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भारत का पहला गैस एक्सचेंज

  • 16 Jun 2020
  • 8 min read

प्रीलिम्स के लिये:

इंडियन गैस एक्सचेंज के बारे में, तरलीकृत प्राकृतिक गैस 

मेन्स के लिये:

‘इंडियन गैस एक्सचेंज’ की कार्य प्रणाली एवं ऊर्जा क्षेत्र में इसका महत्त्व 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ‘पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय’ (Ministry of Petroleum & Natural Gas) द्वारा एक ई-समारोह के माध्यम से भारत के प्रथम राष्‍ट्रव्यापी ऑनलाइन वितरण-आधारित गैस ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, ‘इंडियन गैस एक्सचेंज’ (Indian Gas Exchange- IGX) का शुभारंभ किया गया है।

प्रमुख बिंदु:

  • ‘इंडियन गैस एक्सचेंज’ प्राकृतिक गैस के लिये एक वितरण-आधारित (Delivery Based) ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म होगा।
  • यह प्लेटफ़ॉर्म ग्राहकों को निर्बाध ट्रेडिंग सुविधा प्रदान करने के लिये पूरी तरह से वेब-आधारित इंटरफ़ेस पर आधारित है।
  • इंडियन गैस एक्सचेंज, ऑनलाइन गैस ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म ‘इंडियन एनर्जी एक्सचेंज’ (Indian Energy Exchange- IEX)  की सहायक/अनुषंगी कंपनी के रूप में कार्य करेगा।
  • इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्राकृतिक गैस का व्यापार रुपये में किया जायेगा जिसमे न्यूनतम आवंटन का आकार 100 मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MBTU) जो कि ऊष्मा की इकाई है, के द्वारा निर्धारित किया गया है।
  • ‘इंडियन गैस एक्सचेंज’ बाजार सहभागियों को मानकीकृत गैस अनुबंधों में व्यापार करने में समर्थ बनाएगा। 

‘इंडियन गैस एक्सचेंज’ की कार्यप्रणाली?

  • यह एक डिजिटल ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म है, जिसके माध्यम से बड़ी संख्या में क्रेता-विक्रेता प्राधिकृत केंद्रों के माध्यम से स्पॉट मार्केट (Spot Market) और वायदा अनुबंध (Forward Market) में आयातित प्राकृतिक गैस का कारोबार कर सकेंगे।
    • इसके लिये तीन केंद्रों (गुजरात के दाहेज, हजीरा और आंध्र प्रदेश का ओडुरु-काकीनाड़ा) का चयन किया गया है। 
  • बिना किसी खरीददार की खोज के इस डिजिटल ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से आयातित ‘तरलीकृत प्राकृतिक गैस’ (LNG) को बेचा जायेगा अर्थात् खरीदारों को उचित मूल्य पाने के लिये अब कई डीलरों से संपर्क करने की आवश्यकता नहीं होगी।
  • ‘इंडियन गैस एक्सचेंज’ में अगले दिन और एक महीने तक की डिलीवरी के लिये अनुबंध की अनुमति है जबकि आमतौर पर प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिये अनुबंध छह महीने से एक वर्ष तक होता है।
  • ध्यातव्य है कि देश में उत्पादित प्राकृतिक गैस की कीमत सरकार द्वारा तय की जाती है जिसे ‘इंडियन गैस एक्सचेंज’ पर नहीं बेचा जाएगा।
    • इसके माध्यम से सिर्फ बाहर से आयातित अर्थात अन्य देशों से आयातित प्राकृतिक गैस की ही खरीदी एवं बिक्री की जाएगी।

स्पॉट मार्केट:

  • स्पॉट मार्केट/कैश मार्केट एक सार्वजनिक वित्तीय बाजार है जिसमें वित्तीय साधनों /वस्तुओं के तत्काल वितरण के लिये कारोबार किया जाता है।

वायदा बाज़ार:

  • वायदा बाज़ार का अभिप्राय उस स्थान से होता है जहाँ वायदा/भविष्य के अनुबंधों को ख़रीदा और बेचा जाता है।
  • वायदा/भविष्य के अनुबंध वे वित्तीय अनुबंध होते हैं जिनमें खरीदार किसी व्यक्ति को भविष्य में पूर्व निश्चित मूल्य पर परिसंपत्ति खरीदने का वचन देता है।

भारत के आयात पर प्रभाव:

  • देश में प्राकृतिक गैस के वर्तमान स्रोत कम होने के कारण गैस का घरेलू उत्पादन पिछले दो वित्तीय वर्षों में कम हुआ है।
  • घरेलू रूप से उत्पादित प्राकृतिक गैस वर्तमान में देश की प्राकृतिक गैस की खपत के आधे से भी कम उत्पादित की जाती है।
  • सरकार द्वारा LNG आयात द्वारा घरेलू गैस की खपत की पूर्ति हेतु योजना बनाई जा रही हैं। 
  • क्योंकि भारत सरकार द्वारा अपने समग्र ऊर्जा खपत में प्राकृतिक गैस के अनुपात को वर्ष 2018 के 6.2% से बढ़ाकर वर्ष 2030 तक 15% करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

क्या नियामक परिवर्तन की आवश्यकता है?

  • वर्तमान में, प्राकृतिक गैस के परिवहन के लिये आवश्यक पाइपलाइन बुनियादी ढाँचे को उन कंपनियों द्वारा नियंत्रित किया जाता है जो स्वय नेटवर्क की मालिक हैं। 
  • राज्य के स्वामित्व वाली ‘गेल’ भारत की सबसे बड़ी गैस पाइपलाइन नेटवर्क का स्वामित्व और संचालन करने वाली कंपनी है, जो 12,000 किमी से अधिक क्षेत्र में फैली हुई है।
  • ‘इंडियन गैस एक्सचेंज’ द्वारा प्राकृतिक गैस पाइपलाइनों के उपयोग के लिये एक स्वतंत्र,पारदर्शी ऑपरेटर पाइपलाइन सिस्टम की आवंटन प्रणाली को सुनिश्चित किया जा सकेगा।
  •  इसके माध्यम से पाइपलाइन के आवंटन में तटस्थता को लेकर खरीदारों एवं विक्रेताओं के मन में विश्वास पैदा किया जा सकता है।

‘इंडियन गैस एक्सचेंज’ का महत्त्व:

  • ‘इंडियन गैस एक्सचेंज’ के माध्यम से LPG टर्मिनलों, गैस पाइपलाइनों, शहर गैस वितरण (City Gas Distribution- CGD) अवसंरचना पर विशाल निवेश तथा बाजार संचालित मूल्य व्‍यवस्‍था के लिये अनुमति प्रदान करने के विचार को भारत द्वारा मूर्त रूप दिया जा सकेगा।
  • यह देश को प्राकृतिक गैस के मुक्त बाजार मूल्य निर्धारण की दिशा में बढ़ाने में मदद करेगा। 
  • बाजार संचालित मूल्य निर्धारण प्रणाली होने से इंडिया गैस एक्सचेंज, गैस के लिये मुक्त बाजार सुनिश्चित करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
  • इसके माध्यम से पर्यावरण अनुकूल, स्वच्छ, किफायती, टिकाऊ ऊर्जा तक जनता की सार्वभौमिक पहुँच संभव होगी।
  • इस उपलब्धि के साथ, भारत प्रगतिशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं के क्लब में शामिल हो सकेगा। 

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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