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जैव विविधता और पर्यावरण

मौसम आधारित आपदाओं की संख्या में वृद्धि

  • 24 Jul 2020
  • 9 min read

प्रीलिम्स के लिये:

AON केटास्ट्रॉफी रिपोर्ट, चक्रवात ईदाई, चक्रवात केनेथ

मेन्स के लिये:

मौसम आधारित आपदाएँ

चर्चा में क्यों?

‘AON केटास्ट्रॉफी’ (Catastrophe) रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 की पहली छमाही में विश्व स्तर पर कम-से-कम 207 प्राकृतिक आपदाएँ दर्ज की गईं। यह 21वीं सदी में अब तक की औसत (वर्ष 2000 से वर्ष 2019 तक ) 185 आपदाओं से अधिक है।

प्रमुख बिंदु:

  • AON एक प्रमुख वैश्विक व्यावसायिक सेवा फ़र्म है जो जोखिम, सेवानिवृत्ति और स्वास्थ्य समाधानों के संबंध में विस्तृत सेवाएँ प्रदान करती है।
  • वर्ष 2020 में प्रथम छमाही में प्राकृतिक आपदाओं की संख्या में विगत वर्ष की तुलना में कम-से-कम 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
  • वर्ष 2019 में जनवरी से जून के बीच 163 प्राकृतिक आपदाओं की तुलना में वर्ष 2020 में कम-से-कम 207 प्राकृतिक आपदाएँ दर्ज की गईं हैं।

प्राकृतिक आपदाएँ और आर्थिक नुकसान:

  • इन आपदाओं से विश्व में लगभग 75 बिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है, यह वर्ष 1980-2019 के दौरान हुए 78 बिलियन डॉलर के औसत नुकसान के करीब है।
  • इन आपदाओं में से 92 प्रतिशत मौसम से संबंधित थी जबकि कुल आर्थिक नुकसान का लगभग 95 प्रतिशत मौसम से संबंधित आपदाओं के कारण हुआ है। 

चक्रवातों की संख्या में वृद्धि:

  • उष्णकटिबंधीय चक्रवात के कारण होने वाला आर्थिक नुकसान वर्ष 2000-2019 के औसत से 270 प्रतिशत अधिक हुआ है।
  • चक्रवात अम्फान के कारण लगभग 15 बिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है। यह उन 20 आपदाओं में शामिल है जिनके कारण होने वाला आर्थिक नुकसान बिलियन डॉलर में है।

मौसम आधारित आपदाओं की संख्या में वृद्धि:

वर्ष 2020 में आई 20 बड़ी आपदाओं में से पोर्टो रीको और जाग्रेब (क्रोएशिया) ने भूकंप को छोड़कर शेष 18 मौसम से संबंधित थीं। 

इन 20 आपदाओं में से 12 से अमेरिका प्रभावित हुआ जबकि एशियाई देशों में भारत और चीन को इन मौसम संबंधी आपदाओं के कारण 20 बिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा।

मौसम आधारित प्रमुख आपदाएँ:

चक्रवात ईदाई (Cyclone Idai):

  • मार्च 2019 में चक्रवात ईदाई के कारण अफ्रीका के ज़िम्बाब्वे, मलावी और मोज़ाम्बिक में 1000 से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई थी। इससे लाखों लोगों की आजीविका तथा बुनियादी सेवाएँ प्रभावित हुई थी।

चक्रवात केनेथ (Cyclone Kenneth): 

  • इससे उत्तरी मोज़ाम्बिक का वह क्षेत्र प्रभावित हुआ जहाँ उपग्रह युग के बाद से कोई उष्णकटिबंधीय चक्रवात नहीं देखा गया।

ऑस्ट्रेलियाई वनाग्नि:

  • ऑस्ट्रेलिया वर्ष 2020 की शुरुआत में ही वनाग्नि (बुशफायर) से बुरी तरह प्रभावित हुआ। इससे सैकड़ों स्थानीय प्रजातियों की मृत्यु हो गई जिनको पारिस्थितिक तंत्र में पुन: स्थापित करना (Restoration) संभव नहीं है।

पूर्वी अफ्रीका में सूखा:

