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कृषि

शहद किसान उत्पादक संगठन: TRIFED

  • 29 Dec 2021
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये:

10,000 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), ट्राइफेड की मीठी क्रांति, गठन और संवर्द्धन।

मेन्स के लिये:

भारत में मधुमक्खी पालन और संबंधित पहल।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने TRIFED (भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ) के 14 शहद किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के साथ-साथ विभिन्न अन्य पहल, जैसे- TRIFED वन धन क्रॉनिकल, लघु वन उत्पादों (एमएफपी) के न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिये MIS पोर्टल लॉन्च किया है। ।

  • ट्राइफेड वन धन क्रॉनिकल देश में आदिवासी उद्यमों को बढ़ावा देने के लिये किये गए कार्यों और वन धन विकास योजना के तहत आदिवासी उद्यमियों की उपलब्धियों का दस्तावेज़ीकरण करता है।
  • लघु वन उत्पादों (एमएफपी) के न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिये एमआईएस पोर्टल, जनजातीय मामलों के मंत्रालय और ट्राइफेड के अधिकृत उपयोगकर्ताओं हेतु तैयार किया गया एक डैशबोर्ड है। इस डैशबोर्ड में खरीद केंद्रों और उनके स्थानों की सूची एवं देश भर में की जा रही एमएफपी की खरीद से संबंधित डेटा वास्तविक समय के आधार पर उपलब्ध है।

प्रमुख बिंदु

  • परिचय:
    • अगले पाँच वर्षों में किसानों के लिये मानकीकृत अर्थव्यवस्था सुनिश्चित करने के लिये वर्ष 2020 में "10,000 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का गठन और संवर्द्धन" नामक एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना शुरू की गई थी।
      • इस योजना के अंतर्गत चिह्नित संभावित ज़िलों/राज्यों में 100 एफपीओ का गठन कर मधुमक्खी पालन पर विशेष बल दिया गया है।
    • मधुमक्खी पालन गतिविधियों द्वारा किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास में "मीठी क्रांति" को इसके प्रचार और विकास के लिये भारत सरकार द्वारा महत्त्वपूर्ण गतिविधियों में से एक के रूप में मान्यता दी गई है।
      • राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन (एनएचबीएम) के तहत राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड (एनबीबी) ने देश में 100 समूहों में शहद के लिये वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन मूल्य शृंखला विकसित करने की योजना बनाई गई है।
      • TRIFED को कृषि मंत्रालय द्वारा छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और गुजरात राज्यों में NAFED (नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) और NDDB (नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड) के साथ-साथ 14 शहद FPO के गठन के लिये कार्यान्वयन एजेंसी बनाया गया है। 
  • लाभ:
    • वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन में कौशल उन्नयन।
    • मधुमक्खी के मोम, प्रोपोलिस, रॉयल जेली, मधुमक्खी का ज़हर आदि जैसे शहद और संबद्ध मधुमक्खी पालन उत्पादों के प्रसंस्करण हेतु अत्याधुनिक अवसंरचनात्मक सुविधाएंँ।
    • गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाओं द्वारा गुणवत्ता उन्नयन।
    • संग्रह, भंडारण, बॉटलिंग और विपणन केंद्रों में सुधार करके बेहतर आपूर्ति शृंखला प्रबंधन।
    • कृषि को आत्मनिर्भर कृषि में बदलने के लिये एफपीओ का प्रचार और गठन इस दिशा में पहला कदम है।
  • मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिये सरकार के अन्य प्रयास:
    • सरकार किसानों की आय को दोगुना करने और आदिवासी उत्थान को सुनिश्चित करने के अपने उद्देश्य के तहत मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दे रही है।
    • सरकार द्वारा आत्मानिर्भर अभियान के तहत मधुमक्खी पालन के लिये 500 करोड़ रुपए आवंटित किये गए हैं। 
    • एपिअरी ऑन व्हील्स: यह खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) द्वारा डिज़ाइन की गई एक अनूठी अवधारणा है, जो मधुमक्खी के जीवित कॉलोनियों वाले मधुमक्खी बक्से के आसान रखरखाव और प्रवास को सुनिश्चित करने से संबंधित है।
    • राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड द्वारा राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन (NBHM)  जो कि एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, के तहत प्रशिक्षण प्रदान करने के लिये चार मॉड्यूल बनाए गए हैं।
      • इसके तहत 30 लाख किसानों को मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है और सरकार द्वारा उन्हें आर्थिक सहायता भी दी जा रही है।
      • इस मिशन के अंतर्गत मिनी मिशन 1, मिनी मिशन 2 और मिनी मिशन 3 शामिल हैं।
    • सरकार ने 'मीठी क्रांति' के हिस्से के रूप में NBHM की शुरुआत की।
      • मधुमक्खी पालन और संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये वर्ष 2016-17 में 'मीठी क्रांति' की शुरुआत की गई थी।

स्रोत: पी.आई.बी.

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