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कृषि

10,000 FPOs का गठन एवं संवर्द्धन

  • 03 Mar 2021
  • 6 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा केंद्रीय क्षेत्रक योजना '10,000 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के गठन एवं संवर्द्धन' (Formation & Promotion of 10,000 Farmer Producer Organizations- FPOs) की प्रथम वर्षगाँठ मनाई गई।

प्रमुख बिंदु:

  • शुरुआत:

    • इसकी शुरुआत फरवरी 2020 में उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में 6865 करोड़ रुपए के बजटीय प्रावधान के साथ की गई थी ।
  • FPOs के गठन एवं संवर्द्धन के बारे में:

    • वर्ष 2020-21 में FPOs के गठन हेतु 2200 से अधिक FPOs उत्पादन क्लस्टरों का आवंटन किया गया है।
    • कार्यान्वयन एजेंसियाँ (Implementing Agencies- IAs) प्रत्येक FPO को 5 वर्ष की अवधि हेतु संगठित करने, रजिस्टर करने और पेशेवर हैंडहोल्डिंग समर्थन (Professional Handholding
    • Support) प्रदान करने के उद्देश्य से क्लस्टर-आधारित व्यावसायिक संगठनों Cluster-Based Business Organizations- CBBOs) से जोड़ रही हैं।
      • CBBOs, FPO से संबंधित सभी मुद्दों पर जानकारी प्राप्त करने के लिये एक मंच प्रदान करेगा।
  • वित्तीय सहायता:

    • 3 वर्ष की अवधि हेतु प्रति FPO के लिये 18.00 लाख रुपए का आवंटन।
    • FPO के प्रत्येक किसान सदस्य को 2 हज़ार रुपए (अधिकतम 15 लाख रुपए प्रति एफपीओ) का इक्विटी अनुदान प्रदान किया जाएगा।
    • FPO को संस्थागत ऋण सुलभता सुनिश्चित करने के लिये पात्र ऋण देने वाली संस्था से प्रति एफपीओ 2 करोड़ रुपए तक की ऋण गारंटी सुविधा का प्रावधान किया गया है।
  • महत्त्व:

    • किसान की आय में वृद्धि:
      • यह किसानों के खेतों या फार्म गेट से ही उपज की बिक्री को बढ़ावा देगा जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी।
      • इससे आपूर्ति शृंखला छोटी होने के परिणामस्वरूप विपणन लागत में कमी आएगी जिससे किसानों को बेहतर आय प्राप्त होगी।
    • रोज़गार सृजन:
      • यह ग्रामीण युवाओं को रोज़गार के अधिक अवसर प्रदान करेगा तथा फार्म गेट के निकट विपणन और मूल्य संवर्द्धन हेतु बुनियादी ढांँचे में अधिक निवेश को प्रोत्साहित करेगा।
    • कृषि को व्यवहार्य बनाना:
      • यह भूमि को संगठित कर खेती को अधिक व्यवहार्य बनाएगा।
  • किसानों के लिये अन्य पहलें:

किसान उत्पादक संगठन:

  • निर्माता संगठन (PO) एक कानूनी संस्था है जिसका गठन प्राथमिक उत्पादकों द्वारा किया जाता है, इनमें किसान, दूध उत्पादक, मछुआरे, बुनकर, ग्रामीण कारीगर, शिल्पकार शामिल होते हैं।
    • PO किसी भी उत्पाद के उत्पादकों के संगठन का एक सामान्य नाम है जैसे- कृषि, गैर-कृषि उत्पाद, कारीगर उत्पाद आदि।
  • PO एक उत्पादन कंपनी, सहकारी समिति या कोई अन्य कानूनी फर्म हो सकती है जो सदस्यों के मध्य लाभ/लाभ के बँटवारे का प्रावधान करता है।
    • कुछ रूपों में निर्माता कंपनियाँ, प्राथमिक उत्पादकों के संस्थान PO के सदस्य बन सकते हैं।
  • 'किसान उत्पादक संगठनों (Farmer Producer Organizations- FPOs) में विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसान उत्पादक शामिल होते हैं, ताकि कृषि की कई चुनौतियों का प्रभावी रूप सेसमाधान करने हेतु एक प्रभावी गठबंधन तैयार किया जा सके जैसे- निवेश, प्रौद्योगिकी, आदानों/निविष्टियांँ और बाज़ारों तक बेहतर पहुंँच। FPO, PO का एक प्रकार है जिसके सदस्य किसान होते हैं।
  • सामान्यतः संस्थानों/संसाधन एजेंसियों (RAs) को बढ़ावा देकर FPOs को गतिशीलता प्रदान की जा सकती है।
  • FPOs को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संसाधन एजेंसियाँ (Resource Agencies) सरकारों तथा राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) जैसी एजेंसियों से मिलने वाली सहायता का लाभ उठातीहैं।

स्रोत: पी.आई.बी

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