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यूरोप में सूखा

  • 25 Aug 2022
  • 12 min read

प्रिलिम्स के लिये:

सूखा, ग्रीष्म लहरें, भूमि क्षरण, जलवायु परिवर्तन।

मेन्स के लिये:

सूखा - प्रभाव, कारण और इससे निपटने के तरीके।

चर्चा में क्यों?

यूरोप में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के बाद 500 वर्षों में वर्ष 2022 सबसे खराब सूखा वर्ष हो सकता है। बड़ी नदियाँ सूख रहीं हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

  • चीन और अमेरिका भी सूखे की स्थिति का सामना कर रहे हैं।

सूखा

  • परिचय:
    • सूखे को आम तौर पर विस्तारित अवधि में वर्षा में कमी के रूप में माना जाता है, आमतौर पर एक मौसम या उससे अधिक जिसके परिणामस्वरूप जल की कमी होती है जिससे वनस्पति, जानवरों और लोगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
  • कारण:
  • प्रकार:
    • मौसम संबंधी सूखा:
      • यह सूखापन या वर्षा की कमी और शुष्क दीर्घावधि पर आधारित है।
    • हाइड्रोलॉजिकल सूखा:
      • यह जल आपूर्ति पर वर्षा की कमी के प्रभाव पर आधारित है जैसे कि धारा प्रवाह, जलाशय और झील का स्तर और भूजल स्तर में गिरावट।
    • कृषि सूखा:
      • यह वर्षा की कमी, मिट्टी में जल की कमी, निम्न भू-जल स्तर अथवा सिंचाई के लिये आवश्यक जलाशय के स्तर जैसे कारकों द्वारा कृषि पर प्रभाव को संदर्भित करता है।
    • सामाजिक-आर्थिक सूखा:
      • यह फलों, सब्जियों, अनाज और मांँस जैसे कुछ आर्थिक सामग्री की आपूर्ति और मांग पर सूखे की स्थिति (मौसम विज्ञान, कृषि, या जल विज्ञान संबंधी सूखे) के प्रभाव पर विचार करता है।

यूरोप में सूखे की स्थिति

  • वर्तमान परिदृश्य:
    • यह सूखा 500 वर्षों में सबसे चरम सूखा है। वर्ष 1540 में यूरोप में गर्मी इतनी शुष्क थी की एक साल के सूखे ने हज़ारों लोगों की जान ले ली थी।
      • हालाँकि इससे पहले वर्ष 2003, 2010 और 2018 जैसे यूरोपीय सूखे की तुलना भी वर्ष 1540 की घटना से की गई थी।
    • यूरोप की कुछ सबसे बड़ी नदियाँ - राइन, पो, लॉयर, डेन्यूब, जो आमतौर पर महत्त्वपूर्ण जलमार्ग हैं, मध्यम आकार के जहाज़ों के परिवहन में असमर्थ हैं।
    • यूरोपीय आयोग की एजेंसी वैश्विक सूखा वेधशाला (GDO) की विश्लेषणात्मक रिपोर्ट के अनुसार, महाद्वीप का लगभग 64% भूभाग सूखे की स्थिति का सामना कर रहा था।
      • स्विट्रज़लैंड और फ्राँस में लगभग 90% भौगोलिक क्षेत्र, जर्मनी में लगभग 83% और इटली में 75% के करीब क्षेत्र, कृषि सूखे का सामना कर रहा है।
      • आने वाले महीनों में स्थिति में सुधार होने की संभावना नहीं है।
  • कारण:
    • सूखे प्राकृतिक जलवायु प्रणाली का हिस्सा हैं और यूरोप में असामान्य नहीं हैं। असाधारण शुष्क मौसम सामान्य मौसम प्रतिरूप से लंबे समय तक और महत्त्वपूर्ण विचलन का परिणाम रहा है।
      • ग्रीष्म लहरों के कारण कई देशों में तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है।
      • असामान्य रूप से उच्च तापमान के कारण सतही जल और मिट्टी की नमी का वाष्पीकरण बढ़ गया है।
    • चूँकि यह वर्ष 2018 के सूखे कि घटना के मात्र चार वर्ष के अंतराल पर घटित हो रहा है इसलिये इस सूखे की गंभीरता और बढ़ गई है।
      • यूरोप के कई क्षेत्रों अभी पिछले सूखे (वर्ष 2018) से उबर भी नहीं पाए थे तथा वहाँ  मिट्टी की नमी भी सामान्य नहीं हो पाई थी।

ग्रीष्म लहर:

  • ग्रीष्म लहरें असामान्य रूप से उच्च तापमान की अवधि है जो आमतौर पर मार्च और जून के महीनों के बीच होती है और कुछ दुर्लभ मामलों में जुलाई तक भी विस्तारित होती हैं।
  • भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, जब किसी स्थान का अधिकतम तापमान मैदानी इलाकों  में कम से कम 40 डिग्री सेल्सियस और पहाड़ी क्षेत्रों में कम से कम 30C तक पहुँच जाता है, तो उसे ग्रीष्म लहर घोषित की कहा जाता है।
  • प्रभाव:
    • परिवहन: यूरोप विद्युत संयंत्रों के लिये कोयले व अन्य सामग्री के वहनीय परिवहन हेतु इन नदियों पर निर्भर है। कुछ हिस्सों में जल स्तर एक मीटर से भी कम होने के कारण, अधिकांश बड़े जहाज़ो के परिचालन में समस्याएँ आ रहीं हैं।
    • विद्युत उत्पादन: इस घटना से यूरोप में विद्युत उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे यहाँ विद्युत-आपूर्ति में कमी आ गई है तथा ऊर्जा की कीमतों में और वृद्धि हुई है जो रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण पहले से ही अधिक थी।
      • पर्याप्त जल की कमी ने परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के संचालन को प्रभावित किया है, जो शीतलक के रूप में बड़ी मात्रा में जल का उपयोग करते हैं।
    • खाद्य सुरक्षा: कई देशों में खाद्य पदार्थों की कीमतें तेज़ी से बढ़ी हैं और कुछ क्षेत्रों में पीने के पानी के लिये संघर्ष की स्थिति देखी जा रही है इसी क्रम में कृषि भी बुरी तरह प्रभावित हुई है।

