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मानव विकास सूचकांक: UNDP

  • 18 Dec 2020
  • 12 min read

चर्चा में क्यों?

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा जारी मानव विकास रिपोर्ट (Humen Develpment Report- HDR) 2020 के अनुसार, मानव विकास सूचकांक ((Humen Develpment Index- HDI) में भारत 131वें स्थान पर है। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष भारत इस सूचकांक में 129वें स्थान पर था। 

  • वर्ष 2020 की इस रिपोर्ट में 189 देशों को उनके मानव विकास सूचकांक (HDI) की स्थिति के आधार पर रैंकिंग प्रदान की गई है।
  • HDR 2020 में पृथ्वी पर दबाव-समायोजित मानव विकास सूचकांक को पेश किया गया है, जो देश के प्रति व्यक्ति कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन तथा सामग्री के पदचिह्न (Footprint) द्वारा मानक मानव विकास सूचकांक (HDI) को समायोजित करता है।
  • अन्य सूचकांक जो इस रिपोर्ट का ही भाग हैं, इस प्रकार हैं:
    • असमानता समायोजित मानव विकास सूचकांक (Inequality adjusted Human Development Index-IHDI) 
    • लैंगिक विकास सूचकांक (GDI), 
    • लैंगिक असमानता सूचकांक (GII) 
    • बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI).

प्रमुख बिंदु

परिचय: HDI इस बात पर ज़ोर देता है कि किसी देश के विकास का आकलन करने के लिये वहाँ के लोगों तथा उनकी क्षमताओं को अंतिम मानदंड माना जाना चाहिये, न कि केवल आर्थिक विकास को।

मानव विकास तीन बुनियादी आयामों पर आधारित होता  है: 

  • लंबा और स्वस्थ जीवन,
  • ज्ञान तक पहुँच,
  • जीने का एक सभ्य मानक।

वर्ष 2019 में शीर्ष स्थान प्राप्तकर्त्ता:

  • नॉर्वे इस सूचकांक में शीर्ष पर है, इसके बाद आयरलैंड, स्विट्ज़रलैंड, हॉन्गकॉन्ग और आइसलैंड का स्थान है।

एशियाई क्षेत्र की स्थिति:

  • वैश्विक सूचकांक में "बहुत उच्च मानव विकास" के साथ एशियाई देशों के मध्य शीर्ष स्थान का प्रतिनिधित्त्व करते हुए सिंगापुर 11वें, सऊदी अरब 40वें और मलेशिया  62वें स्थान पर थे।
  • शेष देशों में से श्रीलंका (72), थाईलैंड (79), चीन (85), इंडोनेशिया और फिलीपींस (दोनों 107) तथा वियतनाम (117)  "उच्च मानव विकास" वाले देशों की श्रेणी में थे।
  • 120 से 156 रैंक तक भारत, भूटान, बांग्लादेश, म्याँमार, नेपाल, कंबोडिया, केन्या और पाकिस्तान "मध्यम मानव विकास" श्रेणी वाले देशों में शामिल थे।

भारत की स्थिति:

  • संपूर्ण प्रदर्शन: वर्ष 2019 के लिये HDI 0.645 है, जो देश को 'मध्यम मानव विकास' श्रेणी में  तथा 189 देशों में 131वें स्थान पर रखता है। 
    • वर्ष 1990 और 2019 के मध्य भारत का HDI मान 0.429 से बढ़कर 0.645 हो गया है, यानी इसमें 50.3% की वृद्धि हुई है।
  • लंबा और स्वस्थ जीवन: वर्ष 2019 में भारत में जन्म के समय जीवन प्रत्याशा 69.7 वर्ष थी, जो दक्षिण एशियाई औसत 69.9 वर्षों की तुलना में थोड़ी कम थी।
    • वर्ष 1990 और 2019 के मध्य भारत में जन्म के समय जीवन प्रत्याशा में 11.8 वर्ष की वृद्धि हुई है।
  • ज्ञान तक पहुँच: भारत में स्कूली शिक्षा के लिये प्रत्याशित वर्ष 12.2 थे, जबकि बांग्लादेश में 11.2 और पाकिस्तान में 8.3 वर्ष थे।
    • वर्ष 1990 और 2019 के बीच स्कूली शिक्षा के प्रत्याशित औसत वर्षों में 3.5 वर्ष की वृद्धि हुई तथा स्कूली शिक्षा के प्रत्याशित अनुमानित वर्षों में 4.5 वर्ष की वृद्धि हुई।
  • जीने का एक सभ्य मानक: प्रति व्यक्ति के संदर्भ में सकल राष्ट्रीय आय (GNI) पिछले वर्ष की तुलना में गिरावट के बावजूद वर्ष 2019 में कुछ अन्य देशों की तुलना में भारत का प्रदर्शन बेहतर रहा है।
    • वर्ष 1990 और 2019 के मध्य भारत के प्रति व्यक्ति GNI में लगभग 273.9% की वृद्धि हुई है।

ग्रहीय दबाव-समायोजित HDI/प्लैनेटरी प्रेशर-एड्जस्टेड HDI (PHDI)

