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दिव्यांग व्यक्तियों के लिये खाद्य सुरक्षा

  • 25 Aug 2020
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये:

‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’

मेन्स के लिये:

खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक वितरण से संबंधित प्रश्न, आत्मनिर्भर भारत पैकेज

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ‘केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय’ द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सभी पात्र दिव्यांग व्यक्तियों को ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013’ [National Food Security Act (NFSA), 2013] के अंतर्गत शामिल करने का निर्देश जारी किया गया है।

प्रमुख बिंदु:

  • यह निर्देश ‘केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय’ के अंतर्गत संचालित ‘खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग’ द्वारा जारी किया गया है।
  • इसके तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि NFSA के तहत सभी पात्र दिव्यांग व्यक्तियों को इस अधिनियम तथा ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ [Pradhan Mantri Garib Kalyan Anna Yojana (PMGKAY)] के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित खाद्यान्न प्राप्त हो।
  • ऐसे सभी पात्र व्यक्ति जिन्हें अभी तक यह लाभ नहीं प्राप्त हो रहा है उन्हें पात्रता मानदंड के अनुरूप नए राशन कार्ड जारी करते हुए इसके तहत शामिल किया जाना चाहिये।
  • इसके साथ ही दिव्यांग व्यक्तियों को निर्धारित मानदंडों के अनुरूप राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा निर्धारित प्राथमिकता वाले परिवारों के तहत शामिल किया जाना चाहिये।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की धारा-10 में किसी व्यक्ति को ‘अंत्योदय अन्न योजना’ (Antyodaya Anna Yojana- AAY) के तहत शामिल (योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार) करने और राज्य सरकार द्वारा निर्धारित दिशा निर्देशों के अनुसार शेष घरों को प्राथमिकता वाले घरों के रूप में शामिल करने का प्रावधान है।
    • अंत्योदय अन्न योजना के तहत लाभार्थियों की पहचान के मानदंडों में दिव्यांगता को भी शामिल किया गया है।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की धारा-38 के तहत केंद्र सरकार को इस अधिनियम के उपबंधों के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु समय-समय पर राज्य सरकारों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का अधिकार दिया गया है।

लाभ:

  • भारत सरकार द्वारा घोषित आत्मनिर्भर भारत पैकेज ऐसे लोगों के लिये है जो NFSA या किसी भी राज्य में सार्वजनिक वितरण योजना के तहत लाभार्थी नहीं हैं।
  • ऐसे में बिना राशन कार्ड वाले दिव्यांग व्यक्ति भी आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत लाभ पाने के पात्र हैं।
  • यह योजना 31 अगस्त को समाप्त हो जाएगी ऐसे में खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने सभी राज्यों और केंद्रशासित राज्यों से अनुरोध किया है कि बिना राशन कार्ड वाले दिव्यांग व्यक्तियों की पहचान की जाए तथा उन्हें इस योजना का लाभ प्रदान किया जाए।

‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013’ [National Food Security Act (NFSA), 2013]:

  • ‘राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013’ को 10 सितंबर, 2013 को अधिसूचित किया गया था।
  • इसका उद्देश्य एक गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिये लोगों को वहनीय मूल्‍यों पर अच्‍छी गुणवत्‍ता के खाद्यान्‍न की पर्याप्‍त मात्रा उपलब्‍ध कराते हुए उन्‍हें खाद्य और पौषणिक सुरक्षा प्रदान करना है।
  • इसके तहत ‘लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली’ (Targeted Public Distribution System- TPDS) के अंतर्गत सब्सिडीयुक्त खाद्यान्‍न प्राप्‍त करने के लिये 75%ग्रामीण आबादी और 50% शहरी आबादी के कवरेज का प्रावधान है।

लाभ के प्रावधान:

  • इसके तहत पात्र व्यक्तियों को चावल, गेहूं और मोटे अनाज क्रमश: 3, 2 और 1 रूपए प्रति किलोग्राम के मूल्य उपलब्ध कराए जाते हैं।
    • इस मूल्य पर प्रत्येक लाभार्थी प्रतिमाह 5 किलोग्राम खाद्यान्‍न प्राप्त कर सकता है।
  • इसके तहत वर्तमान अंत्‍योदय अन्‍न योजना में शामिल परिवार प्रति माह 35 किलोग्राम खाद्यान्‍न प्राप्त‍ कर सकते हैं।
  • गर्भवती महिलाओं और स्‍तनपान कराने वाली माताओं को गर्भावस्‍था के दौरान तथा बच्‍चे के जन्‍म के 6 माह बाद भोजन के अलावा कम से कम 6000 रुपए का मातृत्‍व लाभ प्रदान करने का प्रावधान है।
  • वर्तमान में चंडीगढ़, पुडुचेरी में और दादरा व नगर हवेली में इस अधिनियम के क्रियान्वयन में नकद अंतरण विधि का प्रयोग किया जा रहा है।
  • इसके तहत खाद्य सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में जमा की जाती है और उन्हें खुले बाज़ार से खाद्यान्‍न खरीदने का विकल्‍प दिया जाता है।

‘अंत्योदय अन्न योजना’ (Antyodaya Anna Yojana- AAY):

  • ‘अंत्योदय अन्न योजना’ की शुरुआत दिसंबर 2000 में की गई थी।
  • इस योजना का उद्देश्य ‘गरीबी रेखा से नीचे रह रही आबादी तक खाद्यान्न की कमी को पूरा करना था।
  • शुरुआत में इस योजना के तहत लाभार्थी परिवार को प्रति माह 25 किग्रा. खाद्यान्‍न दिये जाने का प्रावधान था जिसे अप्रैल 2002 में बढ़ाकर 35 किग्रा. कर दिया गया।

स्त्रोत: पीआईबी

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