अमेरिका और चीन में सूखे की स्थिति:

  • चीन में सूखा:
    • चीन के भी कई हिस्से गंभीर सूखे की ओर बढ़ रहे हैं जिसे 60 वर्षों में सबसे खराब स्थिति बताया जा रहा है।
    • देश की सबसे लंबी नदी यांग्त्ज़ी, जो लगभग एक तिहाई चीनी आबादी की जल आवश्यकता को पूरा करती है, के जल स्तर में रिकॉर्ड गिरावट देखी जा रही है।
    • देश की दो सबसे बड़ी मीठे जल की झीलें, पोयांग और डोंगटिंग वर्ष 1951 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच गई हैं।
    • जल की कमी यूरोप की तरह ही समस्याओं को जन्म दे रही है।
      • सूखे ने चीन में शरद ऋतु के अनाज उत्पादन हेतु एक "गंभीर खतरा" उत्पन्न किया है जिसमें देश के वार्षिक अनाज का लगभग 75% उत्पादित होता है।
      • कुछ क्षेत्रों में विद्युत की कमी ने कारखानों पर वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं पर दबाव डालना शुरू कर दिया है।
  • अमेरिका में सूखा:
    • अमेरिकी सरकार के अनुसार, संयुक्त राज्य में भी 40% से अधिक क्षेत्र वर्तमान में सूखे की स्थिति में है, जिससे लगभग 130 मिलियन लोग प्रभावित हैं।

भारत में सूखा घोषित होने की शर्तें:

  • भारत में सूखे की कोई एकल, कानूनी रूप से स्वीकृत परिभाषा नहीं है। जब किसी क्षेत्र को सूखा प्रभावित घोषित करने की बात आती है तो राज्य सरकार अंतिम प्राधिकरण होती है।
  • सूखे के प्रबंधन के संबंध में भारत सरकार ने दो महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ प्रकाशित किये हैं।
    • पहला कदम दो अनिवार्य संकेतकों - वर्षा विचलन और शुष्क अवधि को देखना है।
      • मैनुअल विचलन की सीमा के आधार पर शुष्कता की विभिन्न स्थितियों को निर्दिष्ट करता है जिन्हें सूखा का संकेतक माना जा सकता है या नहीं।
    • दूसरा कदम चार महत्त्वपूर्ण संकेतकों - कृषि, रिमोट सेंसिंग पर आधारित वनस्पति सूचकांक, मिट्टी की नमी और हाइड्रोलॉजी को देखना है।
      • राज्य सूखे के आकलन, आपदा की तीव्रता के आकलन के लिये चार महत्त्वपूर्ण  संकेतकों (प्रत्येक में से एक) के किन्हीं तीन प्रकारों पर विचार कर सकते हैं और निर्णय ले सकते हैं।
      • यदि चुने गए सभी तीन संकेतक 'गंभीर' श्रेणी में हैं, तो यह गंभीर सूखे की श्रेणी में आता है; और अगर तीन चुने हुए संकेतकों में से दो 'मध्यम' वर्ग में हैं, तो यह संतुलित सूखा है।
    • इन दो जाँचों के अतिरि, तीसरे चरण की शुरुआत होती है। उस घटना में, “राज्य सूखे का अंतिम निर्धारण करने के लिये मिट्टी का सैंपल सर्वेक्षण करती है”।
      • क्षेत्र सत्यापन अभ्यास (field verification exercise) का निष्कर्ष सूखे की तीव्रता को 'गंभीर' या 'संतुलित' के रूप में आँकने का अंतिम आधार होगा।
  • एक बार सूखे का निर्धारण हो जाने के बाद, राज्य सरकार को भौगोलिक सीमा को निर्दिष्ट करते हुए एक अधिसूचना जारी करनी होगी। अधिसूचना छह महीने के लिये वैध होगी जब तक कि पहले से अधिसूचित नहीं किया जाता है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्षों के प्रश्न (PYQs)

प्रिलिम्स:

प्रश्न. निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये: (2014)

कार्यक्रम/परियोजना

मंत्रालय

1. सूखाग्रस्त क्षेत्र

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय

2. मरुस्थल विकास कार्यक्रम

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय

3. वर्षा सिंचित क्षेत्रों के लिये राष्ट्रीय जलग्रहण परियोजना का विकास

ग्रामीण विकास मंत्रालय

उपरोक्त युग्मों में से कौन सा/से सही सुमेलित है/हैं?

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 3
(c) 1, 2 और 3
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं

उत्तर: (d)


मेन्स:

प्रश्न. मरुस्थलीकरण की प्रक्रिया में जलवायु सीमाएँ नहीं होती हैं। उदाहरण सहित पुष्टि कीजिये। (2020)

प्रश्न. भारत के सूखाग्रस्त और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में सूक्ष्म जलसंभर विकास परियोजनाएँ किस प्रकार जल संरक्षण में मदद करती हैं? (2016)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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