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कृषि

कैसे लगेगी फॉल आर्मीवर्म पर लगाम

  • 02 May 2019
  • 5 min read

चर्चा में क्यों?

फॉल आर्मीवर्म (Fall Armyworm- FAW) की बढ़ती समस्या तथा उससे संबंधित चुनौतियों को समझने और उनसे निपटने हेतु समाधान खोजने के लिये आठ देशों के प्रतिनिधि ‘अर्द्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय अंतर्राष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान’ (International Crops Research Institute for Semi-Arid Tropics-ICRISAT) में 1-3 मई, 2019 तक एक कार्यशाला में भाग ले रहे हैं।

प्रमुख बिंदु

  • बांग्लादेश, म्याँमार, श्रीलंका, भारत और कुछ अन्य दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के प्रतिनिधि ‘एशिया में फॉल आर्मीवर्म प्रबंधन’ पर एक क्षेत्रीय कार्यशाला में भाग ले रहे हैं।
  • अमेरिका कई अफ्रीकी देशों में फॉल आर्मीवर्म की समस्या से निपटने के लिये काम कर रहा है।
  • चूँकि फॉल आर्मीवर्म दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में उभरा है, इसलिये इसके प्रसार को रोकने और फसलों के नुकसान को कम करने के लिये सहयोग की तत्काल आवश्यकता है।

फॉल आर्मीवर्म या स्पोडोप्टेरा फ्रूजाईपेर्डा

  • फॉल आर्मीवर्म या स्पोडोप्टेरा फ्रूजाईपेर्डा (Spodoptera Frugiperda), अमेरिका के उष्ण-कटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाने वाला एक कीट है। यह कीट एशियाई देशों में फसलों को काफी नुकसान पहुँचा रहा है।
  • अमेरिकी मूल का यह कीट दुनिया के अन्य हिस्सों में भी धीरे-धीरे फैलने लगा है।
  • फॉल आर्मीवर्म पहली बार 2016 की शुरुआत में मध्य और पश्चिमी अफ्रीका में पाया गया था और कुछ ही दिनों में लगभग पूरे उप-सहारा अफ्रीका में तेज़ी से फैल गया।
  • दक्षिण अफ्रीका के बाद यह कीट भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश, म्याँमार, थाईलैंड और चीन के यून्नान क्षेत्र तक भी पहुँच चुका है।
  • इस कीड़े की पहली पसंद मक्का है लेकिन यह चावल, ज्वार, बाजरा, गन्ना, सब्जियाँ और कॉटन समेत 80 से अधिक पौधों की प्रजातियों को खा सकता है।
  • वर्ष 2017 में दक्षिण अफ्रीका में इस कीट के फैलने के कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ था।
  • यह कीट सबसे पहले पौधे की पत्तियों पर हमला करता है, इसके हमले के बाद पत्तियाँ ऐसी दिखाई देती हैं जैसे उन्हें कैंची से काटा गया हो। यह कीट एक बार में 900-1000 अंडे दे सकता है।
  • भारतीय उपमहाद्वीप में सबसे पहले मई 2018 में इस विनाशकारी कीट की मौजूदगी कर्नाटक में दर्ज की गई थी और तब से अब तक यह पश्चिम बंगाल तथा गुजरात तक पहुँच चुका है।
  • उचित जलवायु परिस्थितियों के कारण यह न केवल पूरे भारत में बल्कि एशिया के अन्य पड़ोसी देशों में भी फैल सकता है।

आर्मीवर्म के फैलाव की वज़ह

  • जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ संक्रमित और गैर-संक्रमित क्षेत्रों के बीच बढ़ता व्यापार और परिवहन फॉल आर्मीवर्म के फैलाव के कारण हैं, जिसने संभावित रूप से दुनिया की खाद्य सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।
  • गर्म और आर्द्र तापमान (20 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच) तथा लंबे व शुष्क समयांतराल फॉल आर्मीवर्म के प्रजनन के लिये अनुकूल कारक हैं।
  • आर्मीवर्म के फैलाव के कुछ अन्य कारण निम्नलिखित हैं-

♦ प्रजनन में तेज़ी।

♦ भारतीय उपमहाद्वीप के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय जलवायु का आर्मीवर्म के अनुकूल होना, जो उन्हें पूरे साल भोजन उपलब्ध कराती है।

स्रोत- द हिंदू बिज़नेस लाइन

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