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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

भारत-मालदीव संबंध

  • 09 Oct 2023
  • 14 min read

प्रिलिम्स के लिये:

मालदीव, बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव, हिंद महासागर, चीन, ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट

मेन्स के लिये:

चीन के भारत विरोधी रुख को रोकने के लिये हिंद महासागर में भारत के लिये मालदीव का सामरिक महत्त्व

स्रोत: इंडियन एक्स्प्रेस

चर्चा में क्यों? 

भारत के दक्षिण में हिंद महासागर क्षेत्र में स्थित मालदीव में देश के अगले राष्ट्रपति के रूप में एक चीनी समर्थक उम्मीदवार का चयन भारत के लिये चिंता का विषय है। 

  • ऐतिहासिक रूप से मालदीव में वर्ष 1968 से एक कार्यकारी राष्ट्रपति प्रणाली थी, जो वर्ष 2008 में बहुदलीय लोकतंत्र में परिवर्तित हो गई। तब से कोई भी राष्ट्रपति, जो वर्तमान में पद पर है, दोबारा निर्वाचित नहीं हुआ है। इस बार यह स्थिति भारत के लिये चिंतनीय हो गई है। 

नोट: मालदीव की चुनावी प्रणाली फ्राँस के समान है, जहाँ विजेता को 50% से अधिक वोट हासिल करने होते हैं। यदि पहले राउंड में कोई भी इस आँकड़े को पार नहीं कर पाता है, तो चुनाव का फैसला दूसरे राउंड में शीर्ष दो उम्मीदवारों द्वारा प्राप्त किये गए वोटों के आधार पर किया जाता है।

भारत और मालदीव के संबंधों का इतिहास:

  • रक्षा क्षेत्र में साझेदारी:
    • दोनों देशों के बीच "एकुवेरिन," "दोस्ती," "एकथा," और "ऑपरेशन शील्ड" (जो वर्ष 2021 में शुरू हुआ) जैसे रक्षा सहयोग अभ्यास शामिल हैं।
    • भारत मालदीव के राष्ट्रीय रक्षा बल (MNDF) के लिये सबसे बड़ी संख्या में प्रशिक्षण प्रदान करता है, जो उनकी लगभग 70% रक्षा प्रशिक्षण आवश्यकताओं को पूरा करता है।
  • पुनर्वास केंद्र:
    • भारत तथा मालदीव ने अड्डू पुनर्ग्रहण और तट संरक्षण परियोजना के लिये एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किये हैं।
    • अड्डू में भारत की सहायता से एक ड्रग डिटॉक्सिफिकेशन और पुनर्वास केंद्र तैयार किया गया है।
    • यह केंद्र स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, मत्स्य पालन, पर्यटन, खेल और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में भारत द्वारा कार्यान्वित की जा रही 20 उच्च प्रभाव वाली सामुदायिक विकास परियोजनाओं में से एक है।
  • आर्थिक सहयोग:
    • पर्यटन मालदीव की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। यह देश अनेकों भारतीयों के लिये एक प्रमुख पर्यटन स्थल और अन्य के लिये रोज़गार का गंतव्य बन गया है।
    • अगस्त 2021 में एक भारतीय कंपनी, एफकॉन्स (Afcons) ने मालदीव में अब तक की सबसे बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजना के लिये एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किये, जो ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट (GMCP) है।
    • भारत 2021 में मालदीव का तीसरा सबसे बड़ा व्यापरिक भागीदार बनकर उभरा है।
    • 22 जुलाई, 2019 को RBI और मालदीव मौद्रिक प्राधिकरण के बीच एक द्विपक्षीय USD मुद्रा स्वैप समझौते पर हस्ताक्षर किये गए।
    • भारत-मालदीव संबंधों को तब क्षति पहुँची जब मालदीव ने वर्ष 2017 में चीन के साथ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) किया।

