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कृषि

आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955

  • 13 Aug 2022
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये:

आवश्यक वस्तु, आवश्यक वस्तु अधिनियम

मेन्स के लिये:

आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 से संबंधित मुद्दे

चर्चा में क्यों?

हाल ही में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने अरहर दाल की कीमतों में वृद्धि को रोकने के लिये आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 लागू किया है।

  • राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को साप्ताहिक आधार पर उपभोक्ता मामलों के विभाग के ऑनलाइन निगरानी पोर्टल पर 'स्टॉकहोल्डर संस्थाओं को उनके द्वारा रखे गए स्टॉक का डेटा अपलोड करने' का निर्देश दिया गया है।

अधिनियम की आवश्यकता

  • कर्नाटक, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के प्रमुख तूर उत्पादक राज्यों के कुछ हिस्सों में अधिक वर्षा और जलभराव की स्थिति के कारण पिछले वर्ष 2021 की तुलना में खरीफ बुवाई में धीमी प्रगति के बीच जुलाई 2022 के मध्य से तूर की कीमतों में वृद्धि हुई है।
  • आगामी त्यौहारों के महीनों में उच्च मांग की वजह से अनुचित मूल्य वृद्धि को नियंत्रित करने हेतु, सरकार घरेलू और विदेशी बाजारों में दालों की समग्र उपलब्धता और नियंत्रित कीमतों को सुनिश्चित करने के लिये पूर्व-खाली कदम उठा रही है।
  • व्यापारियों और जमाखोरों के कुछ वर्गों द्वारा अरहर दाल की कीमतों को बढ़ाने के प्रयासों को सीमित करने के लिये, 'प्रतिबंधित बिक्री' का सहारा लेकर एक कृत्रिम कमी पैदा करना शामिल है।
    • कृत्रिम कमी कीमतों और/अथवा मांग को बढ़ाने के लिये विशेष उत्पादों (या सेवाओं) के उत्पादन की उद्देश्यपूर्ण सीमा है।

आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955:

  • पृष्ठभूमि:
    • ECA अधिनियम, 1955 ऐसे समय में बनाया गया था जब देश खाद्यान्न उत्पादन के लगातार निम्न स्तर के कारण खाद्य पदार्थों की कमी का सामना कर रहा था।
    • तत्कालीन भारत अपनी खाद्य ज़रूरतों की पूर्ति के लिये आयात और सहायता (जैसे पीएल-480 के तहत अमेरिका से गेहूँ का आयात) पर निर्भर था।
    • खाद्य पदार्थों की ज़माखोरी और कालाबाज़ारी को रोकने के लिये वर्ष 1955 में आवश्यक वस्तु अधिनियम लाया गया था।
  • आवश्यक वस्तु:
    • आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 में आवश्यक वस्तुओं की कोई विशिष्ट परिभाषा नहीं है।
    • धारा 2 (ए) में कहा गया है कि "आवश्यक वस्तु" का अर्थ अधिनियम की अनुसूची में निर्दिष्ट वस्तु है।
  • कानूनी क्षेत्राधिकार:
    • अधिनियम केंद्र सरकार को अनुसूची में किसी वस्तु को जोड़ने या हटाने का अधिकार देता है।
    • केंद्र, यदि संतुष्ट है कि जनहित में ऐसा करना आवश्यक है, तो राज्य सरकारों के परामर्श से किसी वस्तु को आवश्यक रूप में अधिसूचित कर सकता है।
  • उद्देश्य:
    • ECA 1955 का उपयोग केंद्र को विभिन्न प्रकार की वस्तुओं में व्यापार के राज्य सरकारों द्वारा नियंत्रण को सक्षम करने की अनुमति देकर मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के लिये किया जाता है।
  • प्रभाव:
    • किसी वस्तु को आवश्यक घोषित करके, सरकार उस वस्तु के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित कर सकती है और स्टॉक सीमा लगा सकती है।

आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955

  • आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20 में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि ECA 1955 के तहत सरकारी हस्तक्षेप ने अक्सर कृषि व्यापार को विकृत किया है, जबकि यह मुद्रास्फीति को रोकने में पूरी तरह से अप्रभावी रहा।
  • इस तरह के हस्तक्षेप से रेंट सीकिंग और कुप्रबंधन के अवसर बढ़ते’ हैं।
    • रेंट सीकिंग अर्थशास्त्रियों द्वारा भ्रष्टाचार सहित अनुत्पादक आय का वर्णन करने के लिये इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है।
  • व्यापारी अपनी सामान्य क्षमता से बहुत कम खरीदारी करते हैं और किसानों को अक्सर खराब होने वाली फसलों के अतिरिक्त उत्पादन के दौरान भारी नुकसान होता है।
  • इसकी वजह से कोल्ड स्टोरेज, गोदामों, प्रसंस्करण और निर्यात में निवेश की कमी के कारण किसानों को बेहतर मूल्य नहीं मिल पा रहा था।
  • इन मुद्दों के चलते संसद ने आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, 2020 पारित किया।
  • हालाँकि किसानों के विरोध के कारण सरकार को इस कानून को रद्द करना पड़ा।

आगे की राह

  • ECA 1955 तब लाया गया था जब भारत खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं था। हालाँकि अब भारत में अधिकांश कृषि-वस्तुओं में अधिशेष की स्थिति है और ECA 1955 में संशोधन सरकार द्वारा किसानों की आय को दोगुना करने तथा व्यवसाय करने में आसानी के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

स्रोत: द हिंदू

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