  • जलवायु परिवर्तन ने ‘हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका’ क्षेत्र में सूखे की संभावना को दोगुना कर दिया है। सूखे की वजह से इथियोपिया, केन्या और सोमालिया में 15 मिलियन लोगों को आर्थिक तथा खाद्यान सहायता की ज़रूरत है।

दक्षिण एशिया में बाढ़:

  • हाल ही में बाढ़ और भूस्खलन के कारण भारत, नेपाल और बांग्लादेश में 12 मिलियन लोगों को विस्थापन का सामना करना पड़ा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण एशिया में समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि के कारण मानसून की तीव्रता में वृद्धि हुई है। 

मध्य अमेरिका में शुष्क गलियारा:

  • अलनीनो के प्रभाव के कारण मध्य अमेरिका के शुष्क गलियारे लगातार 6 वें वर्ष सूखे से प्रभावित रहा है।

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वैश्विक स्तर पर 2,200 लोगों की मृत्यु:

  • प्राकृतिक आपदाओं के कारण 2020 की पहली छमाही के दौरान लगभग 2,200 लोगों मौत हुई है। बाढ़ का इसमें सर्वाधिक 60 प्रतिशत मौतें हुई है।
  • एशिया-प्रशांत और अफ्रीका में इस प्राकृतिक आपदाओं के कारण लगभग 71 प्रतिशत लोगों की मृत्यु हुई है। 

वैश्विक तापन और उष्णकटिबंधीय चक्रवात:

  • अंतर-सरकारी जलवायु परिवर्तन पैनल (IPCC) AR5 के अनुसार, वैश्विक तापन में मानव-निर्मित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का प्रमुख योगदान है।  पूर्व-औद्योगिकीकरण युग से पहले वैश्विक तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि पर उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की तीव्रता में 1-10 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। 
  • इसका मतलब यह है कि उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की विनाशकारी क्षमता में आगे और भी अधिक प्रतिशत वृद्धि की संभावना है।

IPCC AR5 और चक्रवात:

  • समुद्र के स्तर में वृद्धि के कारण उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के कारण तटीय क्षेत्रों में बाढ़ की घटनाओं में वृद्धि होगी।
  • वायुमंडलीय नमी की मात्रा में वृद्धि के कारण भविष्य में उष्णकटिबंधीय चक्रवात के कारण होने वाली वर्षा की दर में वृद्धि होगी। 
  • वैश्विक तापन के कारण चक्रवातों की विनाशकारी क्षमता में वृद्धि होगी।
  • 21 वीं सदी में बहुत तीव्र (Very intense) उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की संख्या में वृद्धि होगी।  

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भारत का जलवायु पूर्वानुमान मॉडल:

  • भारतीय मौसम विज्ञान संस्थान' (IITM)- पुणे,  द्वारा तैयार एक ‘जलवायु पूर्वानुमान मॉडल’ के अनुसार, भारत में वर्षा के प्रतिरूप में व्यापक बदलाव देखने को मिला है।
  • वर्षा की तीव्रता में वृद्धि हुई है लेकिन वर्षा-अंतराल में लगातार वृद्धि हुई है। अरब सागर से उत्पन्न होने वाले अत्यधिक गंभीर चक्रवातों की आवृत्ति में वृद्धि हुई है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत की जलवायु में तेज़ी से परिवर्तन के कारण देश के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र, कृषि उत्पादकता और जल संसाधनों पर दबाव बढ़ेगा। 

आगे की राह:

  • चरम मौसमी घटनाओं; विशेष रूप से चक्रवात और बाढ़ के कारण होने वाली आर्थिक क्षति को कम करने के लिये प्रभावी शमन और जलवायु-सुनम्य क्रियाओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है। 
  • चरम मौसमी आपदाओं के कारण विकसित और विकासशील सभी देश प्रभावित होते हैं, परंतु विकसित तकनीकी विकास के कारण इनके प्रभावों को कम करने में सक्षम होते हैं। अत:  विकासशील देशों को मौसम पूर्वानुमान तकनीकें उपलब्ध कराई जानी चाहिये। 

स्रोत: डाउन टू अर्थ

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