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प्रधानमंत्री जन धन योजना के आठ वर्ष

  • 29 Aug 2022
  • 13 min read

प्रिलिम्स के लिये:

प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY), वित्तीय समावेशन सूचकांक, डिजिटल पहचान (आधार), वित्तीय साक्षरता केंद्र (CFL) परियोजना, डिजिटल भुगतान का प्रचार, ई-कॉमर्स।

मेन्स के लिये:

गरीबी और भूख से संबंधित मुद्दे, समावेशी विकास, सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप

चर्चा में क्यों?

प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) जो कि वित्तीय समावेशन के लिये एक राष्ट्रीय मिशन है, ने अपने कार्यान्वयन के आठ वर्ष सफलतापूर्वक पूरे कर लिये हैं।

  • PMJDY के तहत 46.25 करोड़ से अधिक लाभार्थियों ने PMJDY की शुरुआत से 1,73,954 करोड़ रुपए की राशि जमा की है।

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प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY):

  • परिचय:
    • प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) वित्तीय समावेशन के लिये राष्ट्रीय मिशन है।
    • यह वित्तीय सेवाओं, अर्थात् बैंकिंग/बचत और जमा खातों, प्रेषण, क्रेडिट, बीमा, पेंशन की सुलभ तरीके से पहुँच सुनिश्चित करता है।
    • PMJDY जन-केंद्रित आर्थिक पहलों की आधारशिला रही है। चाहे वह प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT), कोविड-19 वित्तीय सहायता, PM-KISAN, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बढ़ी हुई मजदूरी जीवन और स्वास्थ्य बीमा कवर हो, इन सभी पहलों का पहला कदम प्रत्येक वयस्क को एक बैंक खाता प्रदान करना है जिसे PMJDY ने लगभग पूरा कर लिया है।
  • उद्देश्य:
    • एक किफायती मूल्य पर वित्तीय उत्पादों और सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित करना।
    • कम लागत और व्यापक पहुँच के लिये प्रौद्योगिकी का उपयोग।
  • योजना के मूल सिद्धांत:
    • बैंक रहित वयस्कों तक बैंक सुविधाओं की पहुँच: न्यूनतम कागजी कार्रवाई के साथ मूल बचत बैंक जमा (BSBD) खाता खोलना, केवाईसी में छूट, ई-केवाईसी, कैंप मोड में खाता खोलना, ज़ीरो बैलेंस और शून्य शुल्क।
    • असुरक्षित को सुरक्षित करना: 2 लाख रुपए के मुफ्त दुर्घटना बीमा कवरेज के साथ, व्यापारिक स्थानों पर नकद निकासी और भुगतान के लिये स्वदेशी डेबिट कार्ड जारी करना।
    • गैर-वित्त पोषित को वित्त पोषण: अन्य वित्तीय उत्पाद जैसे सूक्ष्म बीमा, खपत के लिये ओवरड्राफ्ट, सूक्ष्म पेंशन और सूक्ष्म ऋण।

वित्तीय समावेशन:

  • वित्तीय समावेशन कम आय वाले लोग और समाज के वंचित वर्ग को वहनीय कीमत पर भुगतान, बचत, ऋण आदि वित्तीय सेवाएँ पहुँचाने का प्रयास है। इसे ‘समावेशी वित्तपोषण’ भी कहा जाता है
  • भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में वित्तीय समावेशन विकास प्रक्रिया का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। आज़ादी के बाद से सरकारों, नियामक संस्थानों और नागरिक समाज के संयुक्त प्रयासों ने देश में वित्तीय समावेशन तंत्र को मज़बूत करने में मदद की है ।
  • बैंक खाते तक पहुँच प्राप्त करना व्यापक वित्तीय समावेशन की दिशा में पहला कदम है क्योंकि एक लेनदेन खाता लोगों को पैसे जमा करने, भुगतान करने और धन प्राप्त करने की अनुमति देता है। एक लेनदेन खाता अन्य वित्तीय सेवाओं के लिये प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है।

भारत में वित्तीय समावेशन बढ़ावा देने वाली पहलें:

योजना के प्रमुख छह स्तंभ:

