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‘सामाजिक विज्ञान में कारग़र नीति अनुसंधान’ (इम्प्रेस)

  • 26 Oct 2018
  • 3 min read

चर्चा में क्यों?

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने नई दिल्ली में ‘सामाजिक विज्ञान में कारग़र नीति अनुसंधान’ (Impactful Policy Research in Social Science - IMPRESS) कार्यक्रम का वेब पोर्टल लॉन्च किया।

प्रमुख विशेषताएँ

  • इस योजना के तहत उच्च शिक्षा संस्थानों में सामाजिक विज्ञान अनुसंधान का समर्थन करने और नीति बनाने के लिये 2 वर्षों में 1500 अनुसंधान प्रोजेक्ट चलाए जाएंगे।
  • 414 करोड़ रुपए की कुल लागत से मार्च 2021 तक इस योजना का संचालन किया जाएगा और अगले साल जनवरी से इसके संबंध में कार्य शुरू हो जाएगा।
  • समाज की प्रगति के लिये सामाजिक विज्ञान में अनुसंधान अनिवार्य है और इस कार्यक्रम के अंतर्गत किये गए अनुसंधान का इस्तेमाल उन समस्याओं के समाधान के लिये किया जाएगा, जिनका सामना समाज को करना पड़ रहा है।

पृष्ठभूमि 

  • सरकार ने अगस्त, 2018 में 31.03.2021 तक कार्यान्वित करने के लिये 414 करोड़ रुपए की कुल लागत के साथ ‘सामाजिक विज्ञान में कारग़र नीति अनुसंधान’ कार्यक्रम को मंज़ूरी दी थी और भारतीय सामाजिक विज्ञान एवं अनुसंधान परिषद को परियोजना कार्यान्वयन एजेंसी बनाया गया था।

कार्यक्रम के प्रमुख लक्ष्य

  • शासन और समाज पर अधिकतम असर डालने वाले सामाजिक विज्ञान में अनुसंधान प्रस्तावों की पहचान और उसके लिये धन प्रदान करना।
  • 11 प्रमुख विषय क्षेत्रों में अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करना जैसे- 
  • राज्य और लोकतंत्र
  • शहरी रूपांतरण
  • मीडिया
  • संस्कृति और समाज
  • रोज़गार
  • कौशल और ग्रामीण रूपांतरण
  • शासन
  • नवाचार और सार्वजनिक नीति
  • विकास
  • वृहद् व्यापार एवं आर्थिक नीति
  • कृषि और ग्रामीण विकास
  • स्वास्थ्य और पर्यावरण
  • विज्ञान और शिक्षा
  • सामाजिक मीडिया और प्रौद्योगिकी
  • राजनीति, विधि और अर्थशास्त्र
  • परियोजनाओं का चयन ऑनलाइन पद्धति से पारदर्शी, प्रतिस्पर्द्धात्मक प्रक्रिया के ज़रिये सुनिश्चित करना।
  • सभी विश्वविद्यालयों (केंद्रीय और राज्य), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा 12 (बी) का दर्जा प्रदत्त प्राइवेट संस्थानों सहित देश के किसी भी संस्थान में सामाजिक विज्ञान अनुसंधानकर्त्ताओं के लिये अवसर प्रदान करना।
  • ICSSR (Indian Council of Social Science and Research) वित्तपोषित/मान्यता प्राप्त अनुसंधान संस्थान भी निर्दिष्ट विषयों और उपविषयों में अनुसंधान प्रस्ताव प्रस्तुत करने के पात्र होंगे।
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