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भूकंप और दिल्ली-एनसीआर

  • 04 Jul 2020
  • 7 min read

प्रीलिम्स के लिये:

भूकंप, भारत में भूकंपीय ज़ोन, रिक्टर पैमाना, मरकली पैमाना

मेन्स के लिये:

भूकंप और दिल्ली-एनसीआर

चर्चा में क्यों?

वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी’ (Wadia Institute of Himalayan Geology- WIHG) के अनुसार, ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र-दिल्ली’ (National Capital Region-Delhi- NCR Delhi) में हाल ही में आए भूकंप के झटकों की श्रृंखला असामान्य नहीं है और इस क्षेत्र में मौज़ूद तनाव ऊर्जा (Strain Energy) की और संकेत करती है।

प्रमुख बिंदु:

  • WIGH संस्थान ‘विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग’ (Department of Science & Technology- DST) के तहत एक स्वायत्त संस्थान है।
  • WIGH द्वारा दिल्ली-एनसीआर को दूसरे उच्चतम भूकंपीय खतरे वाले क्षेत्र (ज़ोन IV) के रूप में पहचाना गया है।

भूकंपीय तीव्रता का निर्धारण:

  • सामान्यत: किसी भी क्षेत्र में भूकंपीय तीव्रता का निर्धारण करते समय निम्नलिखित पक्षों को ध्यान में रखा जाता है:
    • अतीत में आए भूकंप;
    • तनाव ऊर्जा बजट की गणना;
      • महाद्वीपीय विस्थापन के धरातलीय प्लेटों के विरूपण के कारण पृथ्वी के आंतरिक भागों में संग्रहीत ऊर्जा को तनाव ऊर्जा (Strain energy) कहा जाता है।
    • सक्रिय भ्रंश की मैपिंग।

Delhi-NCR में भूकंप के संभावित कारण:

  • ऊर्जा का मुक्त होना (Release of Energy):
    • कमज़ोर क्षेत्रों या फॉल्ट के माध्यम से तनाव ऊर्जा का मुक्त होना, जो भारतीय प्लेट के उत्तर की और खिसकने तथा यूरेशियन प्लेट के साथ इसकी टक्कर के परिणामस्वरूप जमा होती है।
  • प्लेटों का खिसकना (Movement of Plates):
    • हिमालय भूकंपीय बेल्ट, भारतीय तट यूरेशियन प्लेट से अभिसरण क्षेत्र में स्थित है।
    • हिमालयी क्षेत्र में भूकंप मुख्यत: मेन सेंट्रल थ्रस्ट (MCT) और हिमालयन फ्रंटल थ्रस्ट (HFT) से बीच ही आते हैं। इन भूकंपों का कारण द्विध्रुवीय सतह पर प्लेटों का आपस में खिसकना है।
  • हिमालय से निकटता (Proximity to Himalayas):
    • Delhi-NCR, उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व हिमालय बेल्ट जो भूकंपीय संभावित क्षेत्र V और IV से बहुत दूर स्थित नहीं है।
  • फॉल्ट (Faults) और कगार (Ridges):
  • Delhi-NCR में निम्नलिखित कमज़ोर क्षेत्र और फॉल्ट स्थित हैं:
    • दिल्ली-हरिद्वार कगार,
    • महेंद्र गढ़-देहरादून भ्रंश,
    • मुरादाबाद भ्रंश,
    • सोहना भ्रंश,
    • ग्रेट बाउंड्री भ्रंश,
    • दिल्ली-सरगोडा कगार,
    • यमुना तथा यमुना गंगा नदी की दरार रेखाएँ (lineament)।
  • इन कमज़ोर क्षेत्रों तथा भ्रंशों से आंतरिक तनाव ऊर्जा बाहर निकल सकती है तथा किसी बड़े भूकंप का कारण बन सकती है।

पूर्वाघात (Foreshocks):

  • किसी क्षेत्र में बड़े भूकंप के आने से पूर्व आने वाले कम तीव्रता के भूकंपों को पूर्वाघात के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
  • हालाँकि इस बात का स्पष्ट पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है कि इन कम तीव्रता के भूकंपीय झटकों के बाद कोई बड़ा भूकंप आएगा हालाँकि एक मजबूत भूकंप की संभावना को खारिज भी नहीं किया जा सकता है।

Delhi-NCR में अतीत के भूकंप का परिदृश्य:

भूकंप स्थान वर्ष भूकंप की तीव्रता
दिल्ली 1720 6.5
मथुरा 1803 6.8
मथुरा 1842 5.5
बुलंदशहर 1956 6.7
फरीदाबाद 1960 6.0
मुरादाबाद 1966 5.8

भारत में भूकंपीय ज़ोन (Seismic Zones in India):

  • भूकंपीयता से संबंधित वैज्ञानिक जानकारी, अतीत में आए भूकंप तथा विवर्तनिक व्यवस्था के आधार भारत को चार ‘भूकंपीय ज़ोनों’ में (II, III, IV और V) वर्गीकृत किया गया हैं।
  • यहाँ ध्यान देने योग्य तथ्य यह है पूर्व भूकंप क्षेत्रों को, उसकी गंभीरता के आधार पर पाँच ज़ोनों में विभाजित किया गया था, लेकिन 'भारतीय मानक ब्यूरो' ( Bureau of Indian Standards- BIS) ने प्रथम 2 ज़ोनों का एकीकरण करके देश को चार भूकंपीय ज़ोनों में बाँटा गया है।
  • BIS भूकंपीय खतरे के नक्शे (Hazard Maps) और कोड प्रकाशित करने के लिये आधिकारिक एजेंसी है।

seismic zone map 2020

भूकंपीय तीव्रता का मापन:

रिक्टर पैमाना (Richter Scale):

  • परिमाण पैमाने (Magnitude scale) के रूप में भी जाना जाता है।
  • भूकंप के दौरान उत्पन्न ऊर्जा का मापन से संबंधित है।
  • इसे 0-10 तक पूर्ण संख्या में व्यक्त किया जाता है। हालाँकि 2 से कम तथा 10 से अधिक रिक्टर तीव्रता के भूकंप का मापन सामान्य संभव नहीं है।
मरकली पैमाना (Mercalli Scale):
  • इसे तीव्रता पैमाने (Intensity Scale) के रूप में भी जाना जाता है।
  • घटना के कारण दिखाई देने वाले नुकसान का मापन।
  • पैमाने की परास 1-12 तक होती है।

comparision chart

आगे की राह:

  • भूकंप का सामान्यत: पूर्वानुमान संभव नहीं हैं। हालाँकि भूकंपीय ज़ोन V और IV में बड़े भूकंप की संभावना है जो पूरे हिमालय तथा Delhi-NCR क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है।
  • अत: संभावित जीवन तथा संपत्तियों के नुकसान को कम करने का एकमात्र समाधान भूकंप के खिलाफ प्रभावी तैयारी है। इस मामले में जापान जैसे देशों के साथ बेहतर सहयोग स्थापित किया जा सकता है।
  • नगरीय नियोजन तथा भवनों के निर्माण में आवश्यक भूकंपीय मानकों को लागू किये जाने की आवश्यकता है।
  • भूकंपीय आपदा के प्रबंधन की दिशा में लोगों की भागीदारी, सहयोग और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।

स्रोत: पीआईबी

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