  • बैंकिंग सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुँच: शाखा और बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट्स।
  • ओवरड्राफ्ट सुविधा: रुपए की ओवरड्राफ्ट सुविधा के साथ मूल बचत बैंक खाते। प्रत्येक पात्र वयस्क को 10,000/- रुपए।
  • वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम: बचत को बढ़ावा देना, ATM का उपयोग, ऋण के लिये तैयार करना, बीमा और पेंशन का लाभ उठाना, बैंकिंग हेतु बुनियादी मोबाइल फोन का उपयोग करना।
  • क्रेडिट गारंटी फण्ड का निर्माण: बैंकों को चूक के खिलाफ कुछ गारंटी प्रदान करना।
  • बीमा: 15 अगस्त 2014 से 31 जनवरी 2015 के बीच खोले गए खाते पर 1,00,000 रुपए तक का दुर्घटना कवर और 30,000 रुपए का जीवन कवर।
  • असंगठित क्षेत्र के लिये पेंशन योजना।

इस योजना की उपलब्धियाँ:

  • डिजिटल बैंकिंग के प्रति दृष्टिकोण:
    • खोले गए खाते बैंकों ककोर बैंकिंग प्रणाली का हिस्सा हैं।
    • ध्यानाकर्षण 'हर घर' से हटकर, प्रत्येक बैंक रहित वयस्क पर हो गया है।
    • फिक्स्ड-पॉइंट बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स।
    • बोझिल केवाईसी औपचारिकताओं के स्थान पर सरलीकृत KYC/e- KYC।
  • नई सुविधाओं के साथ PMJDY का विस्तार:
    • ध्यानाकर्षण 'हर घर' से हटकर प्रत्येक बैंक रहित वयस्क पर हो गया है।
    • रुपे कार्ड इंश्योरेंस:
      • 28 अगस्त, 2018 के बाद खोले गए PMJDY खातों के लिये रुपे कार्ड पर मुफ्त दुर्घटना बीमा कवर 1 लाख रुपए से बढ़ाकर 2 लाख रुपए कर दिया गया है।
    • अंतर्संचालनीयता को सक्षम करना:
      • रुपे डेबिट कार्ड या आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AePS) के माध्यम से।
    • ओवरड्राफ्ट सुविधाओं में वृद्धि:
      • ओवरड्राफ्ट की सीमा को 5,000/- रुपए से दोगुनी करते हुए 10,000/- रुपए की गई; 2,000/- रुपए तक का ओवरड्राफ्ट बिना शर्तों के मिलेगा।
      • ओवरड्राफ्ट के लिये अधिकतम आयु सीमा को 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष किया गया।
    • जन धन दर्शक एप (Jan Dhan Darshak App): देश में बैंक शाखाओं, एटीएम, बैंक मित्रों, डाकघरों आदि जैसे बैंकिंग टच प्वाइंट्स का पता लगाने हेतु एक नागरिक केंद्रित प्लेटफार्म प्रदान करने के लिये मोबाइल एप्लीकेशन का शुभारंभ किया गया।
  • वित्तीय समावेशन में वृद्धि:
    • कोविड-19 के कारण देशव्यापी लॉकडाउन के 10 दिनों के भीतर लगभग 20 करोड़ से अधिक महिला PMJDY खातों में अनुग्रह राशि जमा की गई।
    • PMJDY खातों की संख्या मार्च 2015 में 14.72 करोड़ से तीन गुना बढ़कर 10 अगस्त, 2022 तक 46.25 करोड़ हो गई है।
    • अगस्त 2022 में कुल 46.25 करोड़ PMJDY खातों में से 37.57 करोड़ खाते (81.2%) चालू हैं।
      • केवल 8.2% PMJDY खाते शून्य शेष वाले खाते हैं।
    • इन खातों में 2.58 गुना वृद्धि के साथ इनमें जमा होने वाली धनराशि में लगभग 7.60 गुना वृद्धि हुई है (अगस्त 2022 / अगस्त 2015)
  • वित्तीय प्रणाली का औपचारिकरण:
    • यह गरीबों की बचत को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में लाने का अवसर प्रदान करता है, गाँवों में अपने परिवारों को पैसे भेजने के अलावा उन्हें सूदखोर साहूकारों के चंगुल से बाहर निकालने का मौका देता है।
  • लीकेज की रोकथाम:
    • प्रधानमंत्री जन-धन खातों के जरिये DBT ने यह सुनिश्चित किया है कि प्रत्येक रुपया अपने लक्षित लाभार्थी तक पहुँचे और प्रणाली में लीकेज (रिसाव) को रोका जा सके।
  • सुचारू DBT लेनदेन:
    • यह सुनिश्चित करने के लिये कि पात्र लाभार्थियों को उनका DBT समय पर प्राप्त हो, विभाग DBT मिशन, NPCI, बैंकों और कई अन्य मंत्रालयों के साथ परामर्श कर DBT की राह में आनेवाली अड़चनों के टाले जा सकने वाले कारणों की पहचान करने में सक्रिय भूमिका निभाता है।
  • डिजिटल लेनदेन:
    • डिजिटल लेनदेन की कुल संख्या वित्त वर्ष 2016-17 में 978 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2021-22 में 7,195 करोड़ हो गई है।
      • यूपीआई वित्तीय लेनदेन की कुल संख्या वित्त वर्ष 2016-17 में 1.79 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2021-22 में 4,596 करोड़ हो गई है।
      • इसी प्रकार, पीओएस और ई-कॉमर्स में रुपे कार्ड लेनदेन की कुल संख्या वित्त वर्ष 2016-17 में 28.28 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2021-22 में 151.64 करोड़ हो गई है।