  • PHDI प्रत्येक व्यक्ति के आधार पर देश के कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन और मैटेरियल पदचिह्न (Material Footprint) के मानक HDI को समायोजित करता है।
  • देशों का प्रदर्शन:
    • नॉर्वे जोकि HDI में शीर्ष स्थान पर है, यदि PHDI मीट्रिक में इसका आकलन किया जाए तो यह 15 स्थान नीचे पहुँच जाएगा, आयरलैंड इस तालिका में शीर्ष पर है। 
    • संयुक्त राज्य अमेरिका (HDI रैंक -17) और कनाडा (HDI रैंक -16) प्राकृतिक संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव को दर्शाते हुए PHDI में क्रमशः 45वें और 40वें स्थान पर पहुँच जाएंगे।
    • तेल और गैस से समृद्ध खाड़ी राज्यों के स्थान में भी गिरावट आई है। चीन अपने मौजूदा 85वें स्थान से 16 स्थान नीचे आ जाएगा।
  • भारत का प्रदर्शन:
    • PHDI में आकलन करने पर भारत रैंकिंग में आठ स्थान ऊपर आ जाएगा
    • पेरिस समझौते के तहत भारत ने अपने सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन क्षमता को वर्ष 2005 के स्तर से वर्ष 2030 तक 33-35% कम करने और गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से 40% तक विद्युत शक्ति क्षमता प्राप्त करने का वादा किया।
      • भारत में सौर क्षमता मार्च 2014 में 2.6 गीगावाट से बढ़कर जुलाई 2019 में 30 गीगावाट हो गई, परिणामस्वरूप इसने निर्धारित समय से चार वर्ष पहले ही अपना लक्ष्य (20 गीगावाट) प्राप्त कर लिया।
      • वर्ष 2019 में भारत को संस्थापित सौर क्षमता के लिये 5वाँ स्थान प्राप्त हुआ था।
      • राष्ट्रीय सौर मिशन का उद्देश्य विद्युत् उत्पादन के लिये सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना और सौर ऊर्जा को जीवाश्म ईंधन आधारित विकल्पों के साथ प्रतिस्पर्द्धी बनाना है।

अन्य संकेतक:

  • असमानता-समायोजित मानव विकास सूचकांक (Inequality-adjusted Human Development Index- IHDI) : 
    • IHDI असमानता के कारण HDI में प्रतिशत हानि को प्रदर्शित करता है।
    • वर्ष 2019 के लिये भारत का IHDI स्कोर 0.537 (समग्र नुकसान 16.8%) है
  • लैंगिक विकास सूचकांक (Gender Development Index- GDI):
    • GDI, HDI में असमानता को लैंगिक आधार पर मापता है।
    • वर्ष 2019 के लिये भारत का GDI स्कोर 0.820 (विश्व का 0.943) है।
  • लैंगिक असमानता सूचकांक (Gender Inequality Index- GII) :
    • यह तीन आयामों में महिलाओं और पुरुषों के बीच उपलब्धियों में असमानता को दर्शाने वाली एक समग्र माप है: 
      • प्रजनन स्वास्थ्य 
      • सशक्तीकरण तथा 
      • श्रम बाज़ार।
    • GII में भारत 123वें स्थान पर है। पिछले वर्ष यह 162 देशों में 122वें स्थान पर था। 
  • बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Multidimensional Poverty Index- MPI):
    • MPI में वे आयाम शामिल होते हैं जिनका सामना विकासशील देशों के लोग अपने स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर में करते हैं।
    • भारत के MPI अनुमान के लिये सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सबसे हालिया सर्वेक्षण 2015-2016 का है। भारत में 27.9% जनसंख्या (3,77,492 हज़ार लोग) बहुआयामी गरीबी से ग्रसित है, जबकि इसके अतिरिक्त 19.3% जनसंख्या (2,60,596 हज़ार लोग)को बहुआयामी गरीबी के तहत सुभेद्य के रूप में में वर्गीकृत किया गया है।

अन्य निष्कर्ष:

  • मुख्य चुनौतियाँ: 
    • वर्तमान में जब COVID-19 के विनाशकारी प्रभावों ने विश्व का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है, इसी दौरान जलवायु परिवर्तन से लेकर असमानताओं तक में वृद्धि देखने को मिल रही है। भौतिक और सामाजिक असंतुलन की चुनौतियाँ आपस में संबंधित हैं: ये परस्पर क्रिया द्वारा एक-दूसरे को प्रभावित करती हैं।
  • बच्चों से संबंधित चुनौतियाँ :
  • कंबोडिया, भारत और थाईलैंड में बच्चे कुपोषण से संबंधित मुद्दों जैसे कि स्टंटिंग और वेस्टिंग को दर्शाते हैं।
  • भारत में माता-पिता के व्यवहार में विभिन्न प्रतिक्रियाओं के साथ-साथ लड़कियों के स्वास्थ्य और शिक्षा में कम रूचि के कारण लड़कों की तुलना में लड़कियों में  कुपोषण के मामलों में वृद्धि हुई है।
  • 2020 में विस्थापन:
    • वर्ष 2020 में आपदाओं के कारण सबसे अधिक विस्थापन हुआ। चक्रवात के कारण सबसे अधिक विस्थापन हुआ जिसमें लगभग 3.3 मिलियन लोगों को अपना निवास स्थान खाली करना पड़ा।
  • समाधान:
    • मानव विकास का विस्तार- महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा में वृद्धि, महिलाओं का आर्थिक सशक्तीकरण, घर परिवार में युवा लड़कियों को अधिक सशक्त बनाना, गरीबी में कमी करना आदि।
    • कोलम्बिया से भारत तक के साक्ष्य यह इंगित करते हैं कि वित्तीय सुरक्षा और भूमि का स्वामित्त्व महिलाओं की सुरक्षा में सुधार करता है तथा लिंग आधारित हिंसा के जोखिम को कम करता है। यह स्पष्ट संकेत देता है कि भूमि का स्वामित्व महिलाओं को अधिक सशक्त बना सकता है।

स्रोत: द हिंदू

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