकेरे हुए हैं।
    • मंदिर में भारत के चारों कोनों के देवताओं को चित्रित किया गया है। इनमें भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान, भगवान शिव, पार्वती, गणपति, कार्तिकेय, भगवान जगन्नाथ, भगवान राधा-कृष्ण, अक्षर-पुरुषोत्तम महाराज (भगवान स्वामीनारायण और गुणातीतानंद स्वामी), तिरुपति बालाजी तथा पद्मावती एवं भगवान अयप्पा शामिल हैं।
    • भारतीय सभ्यता की 15 मूल्यवान कहानियों के अलावा, माया सभ्यता, एज़्टेक सभ्यता, मिस्र की सभ्यता, अरबी सभ्यता, यूरोपीय सभ्यता, चीनी सभ्यता और अफ्रीकी सभ्यता की कहानियों को चित्रित किया गया है।

भारत-संयुक्त अरब अमीरात के द्विपक्षीय संबंध:

  • परिचय:
    • भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने वर्ष 1972 में राजनयिक संबंध स्थापित किये।
    • द्विपक्षीय संबंधों को तब और अधिक बढ़ावा मिला जब अगस्त 2015 में भारत के प्रधानमंत्री की संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा ने दोनों देशों के बीच एक नई रणनीतिक साझेदारी की नींव रखी।
    • इसके अलावा, जनवरी 2017 में भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस की भारत यात्रा के दौरान यह सहमति हुई कि द्विपक्षीय संबंधों को एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी में उन्नत किया जाएगा।
  • आर्थिक संबंध:
    • भारत और UAE के बीच आर्थिक साझेदारी विकसित हुई है, वर्ष 2022-23 में द्विपक्षीय व्यापार 85 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया है। संयुक्त अरब अमीरात भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है।
      • इसका उद्देश्य पाँच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापारिक व्यापार को 100 बिलियन अमरीकी डालर से ऊपर और सेवा व्यापार को 15 बिलियन अमरीकी डालर तक बढ़ाना है।
    • अनेक भारतीय कंपनियों ने संयुक्त अरब अमीरात में सीमेंट, निर्माण सामग्री, कपड़ा, इंजीनियरिंग उत्पाद, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं आदि के लिये संयुक्त उद्यम के रूप में या विशेष आर्थिक क्षेत्रों में विनिर्माण इकाइयाँ स्थापित की हैं।
    • भारत की संशोधित FTA रणनीति के तहत, सरकार ने निपटने के लिये कम-से-कम छह देशों/क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है, जिसमें अर्ली हार्वेस्टिंग डील (या अंतरिम व्यापार समझौते) के लिये संयुक्त अरब अमीरात सूची में सबसे ऊपर है, अन्य ब्रिटेन और यूरोपियन संघ हैं। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, इज़राइल और खाड़ी सहयोग परिषद (Gulf Cooperation Council - GCC) में देशों का एक समूह।
      • UAE ने भी भारत और सात अन्य देशों (ब्रिटेन, तुर्की, दक्षिण कोरिया, इथियोपिया, इंडोनेशिया, इज़राइल और केन्या) के साथ द्विपक्षीय आर्थिक समझौतों को आगे बढ़ाने के अपने इरादे की घोषणा की थी।
  • सांस्कृतिक संबंध:
    • संयुक्त अरब अमीरात 3.3 मिलियन से अधिक भारतीयों का घर है और अमीराती भारतीय संस्कृति से अच्छी तरह परिचित हैं तथा इसके प्रति नरम स्वभाव हैं। भारत ने अबू धाबी अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेला 2019 में सम्मानित अतिथि देश के रूप में भाग लिया।
    • भारतीय सिनेमा/टी.वी./रेडियो चैनल आसानी से उपलब्ध हैं और इनकी दर्शक संख्या अच्छी है; संयुक्त अरब अमीरात के प्रमुख थिएटर/सिनेमा हॉल व्यावसायिक हिंदी, मलयालम तथा तमिल फिल्में दिखाते हैं।
    • अमीराती समुदाय हमारे वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रमों में भी भाग लेता है और संयुक्त अरब अमीरात में योग तथा ध्यान केंद्रों के विभिन्न स्कूल सफलतापूर्वक चल रहे हैं।
  • फिनटेक सहयोग:
    • अगस्त 2019 से UAE में रुपे कार्ड की स्वीकृति और रुपया-दिरहम निपटान प्रणाली के संचालन जैसी पहल डिजिटल भुगतान प्रणालियों में पारस्परिक अभिसरण को प्रदर्शित करती है।
      • भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच लेनदेन के लिये स्थानीय मुद्राओं के उपयोग की रूपरेखा का उद्देश्य स्थानीय मुद्रा निपटान प्रणाली (Local Currency Settlement System - LCSS) स्थापित करना है।
      • RBI के अनुसार, LCSS के निर्माण से निर्यातकों और आयातकों को अपनी संबंधित घरेलू मुद्राओं में चालान तथा भुगतान करने में सक्षम बनाया जाएगा, जो बदले में एक INR-AED (संयुक्त अरब अमीरात दिरहम) विदेशी मुद्रा बाज़ार के विकास को सक्षम करेगा।
  • ऊर्जा सुरक्षा सहयोग:
    • संयुक्त अरब अमीरात भारत की ऊर्जा सुरक्षा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है, भारत के मंगलुरु में सामरिक तेल भंडार (strategic oil reserves) संग्रहित सुविधा है।
  • सामरिक क्षेत्रीय सहभागिता:

भारत-UAE संबंधों में क्या चुनौतियाँ हैं?