आगे की राह:

  • सूक्ष्म बीमा योजनाओं के तहत PMJDY खाताधारकों का कवरेज सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाना चाहिये।
    • पात्र PMJDY खाताधारकों को PMJJBY और PMSBY के तहत कवर करने की मांग की जाएगी। इस बारे में बैंकों को पहले ही सूचित कर दिया गया है।
  • समग्र राष्ट्र में स्वीकृति बुनियादी ढाँचे के निर्माण के माध्यम से PMJDY खाताधारकों के मध्य रुपे डेबिट कार्ड के उपयोग सहित डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना चाहिये।
  • PMJDY खाताधारकों की सूक्ष्म-ऋण और निवेश जैसे आवर्ती जमा खातों आदि तक पहुँच सुनिश्चित करना।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्षों के प्रश्न (PYQs):

प्रिलिम्स:

Q. 'प्रधानमंत्री जन धन योजना' किसके लिये शुरू की गई है? (2015)

(a) निर्धन व्यक्तियों को सस्ती ब्याज दरों पर आवास ऋण उपलब्ध कराना
(b) पिछड़े क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देना
(c) देश में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना
(d) वंचित समुदायों को वित्तीय सहायता प्रदान करना

उत्तर: C

व्याख्या:

  • प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) वित्तीय समावेशन पर एक राष्ट्रीय मिशन है जिसमें देश के सभी परिवारों का व्यापक वित्तीय समावेशन करने के लिये एक एकीकृत दृष्टिकोण शामिल है।
  • इस योजना में बैंकिंग सुविधाओं (हर घर के लिये कम से कम एक बुनियादी बैंक खाते के साथ), वित्तीय साक्षरता, ऋण तक पहुँच, बीमा और पेंशन सुविधा तक सार्वभौमिक पहुँच की परिकल्पना की गई है। इसके अलावा, लाभार्थियों को रुपे डेबिट कार्ड प्रदान किया जाता है, जिसमें दो लाख रुपए का दुर्घटना बीमा कवर होता है।
  • यह सभी सरकारी योजनाओं (केंद्र/राज्य/स्थानीय निकाय से) को लाभार्थी के खातों में प्रसारित करने और केंद्र सरकार की प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) योजना को आगे बढ़ाने का प्रयास करता है।

अतः विकल्प C सही है।


मेन्स:

Q. बैंक खाते से वंचित लोगों को संस्थागत वित्त के दायरे में लाने के लिये प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) आवश्यक है। क्या आप भारतीय समाज के गरीब वर्ग के वित्तीय समावेशन के लिये इससे सहमत हैं? अपने मत की पुष्टि के लिये उचित तर्क दीजिये। (2016)

स्रोत: पी.आई.बी.

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