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NRC की अपूर्णता के कारण आधार नामांकन में देरी

  • 14 Jul 2021
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण, आधार

मेन्स के लिये

नागरिकता से संबंधित मुद्दे

चर्चा में क्यों?

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (National Register of Citizen- NRC) की प्रक्रिया को पूरा करने में देरी के चलते असम में 27 लाख से अधिक लोगों के आधार नामांकन में भी अनिश्चितता/देरी हुई है।

  • अगस्त 2019 में एनआरसी के प्रकाशन के बाद इन लोगों के बायोमेट्रिक्स (Biometric) अवरुद्ध (frozen) कर दिये गए थे।
  • केंद्र को पहले बायोमेट्रिक्स की अवरुद्धता हटाने के लिये कहा गया था क्योंकि एनआरसी को अभी तक नागरिकता हेतु एक दस्तावेज़ के रूप में मान्यता नहीं दी गई थी।

आधार

  • यह भारत सरकार की ओर से भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (Unique Identification Authority of India- UIDAI) द्वारा जारी 12 अंकों की व्यक्तिगत पहचान संख्या है।
    • जुलाई 2016 में भारत सरकार द्वारा आधार अधिनियम (Aadhaar Act), 2016 के प्रावधानों का पालन करते हुए यूआईडीएआई इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में स्थापित एक वैधानिक प्राधिकरण है।
  • यह भारत में कहीं भी पहचान और पते के प्रमाण के रूप में कार्य करता है। यह 2 रूपों यथा- भौतिक तथा इलेक्ट्रॉनिक रूप (ई-आधार) में उपलब्ध है।
  • भारत का कोई भी निवासी (वह व्यक्ति जो आधार के नामांकन के आवेदन की तारीख से पहले एक वर्ष में 182 दिनों तक भारत में रहा हो) चाहे वह किसी भी उम्र, लिंग, वर्ग का हो इसका लाभ उठा सकता है।

प्रमुख बिंदु

  • राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर

    • ‘राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर’ (NRC) प्रत्येक गाँव के संबंध में तैयार किया गया एक रजिस्टर होता है, जिसमें घरों या जोतों को क्रमानुसार दिखाया जाता है और प्रत्येक घर में रहने वाले व्यक्तियों की संख्या और नाम का विवरण भी शामिल होता है।
    • यह रजिस्टर पहली बार भारत की वर्ष 1951 की जनगणना के बाद तैयार किया गया था और हाल ही में इसे अपडेट भी किया गया है।
    • इसे अभी तक केवल असम में ही अपडेट किया गया है और सरकार इसे राष्ट्रीय स्तर पर भी अपडेट करने की योजना बना रही है।
    • इसका उद्देश्य ‘अवैध’ अप्रवासियों को ‘वैध’ निवासियों से अलग करना है।
    • महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त, ‘राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर’ के लिये नोडल एजेंसी है।
  • असम में ‘राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर’ का मुद्दा- पृष्ठभूमि

    • असम में इसे अपडेट करने का मुद्दा इस लिहाज़ से महत्त्वपूर्ण है कि असम में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान और वर्तमान बांग्लादेश (वर्ष 1971 के बाद) से काफी बड़े पैमाने पर अवैध प्रवासन देखा गया है।
    • इसके परिणामस्वरूप अवैध प्रवासियों को निर्वासित करने के लिये वर्ष 1979 से वर्ष 1985 तक छह वर्षीय लंबा आंदोलन भी हुआ।
    • वर्ष 1985 में असम समझौते पर हस्ताक्षर के साथ ही यह आंदोलन समाप्त हो गया। इसके तहत अवैध प्रवासियों के निर्वासन के लिये 25 मार्च, 1971 को कट-ऑफ तिथि के रूप में निर्धारित किया गया था।
      • चूँकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 5 और 6 के तहत निर्धारित कट-ऑफ तिथि 19 जुलाई, 1949 थी, इसलिये नई तिथि को लागू करने के लिये नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन कर एक नया खंड पेश किया गया और इसे केवल असम के लिये लागू किया गया था।
      • असम समझौते पर अखिल असम छात्र संघ (AASU), अखिल असम गण संग्राम परिषद और केंद्र सरकार द्वारा हस्ताक्षर किये गए थे।
    • असम लोक निर्माण नामक एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) द्वारा वर्ष 2009 में सर्वोच्च न्यायालय (SC) में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें असम में अवैध बांग्लादेशियों की पहचान और उनके निर्वासन की मांग की गई थी।
    • दिसंबर 2014 में सर्वोच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने आदेश दिया कि NRC को समयबद्ध तरीके से अपडेट किया जाए।
    • वर्ष 2018 के एक निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने पुन: सत्यापन की संभावना का उल्लेख करते हुए कहा था कि वह NRC में शामिल 10% नामों को पुनः सत्यापित करने पर विचार कर सकता है।
    • जुलाई 2019 में असम सरकार ने उच्चतम न्यायलय में एक हलफनामा (Affidavit) दायर किया था, जिसमें राज्य सरकार ने बांग्लादेश सीमा से सटे ज़िलों से NRC में शामिल 20% नामों और शेष ज़िलों से 10% नामों के पुनः सत्यापन किये जाने की मांग की थी।
      • हालाँकि तत्कालीन एनआरसी समन्वयक (NRC Coordinator) द्वारा नामों के पुनर्सत्यापन की बात कहे जाने के बाद सर्वोच्च न्यायलय ने राज्य सरकार की मांग को खारिज कर दिया था।
    • असम सरकार ने वर्ष 2019 में जारी ‘राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर’ (National Register of Citizens- NRC) में शामिल राष्ट्रीयता के दावों के 10-20% नामों के पुनः सत्यापन की अपनी मांग को दोहराया है।
  • वर्तमान परिदृश्य:

    • असम की राज्य सरकार ने राज्य में ' विदेशियों' का पता लगाने के संबंध में नवीनतम डेटा प्रदान किया है।
    • इस डेटा के पुन: सत्यापन की आवश्यकता है क्योंकि असम के लोग एक सही NRC चाहते हैं।
    • इसके अलावा 19 लाख से अधिक बहिष्कृत लोगों की अस्वीकृति पर्ची (Rejection Slips) जारी करने में देरी हुई है जिसके माध्यम से वे राष्ट्रीयता का दावा करने के लिये न्यायालय तक जा सकें।
      • अधिकारियों ने देरी के कारणों के रूप में कोविड -19 महामारी (Covid-19 pandemic) तथा राज्य में बाढ़ का हवाला दिया है।
      • प्रत्येक व्यक्ति के लिये अस्वीकृति पर्चियों में अस्वीकृति का कारण भिन्न होगा और इस कारण के आधार पर वे ‘विदेशी अधिकरण’ (Foreigners’ Tribunal- FT) में अपने निष्कासन को चुनौती देने में सक्षम होंगे।
        • प्रत्येक व्यक्ति जिसका नाम अंतिम NRC में नहीं है, विदेशी ट्रिब्यूनल के सामने अपने मामले का प्रतिनिधित्व कर सकता है।

स्रोत: द हिंदू

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