  • व्यापार बाधाएँ भारतीय निर्यात को प्रभावित कर रही हैं:
    • गैर-टैरिफ बाधाएँ जैसे स्वच्छता और फाइटोसैनिटरी (Sanitary and Phytosanitary- SPS) उपाय तथा व्यापार में तकनीकी बाधाएँ (Technical Barriers to Trade - TBT) विशेष रूप से अनिवार्य हलाल प्रामाणीकरण ने विशेष रूप से पोल्ट्री, माँस एवं प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों जैसे क्षेत्रों में भारतीय निर्यात को बाधित किया है।
      • भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन बाधाओं के कारण हाल के वर्षों में संयुक्त अरब अमीरात को प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात में लगभग 30% की उल्लेखनीय गिरावट आई है।
  • संयुक्त अरब अमीरात में चीनी आर्थिक प्रभाव:
    • चीन की "चेक बुक डिप्लोमेसी", जो कम ब्याज वाले ऋण के प्रस्ताव की विशेषता है, ने संयुक्त अरब अमीरात और मध्य-पूर्व में भारतीय आर्थिक प्रयासों को प्रभावित किया है।
  • कफाला प्रणाली की चुनौतियाँ:
    • संयुक्त अरब अमीरात की कफाला प्रणाली नियोक्ताओं को आप्रवासी मज़दूरों, विशेषकर अल्प वेतन वाले रोज़गार में नियोजित श्रमिकों के संबंध में अनुचित अधिकार प्रदान करती है जो मानवाधिकारों के उल्लंघन संबंधी चिंताएँ प्रस्तुत करती है।
      • इस प्रणाली के तहत प्रवासी श्रमिकों को पासपोर्ट ज़ब्त होने, वेतन मिलने में देरी और दयनीय जीवन-यापन की स्थिति जैसे परिणामों का सामना करना पड़ता है।
  • संयुक्त अरब अमीरात द्वारा पाकिस्तान को प्रदत्त वित्तीय सहायता संबंधी चिंताएँ:
    • पाकिस्तान को UAE द्वारा पर्याप्त वित्तीय सहायता इन फंडों के संभावित दुरुपयोग के बारे में आशंका उत्पन्न करती है क्योंकि पाकिस्तान प्राप्त वित्तीय सहायता को भारत के विरुद्ध सीमा पार आतंकवाद को प्रायोजित करने के लिये इस्तेमाल करता रहा है। 
  • क्षेत्रीय संघर्षों के बीच राजनयिक संतुलन:
    • ईरान और अरब देशों, विशेषकर संयुक्त अरब अमीरात के बीच चल रहे संघर्ष के कारण भारत को राजनयिक संतुलन स्थापित करने में मुश्किल का सामना करना पड़ता है।
    • इज़रायल और हमास के बीच जारी संघर्षों ने इन चुनौतियों को और बढ़ा दिया है क्योंकि इसके परिणामस्वरूप प्रस्तावित IMEC प्रभावित हो सकता है।

आगे की राह

  • भारत और UAE को गैर-प्रशुल्क प्रतिबंधों का समाधान करने के लिये मिलकर कार्य करना चाहिये जो भारतीय, विशेषकर प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ जैसे क्षेत्रों में, निर्यात को बाधित करते हैं। दोनों देशों को नियमों को सुव्यवस्थित करने और सुचारू व्यापार को सुविधाजनक बनाने के लिये विचार विमर्श करना चाहिये।
  • संयुक्त अरब अमीरात के प्रमुख क्षेत्रों में निवेश में वृद्धि कर और संयुक्त उद्यमों तथा साझेदारी के अवसरों की खोज कर भारत अपना आर्थिक प्रभुत्व बढ़ा सकता है। अनुकूल व्यावसायिक परिवेश को बढ़ावा देने और उद्यमिता को प्रोत्साहन प्रदान करने से अधिक भारतीय व्यवसायों को संयुक्त अरब अमीरात में आकर्षित किया जा सकता है।
  • भारत और UAE पारदर्शिता, स्थिरता तथा निष्पक्ष व्यापार प्रथाओं को बढ़ावा देकर संबद्ध क्षेत्र में चीनी आर्थिक प्रभाव का मुकाबला करने के लिये सहयोग कर सकते हैं।
  • दोनों देशों को कफाला प्रणाली में सुधार के साथ-साथ संयुक्त अरब अमीरात में प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों और कल्याण में सुधार की दिशा में कार्य करना चाहिये जिससे उचित वेतन, गारिमामय जीवन तथा श्रमिकों के अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित होगा।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स: 

प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन 'खाड़ी सहयोग परिषद' (गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल) का सदस्य नहीं है? (2016)

(a) ईरान
(b) ओमान
(c) सऊदी अरब
(d) कुवैत

उत्तर: (a)


मेन्स:

प्रश्न: डिजिटल मीडिया के माध्यम से धार्मिक मतारोपण का परिणाम भारतीय युवकों का आई.एस.आई.एस. में शामिल हो जाना रहा है। आई.एस.आई.एस. क्या है और उसका ध्येय (लक्ष्य) क्या है? आई.एस.आई.एस. हमारे देश की आंतरिक सुरक्षा के लिये किस प्रकार खतरनाक हो सकता है? (2015)

प्रश्न. भारत की ऊर्जा सुरक्षा का प्रश्न भारत की आर्थिक प्रगति का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण भाग है। पश्चिम एशियाई देशों के साथ भारत के ऊर्जा नीति सहयोग का विश्लेषण कीजिये। (2017)

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