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भारतीय अर्थव्यवस्था

वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (FSR) दिसंबर, 2018

  • 02 Jan 2019
  • 8 min read

हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक ने वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (Financial Stability Report-FSR) का अठारहवाँ प्रकाशन जारी किया।

  • वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (FSR) एक अर्द्धवार्षिक प्रकाशन है जो भारत की वित्तीय प्रणाली की स्थिरता का समग्र मूल्यांकन प्रस्तुत करती है।
  • FSR वित्तीय स्थिरता के लिये जोखिम, साथ ही वित्तीय प्रणाली के लचीलेपन पर वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (Financial Stability and Development Council-FSDC) की उप-समिति के समग्र आकलन को दर्शाती है।
  • यह रिपोर्ट वित्तीय क्षेत्र के विकास और विनियमन से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा करती है।

प्रणालीगत जोखिमों का समग्र आकलन (Overall Assessment of Systemic Risks)

  • भले ही वैश्विक आर्थिक वातावरण और वित्तीय क्षेत्र में उभरती प्रवृत्ति चुनौतियों का सामना कर रही हो, भारत की वित्तीय प्रणाली स्थिर बनी हुई है और बैंकिंग क्षेत्र में सुधार के संकेत दिखाई देते हैं।

वैश्विक और घरेलू समष्टि-वित्तीय जोखिम (Global and Domestic Macro-financial Risks)

  • 2018 और 2019 के लिये वैश्विक विकास दृष्टिकोण स्थिर बना हुआ है, हालाँकि अंतर्निहित नकारात्मक जोखिम में वृद्धि हुई है।
  • उन्नत अर्थव्यवस्थाओं, संरक्षणवादी व्यापार नीतियों और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव में वित्तीय प्रतिबंधों को सख्त करके उभरने वाली अर्थव्यवस्थाओं के लिये जोखिम और अधिक बढ़ गया है।
  • उन्नत अर्थव्यवस्थाओं (Advanced Economies-AEs) में क्रमिक मौद्रिक नीति के सामान्यीकरण के साथ वैश्विक व्यापार व्यवस्था में अनिश्चितता भी उभरते बाज़ारों (emerging markets-EMs) के पूंजी प्रवाह को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकती है और यह EM ब्याज दरों तथा कॉर्पोरेट के प्रसार पर अतिरिक्त दबाव को बढ़ा सकती है।
  • घरेलू मोर्चे पर सकल घरेलू उत्पाद (Gross Gomestic Product-GDP) की वृद्धि ने 2018-19 की दूसरी तिमाही में मामूली सुधार दिखाया जबकि मुद्रास्फीति (Inflation) अंतर्विष्ट (Contained) है।
  • घरेलू वित्तीय बाज़ारों (Domestic Financial Markets) में, ऋण मध्यस्थता (Credit Intermediate) में संरचनात्मक बदलाव और बैंकों और गैर-बैंकों के बीच विकसित अंतर्संबंध अधिक सतर्कता का आह्वान करते हैं।

वित्तीय संस्थाएं: कार्यनिष्पादन और जोखिम (Financial Institutions: Performance and risks)

  • अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (Scheduled Commercial Banks-SCBs) की क्रेडिट वृद्धि ने मार्च 2018 और सितंबर 2018 के बीच सुधार दर्शाया है, जो बड़े पैमाने पर निजी क्षेत्र के बैंकों (Private sector Banks-PVBs) द्वारा संचालित हैं।
  • बैंकों की आस्ति गुणवत्ता (asset quality) में SCB की सकल गैर-निष्पादित आस्तियों (Gross Non-performing Assets-GNPA) के अनुपात में मार्च 2018 में 11.5 प्रतिशत से सितंबर 2018 में 10.8 प्रतिशत की गिरावट के साथ सुधार देखा गया।
  • आधारभूत परिदृश्य के तहत GNPA का अनुपात सितंबर 2018 के 10.8 प्रतिशत से घटकर मार्च 2019 में 10.3 प्रतिशत हो सकता है।
  • सितंबर 2017 से सितंबर 2018 की अवधि में वित्तीय नेटवर्क संरचना का विश्लेषण एक सिकुड़ते हुए अंतर-बैंकिंग बाज़ार और धन जुटाने के लिये आस्ति प्रबंधन कंपनियों-म्युचुअल फंडों (Asset Management Companies-Mutual Funds-AMC-MFs) तथा ऋण देने के लिये NBFC/हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (Housing Finance Company) के साथ बढ़ते बैंक लिंकेज की ओर संकेत करता है।

भारतीय रिज़र्व बैंक

  • भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना, भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के प्रावधानों के अनुसार 1 अप्रैल, 1935 को हुई।
  • रिज़र्व बैंक का केंद्रीय कार्यालय प्रारंभ में कोलकाता में स्थापित किया गया था जिसे 1937 में स्थायी रूप से मुंबई में स्थानांतरित किया गया।
  • यद्यपि प्रारंभ में यह निजी स्वामित्व वाला था, 1949 में राष्ट्रीयकरण के बाद से इस पर भारत सरकार का पूर्ण स्वामित्व है।
  • वर्तमान में इसके गवर्नर शक्तिकांत दास हैं जिन्होंने उर्जित पटेल का स्थान लिया है।

कार्य


भारतीय रिज़र्व बैंक की प्रस्तावना में बैंक के मूल कार्य इस प्रकार वर्णित किये गए हैं:

  • भारत में मौद्रिक स्थिरता की स्थिति प्राप्त करने की दृष्टि से बैंक-नोटों के निर्गम को विनियमित करना तथा प्रारक्षित निधि (Reserves) को बनाए रखना।
  • सामान्य रूप से देश के हित में मुद्रा और ऋण प्रणाली संचालित करना।
  • अत्यधिक जटिल अर्थव्यवस्था की चुनौती से निपटने के लिये आधुनिक मौद्रिक नीति फ्रेमवर्क तैयार करना।
  • वृद्धि के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखना।

वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद 

  • वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (Financial Stability and Development Council - FSDC) का गठन दिसंबर 2010 में किया गया था।
  • परिषद की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा की जाती है।
  • इसके सदस्यों में भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर, वित्त सचिव, आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव, वित्तीय सेवा विभाग के सचिव, मुख्य आर्थिक सलाहकार, वित्त मंत्रालय, SEBI के अध्यक्ष, IRDA के अध्यक्ष, PFRDA के अध्यक्ष को शामिल किया जाता है।

यह क्या कार्य करता है?

  • परिषद का कार्य वित्तीय स्थिरता, वित्तीय क्षेत्र के विकास, अंतर-नियामक समन्वय, वित्तीय साक्षरता, वित्तीय समावेशन तथा बड़ी वित्तीय कंपनियों के कामकाज सहित अर्थव्यवस्था से जुड़े छोटे-छोटे मुद्दों का विवेकपूर्ण पर्यवेक्षण करना है।
  • इसके अतिरिक्त इस परिषद को अपनी गतिविधियों के लिये अलग से कोई कोष आवंटित नहीं किया जाता है।

स्रोत : रिज़र्व बैंक वेबसाइट

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