प्रयागराज शाखा पर IAS GS फाउंडेशन का नया बैच 10 जून से शुरू :   संपर्क करें
ध्यान दें:

डेली अपडेट्स


जैव विविधता और पर्यावरण

वनाग्नि

  • 19 Jul 2022
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये:

वनाग्नि, जलवायु परिवर्तन

मेन्स के लिये:

वनाग्नि तथा इसको रोकने संबंधी उपाय, सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप, पर्यावरण प्रदूषण और गिरावट

चर्चा में क्यों?

हाल के कुछ दिनों में वनाग्नि (Forest Fire) ने यूरोप (विशेष रूप से दक्षिण-पश्चिम यूरोप) को बुरी तरह से प्रभावित किया है।

  • हज़ारों एकड़ भूमि को नष्ट करने वाली भीषण गर्मी ने जहाँ लोगों को अपना घर छोड़ने के लिये मज़बूर किया है, वहीं इस आपात स्थिति में कार्य कर रहे कई कर्मियों को अपनी जान भी गँवानी पड़ी है।

वनाग्नि क्या है?

  • परिचय:
    • इसे बुश फायर/वेजिटेशन फायर या जंगल की आग भी कहा जाता है, इसे किसी भी अनियंत्रित और गैर-निर्धारित दहन या प्राकृतिक स्थिति जैसे कि जंगल, घास के मैदान, क्षुपभूमि (Shrubland) अथवा टुंड्रा में पौधों/वनस्पतियों के जलने के रूप में वर्णित किया जा सकता है, जो प्राकृतिक ईंधन का उपयोग करती है और पर्यावरणीय स्थितियों (जैसे- हवा तथा स्थलाकृति आदि) के आधार पर इसका प्रसार होता।
    • वनाग्नि के लिये तीन कारकों की उपस्थिति आवश्यक है और वे हैं- ईंधन, ऑक्सीजन एवं गर्मी अथवा ताप का स्रोत।
  • कारण:
    • प्राकृतिक कारण:
      • वनाग्नि प्राकृतिक कारणों से भी प्रेरित हो सकती है जैसे कि कई बार तड़ित/आकाशीय बिजली (Lightning) के कारण भी वृक्षों में आग लग जाती है।
      • हालाँकि इस तरह की वनाग्नि को वर्षा ही बुझा देती है तथा बहुत अधिक क्षति नहीं होती। उच्च वायुमंडलीय तापमान और (निम्न आर्द्रता) इस तरह की वनाग्नि के लिये अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करता है।
    • मानवजनित कारण:
      • खुले में किसी प्रकार कि लौ जलाने, सिगरेट अथवा बीड़ी या इलेक्ट्रिक स्पार्क या प्रज्वलन के किसी स्रोत के ज्वलनशील सामग्री के संपर्क में आने पर भी आग लगने की घटना हो सकती है।

वनाग्नि का वर्गीकरण:

  • सतही आग:
    • वनाग्नि अथवा दावानल की शुरुआत सतही आग (Surface Fire) के रूप में होती है जिसमें वन भूमि पर पड़ी सूखी पत्तियाँ, छोटी-छोटी झाड़ियाँ और लकड़ियाँ जल जाती हैं तथा धीरे-धीरे इनकी लपटें फैलने लगती हैं।
  • भूमिगत आग:
    • कम तीव्रता की आग जो भूमि की सतह के नीचे मौजूद कार्बनिक पदार्थों और वन भूमि की सतह पर मौजूद अपशिष्टों का उपयोग करती है, को भूमिगत आग के रूप में उप-वर्गीकृत किया जाता है। अधिकांश घने जंगलों में खनिज मृदा के ऊपर कार्बनिक पदार्थों का एक मोटा आवरण पाया जाता है।
    • इस प्रकार की आग आमतौर पर पूरी तरह से भूमिगत रूप में फैलती है और यह सतह से कुछ मीटर नीचे तक जलती है।
    • यह आग बहुत धीमी गति से फैलती है और अधिकांश मामलों में इस तरह की आग का पता लगाना तथा उस पर काबू पाना बहुत मुश्किल हो जाता है।
    • इस प्रकार की आग महीनों तक जलती रह सकती है और यह मृदा के वानस्पतिक आवरण को नष्ट कर सकती है।
  • मैदानी आग:
    • यह उप-सतह जैसे कि वन क्षेत्रों के नीचे मौजूद डफ की परतें, आर्कटिक टुंड्रा या टैगा और दलदल की जैविक मृदा में मौजूद कार्बनिक ईंधन में लगने वाली आग है।
      • मिट्टी में अपघटित कार्बनिक पदार्थ को कूड़े का ढेर (Litter) कहते हैं। यह धीरे-धीरे सड़ता है और जब आंशिक रूप से विघटित होता है,तो इसे डफ कहा जाता है।
    • भूमिगत और ज़मीनी सतह की आग के बीच कोई स्पष्ट अंतर नहीं है।
    • सुलगती भूमिगत आग कभी-कभी मैदानी आग में बदल जाती है।
    • यह आग सतह पर या उसके नीचे जड़ और अन्य सामग्री को जला देती है, यानी अपक्षय के विभिन्न चरणों में कार्बनिक पदार्थों की परत के साथ वन भूमि पर विकसित घास को भी जला देती है।
    • जलवायु में तेज़ी से बदलाव के कारण आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, ओडिशा और महाराष्ट्र उच्च तीव्रता वाले वनाग्नि की घटनाओं के लिये सबसे अधिक प्रवण हैं।
    • मिज़ोरम में पिछले दो दशकों में सबसे अधिक वनाग्नि की घटनाएँ हुई हैं, इसके 95% से अधिक ज़िले वनाग्नि के लिये हॉटस्पॉट हैं।
    • जो ज़िले पहले बाढ़ प्रवण थे, वे अब जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप "स्वैपिंग ट्रेंड" कि वजह से सूखा प्रवण बन गए हैं।
    • 75% से अधिक भारतीय ज़िले चरम जलवायु घटना के हॉटस्पॉट हैं और 30% से अधिक ज़िले अत्यधिक वनाग्नि वाले हॉटस्पॉट हैं।
  • उठाए गए कदम:

वनाग्नि पर काबू पाने के लिये आवश्यक उपाय:

  • गर्मियों में जंगल की सीमा के चारों ओर फैले कूड़े को हटाकर आग को रोका जा सकता है।
  • जंगल की सीमा के निर्माण से वनाग्नि को एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाने से रोका जा सकता है।
  • यह वनाग्नि को नियंत्रित करने का सबसे अच्छा तरीका है, इसे फैलने से रोकने का कार्य जंगलों में अग्निरोधक के रूप मे छोटी-छोटी खाइयाँ बनाकर किया जा सकता है।
  • वनों के निकट के क्षेत्रों में सुरक्षित प्रथाओं को अपनाने की आवश्यकता है। कारखानों, कोयले की खानों, तेल भंडारों, रासायनिक संयंत्रों और यहाँ तक कि घरेलू रसोई में भी।
  • इसके अलावा आग की घटनाओं में कमी के लिये अग्निशमन तकनीकों और उपकरणों को शामिल करना।

स्रोत: द हिंदू

close
एसएमएस अलर्ट
Share Page
images-2
images-2