  • मूलढाँचा परियोजनाएँ:
    • भारतीय क्रेडिट लाइन के तहत हनीमाधू अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा विकास परियोजना के तहत एक वर्ष में 1.3 मिलियन यात्रियों को सेवा प्रदान करने के लिये एक नया टर्मिनल जोड़ा जाएगा
    • वर्ष 2022 में भारत के विदेश मंत्री द्वारा मालदीव में नेशनल कॉलेज फॉर पुलिसिंग एंड लॉ एनफोर्समेंट (NCPLE) का उद्घाटन किया गया।
      • NCPLE मालदीव में भारत द्वारा क्रियान्वित सबसे बड़ी अनुदान परियोजना है।
  • ग्रेटर मेल कनेक्टिविटी परियोजना:
    • इसमें 6.74 किमी लंबा पुल और माले एवं इसके आसपास के विलिंगली, गुलहिफाल्हू व थिलाफुशी द्वीपों के बीच कॉज़वे लिंक शामिल होगा। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग किया जाएगा।
      • इस परियोजना को भारत से 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर के अनुदान और 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर की क्रेडिट लाइन (LOC) द्वारा वित्तपोषित किया गया है।
    • यह न केवल भारत द्वारा मालदीव में कार्यान्वित की जा रही सबसे बड़ी परियोजना है, बल्कि कुल मिलाकर मालदीव में सबसे बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजना भी है।

मालदीव में विभिन्न ऑपरेशन:

  • ऑपरेशन कैक्टस 1988: ऑपरेशन कैक्टस के तहत भारतीय सशस्त्र बलों ने तख्तापलट की कोशिश को नाकाम करने में मालदीव सरकार की मदद की है।
  • ऑपरेशन नीर 2014: ऑपरेशन नीर (Operation Neer) के तहत भारत ने पेयजल संकट से निपटने के लिये मालदीव को पेयजल की आपूर्ति की।  
  • ऑपरेशन संजीवनी: भारत ने मालदीव को ऑपरेशन संजीवनी के तहत COVID-19 से निपटने के लिये सहायता के रूप में 6.2 टन आवश्यक दवाओं की आपूर्ति की।

भारत-मालदीव संबंधों में चीन का मुद्दा:

  • चीनी अवसंरचना निवेश:
    • मालदीव हिंद महासागर क्षेत्र के कई अन्य देशों की तरह बुनियादी ढाँचे हेतु चीनी निवेश प्राप्तकर्ता रहा है।
    • मालदीव में बड़े पैमाने पर चीन ने निवेश किया है और वह चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) में भागीदार बन गया है। चीन ने "स्ट्रिंग ऑफ द पर्ल्स" पहल के हिस्से के रूप में मालदीव में बंदरगाहों, हवाई अड्डों, पुलों और अन्य महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे के विकास सहित विभिन्न परियोजनाओं के वित्तपोषण एवं निर्माण में भूमिका निभाई है।
  • मैत्रीपूर्ण संबंधों में बदलाव:
    • चीन समर्थक रुख के कारण मालदीव की पारंपरिक विदेश नीति में बदलाव आया, जो पूर्व में भारत की ओर अधिक झुकी हुई थी। इस बदलाव ने भारत में अपने निकटतम पड़ोसी देशों में चीन के बढ़ते प्रभाव और उसके संभावित रणनीतिक प्रभावों को लेकर आशंका उत्पन्न की है।
  • भारत की चिंताएँ:
    • भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र, विशेषकर श्रीलंका, पाकिस्तान तथा मालदीव जैसे देशों में चीन की बढ़ती उपस्थिति पर चिंता व्यक्त की है। इन क्षेत्रों में चीनी-नियंत्रित बंदरगाहों एवं सैन्य सुविधाओं के विकास को भारत के रणनीतिक हितों व क्षेत्रीय सुरक्षा के लिये एक चुनौती के रूप में देखा गया है।
  • भारत के प्रत्युपाय:
    • भारत ने मालदीव और अन्य हिंद महासागर देशों के साथ अपने राजनयिक व रणनीतिक संबंधों को मज़बूत किया है। इसने संबद्ध क्षेत्र में अपने व्यापक प्रभाव के लिये आर्थिक सहायता प्रदान की है, आधारभूत अवसंरचना परियोजनाएँ शुरू की हैं एवं रक्षा सहयोग का विस्तार किया है।
    • भारत की "नेबरहुड फर्स्ट" नीति का उद्देश्य पड़ोसी देशों में चीन की बढ़ती उपस्थिति को संतुलित करना है।
  • राजनीतिक विकास:
    • वर्ष 2018 में इब्राहिम मोहम्मद सोलिह (जिनका झुकाव भारत के प्रति अधिक देखा जाता है) के राष्ट्रपति चुने जाने के साथ मालदीव की विदेश नीति में पुनः भारत के प्रति सकारात्मक बदलाव देखा गया। सोलिह की सरकार ने भारत के साथ पारंपरिक संबंधों को बनाए रखते हुए भारत और चीन के बीच संबंधों को संतुलित करने का प्रयास किया।
  • सामरिक महत्त्व:
    • प्रमुख समुद्री मार्गों के साथ हिंद महासागर में मालदीव की रणनीतिक स्थिति, इसे भारत और चीन दोनों के लिये रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण बनाती है। परिणामस्वरूप दोनों देश संभवतः मालदीव की घटनाओं पर कड़ी नज़र रखेंगे तथा वहाँ अपना प्रभाव स्थापित करने हेतु प्रयासरत रहेंगे।

मालदीव की अवस्थिति:

  • मालदीव, हिंद महासागर में स्थित एक टोल गेट: इस द्वीप शृंखला के दक्षिणी और उत्तरी हिस्सों में संचार के दो महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्ग (SLOCs) स्थित हैं।
  • ये SLOCs पश्चिम एशिया में अदन की खाड़ी तथा होर्मुज़ की खाड़ी एवं दक्षिण-पूर्व एशिया में मलक्का जलसंधि के बीच समुद्री व्यापार के लिये प्रमुख हैं।
  • इसकी भौतिक अवस्थिति में मुख्य रूप से प्रवाल भित्ति और एटोल शामिल हैं तथा अधिकांश क्षेत्र विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zones- EEZs) के अंतर्गत आते हैं।
  • मालदीव मुख्य रूप से निचले द्वीपों का एक द्वीपसमूह है, जो बढ़ते समुद्री जलस्तर के कारण खतरे में पड़ गया है।  
  • आठ डिग्री चैनल भारतीय मिनिकॉय (लक्षद्वीप द्वीप समूह का हिस्सा) को मालदीव से अलग करता है।

आगे की राह 

  • दक्षिण एशिया और आसपास की समुद्री सीमाओं में क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये भारत को हिंद-प्रशांत सुरक्षा क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिये
  • हिंद-प्रशांत सुरक्षा क्षेत्र को भारत के समुद्री प्रभाव क्षेत्र में अतिरिक्त-क्षेत्रीय शक्तियों (विशेष रूप से चीन) की वृद्धि की प्रतिक्रिया के रूप में विकसित किया गया है।
  • वर्तमान में 'इंडिया आउट' अभियान को सीमित आबादी का समर्थन प्राप्त है लेकिन इसे भारत सरकार द्वारा कम नहीं आँका जा सकता है।
    • यदि 'इंडिया आउट' के समर्थकों द्वारा उठाए गए मुद्दों का समाधान सावधानी के साथ नहीं किया गया, तो मालदीव में घरेलू राजनीतिक स्थिति इस देश के साथ भारत के वर्तमान अनुकूल संबंधों में बाधा उत्पन्न कर सकती है।
  • भारत को अपने पड़ोसी देशो के संबंध में बहु-ध्रुवीय और नियम-आधारित विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने की अपनी पुरानी परंपरा को ध्यान में रखते हुए एक उदार रुख अपनाना चाहिये।
  • प्रोजेक्ट मौसम को मालदीव को इससे लाभ प्राप्त करने और भारत पर उसकी आर्थिक और ढाँचागत निर्भरता को बढ़ाने के लिये पर्याप्त स्थान प्रदान किया जाना चाहिये।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स:

प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन-सा द्वीप युग्म 'दस डिग्री चैनल' द्वारा एक-दूसरे से विभाजित होता है? (2014)

(a) अंडमान और निकोबार
(b) निकोबार और सुमात्रा
(c) मालदीव और लक्षद्वीप
(d) सुमात्रा और जावा

उत्तर: (A)


मेन्स:

प्रश्न. 'द स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' नीति से आप क्या समझते हैं? यह भारत को कैसे प्रभावित करती है? इसका मुकाबला करने के लिये भारत द्वारा उठाए गए कदमों का संक्षेप में वर्णन कीजिये। (2013) 

प्रश्न. पिछले दो वर्षों में मालदीव में राजनीतिक विकास पर चर्चा कीजिये। क्या वे भारत के लिये चिंता का कोई कारण हो सकते हैं? (2013)

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